चीनी के बढ़ते दाम ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। त्योहारों के सीजन में जब घरों में मिठाइयों की मांग बढ़ने वाली है, ऐसे समय चीनी महंगी होना सीधे घरेलू बजट पर असर डाल सकता है। इसी बीच चीनी मिलों के संगठन ISMA ने कहा है कि देश में चीनी की कमी नहीं है और मौजूदा तेजी के पीछे कई वजहें हैं। वहीं, सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी को बिना आयात शुल्क के मंगाने की अनुमति दी है।
चीनी महंगी क्यों हुई?
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के मुताबिक, चीनी के दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह व्यापारियों और बड़े खरीदारों की ज्यादा खरीद और जमाखोरी की अटकलें हैं। इसके अलावा खराब मौसम के कारण इस साल चीनी का उत्पादन शुरुआती अनुमान से कम रहा है।
ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा कि चीनी मिलों ने जानबूझकर बाजार में कमी पैदा नहीं की है। उनका कहना है कि सरकार के आयात के फैसले के बाद कीमतों में अब कुछ नरमी भी देखने को मिल रही है।
10 लाख टन चीनी का आयात
बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा सरकार ने कारोबारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी सख्त की है।
ISMA ने अब मांग की है कि व्यापारियों के लिए मौजूदा 400 टन की स्टॉक सीमा को घटाकर 200 टन किया जाए, ताकि ज्यादा मात्रा में चीनी जमा करके कीमतों को प्रभावित करने की गुंजाइश कम हो।
इथेनॉल के लिए चीनी जाने से दाम बढ़े?
चीनी के बढ़ते दाम के बीच इथेनॉल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, ISMA ने इसे कीमत बढ़ने की मुख्य वजह मानने से इनकार किया है।
संगठन के मुताबिक, 2025-26 सीजन में जुलाई तक करीब 29 लाख टन चीनी इथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट की गई है। पूरे सीजन में यह आंकड़ा करीब 30 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्षों की 20-40 लाख टन की सीमा के भीतर है।
उत्पादन शुरुआती अनुमान से काफी कम
ISMA के मुताबिक, 2025-26 सीजन में इथेनॉल के लिए चीनी डायवर्ट करने के बाद नेट चीनी उत्पादन करीब 2.79 करोड़ टन रहने का अनुमान है।
शुरुआत में कुल चीनी उत्पादन करीब 3.45 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन बाद में इसे घटाकर करीब 3.09 करोड़ टन कर दिया गया।
इसके पीछे खराब मौसम, गन्ने की कम पैदावार और चीनी की रिकवरी कम रहने जैसे कारण बताए गए हैं। महाराष्ट्र में गन्ने की ज्यादा क्रशिंग और उत्तर प्रदेश में रेड रॉट बीमारी से जुड़ी समस्याओं का भी उत्पादन पर असर पड़ा है।
आगे चीनी के दाम घटेंगे?
ISMA के मुताबिक, सितंबर 2026 के अंत में देश के पास करीब 35 लाख टन चीनी का स्टॉक बचने का अनुमान है। वहीं, अक्टूबर में नई चीनी मिलों का पेराई सीजन शुरू होने से बाजार में नई चीनी आनी शुरू हो जाएगी।
संगठन का कहना है कि ड्यूटी-फ्री आयात, स्टॉक सीमा में बदलाव, विशेष पेराई और नए सीजन की जल्दी शुरुआत से बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
हालांकि, आम लोगों के लिए असली राहत तभी होगी जब चीनी के खुदरा दाम वास्तव में नीचे आएं, खासकर त्योहारों के दौरान जब इसकी मांग बढ़ जाती है।
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