त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है और इसी बीच चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाने का फैसला किया है। 16 से 30 सितंबर तक चीनी मिलों को 13.5 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही सितंबर महीने के लिए कुल बिक्री कोटा बढ़कर 26.5 लाख टन हो गया है, जो सितंबर महीने के लिए अब तक का सबसे ज्यादा कोटा है।
जानकारों के मुताबिक, सरकार का यह कदम दशहरा से पहले चीनी की खुदरा कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इस साल दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
पहले हफ्ते में 40% चीनी बेचनी होगी
खाद्य मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, 16-30 सितंबर के लिए तय कोटे में से चीनी मिलों को कम से कम 40 फीसदी चीनी पहले सप्ताह में बेचनी होगी। बाकी मात्रा अगले सप्ताह में बेचनी होगी।
यह व्यवस्था चीनी मिलों पर लागू होगी, रिफाइनर्स पर नहीं। देश के तीन प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक को मिलाकर कुल 12.5 लाख टन के कोटे में से 10.4 लाख टन यानी करीब 83 फीसदी आवंटित किया गया है। इसमें महाराष्ट्र को 4.25 लाख टन, उत्तर प्रदेश को 4.13 लाख टन और कर्नाटक को 2.02 लाख टन का कोटा मिला है।
रिफाइनर्स को सितंबर के दूसरे पखवाड़े के लिए कुल 1 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति दी गई है। यह मात्रा पहले पखवाड़े के बराबर है।
7 दिन के अंदर चीनी की करनी होगी सप्लाई
सरकार ने चीनी मिलों को यह भी निर्देश दिया है कि चीनी बेचने के बाद उसे 7 दिन के अंदर मिल से डिस्पैच करना होगा। बिक्री की तारीख सेल इनवॉइस जारी होने की तारीख मानी जाएगी।
वहीं, सितंबर के पहले पखवाड़े का जो कोटा मिलें बेच नहीं पाईं, उसकी बची हुई मात्रा को आगे बेचने की अनुमति नहीं दी गई है। खाद्य मंत्रालय ने साफ कहा है कि पहले पखवाड़े के बचे कोटे की कोई अतिरिक्त समय सीमा नहीं दी जाएगी।
कोटा पूरा नहीं बेचने वाली मिलों से मांगा जवाब
जिन चीनी मिलों ने पहले पखवाड़े में अपना पूरा आवंटित कोटा नहीं बेचा है, उन्हें दो दिन के अंदर जवाब देना होगा। इसमें यह बताना होगा कि कितनी चीनी नहीं बिक पाई और इसकी वजह क्या रही।
वहीं, जिन मिलों ने तय कोटे से ज्यादा चीनी बेच दी है, उन्हें भी 17 सितंबर तक स्पष्टीकरण देना होगा। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि समय पर जवाब नहीं देने वाली मिलों को अक्टूबर 2026 के लिए रिलीज कोटा नहीं दिया जा सकता है।
सितंबर का कोटा पिछले साल से 13% ज्यादा
16-30 सितंबर के लिए जारी कोटे के बाद 2025-26 सीजन में अब तक घरेलू बाजार के लिए चीनी का कुल आवंटन 272 लाख टन हो गया है। पिछले सीजन 2024-25 में यह मात्रा 275.5 लाख टन थी।
वहीं, देश में सालाना चीनी की खपत करीब 285-290 लाख टन रहने का अनुमान है।
खुदरा चीनी का भाव ₹60 किलो से नीचे
सरकार की ओर से उठाए गए कई कदमों का असर चीनी की कीमतों पर दिखाई देने लगा है। इसमें 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति भी शामिल है। पिछले सप्ताह के अंत से देश में चीनी का औसत खुदरा भाव 60 रुपये प्रति किलो से नीचे आ गया है।
मंगलवार को अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत ₹59.25 प्रति किलो रही। सोमवार को यह ₹59.57 और रविवार को ₹58.99 प्रति किलो थी।
थोक बाजार में दिल्ली में चीनी का भाव ₹5,000 प्रति क्विंटल से नीचे आ गया है। वहीं, चेन्नई में भाव करीब ₹5,600 प्रति क्विंटल रहा।
मिल स्तर पर भी कीमतों में गिरावट आई है। महाराष्ट्र में चीनी का भाव करीब ₹4,500 प्रति क्विंटल तक आ गया है। गुजरात में करीब ₹400-500 की गिरावट के बाद भाव लगभग ₹4,600 प्रति क्विंटल है। उत्तर प्रदेश में भी पिछले सप्ताह करीब ₹4,900 प्रति क्विंटल के स्तर से भाव में नरमी आना शुरू हुई है।
वैश्विक बाजार में भी चीनी के भाव में गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो मंगलवार को न्यूयॉर्क के InterContinental Exchange (ICE) में कच्ची चीनी का वायदा भाव 18 सेंट प्रति पाउंड से नीचे आ गया। वहीं, कैश मार्केट में यह करीब 18.16 सेंट प्रति पाउंड यानी 403.55 डॉलर प्रति टन रहा। लंदन में दिसंबर की White Sugar Futures करीब 529.1 डॉलर प्रति टन पर रही।





