चीनी के बढ़े दामों ने पिछले कुछ दिनों से आम लोगों की जेब पर असर डाला है, लेकिन अब कीमतों में नरमी के संकेत मिलने लगे हैं। बुधवार को मिल गेट पर चीनी का भाव ₹5,000 प्रति क्विंटल से नीचे आ गया। हालांकि, इसका असर अभी दुकानों तक पूरी तरह नहीं पहुंचा है और कई शहरों में लोगों को चीनी 60 रुपये किलो से ज्यादा में ही खरीदनी पड़ रही है।
मिल गेट पर 1,700 रुपये से ज्यादा की गिरावट
पिछले हफ्ते चीनी के दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए थे। इसके बाद मिल गेट कीमतों में ₹1,700 प्रति क्विंटल से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में थोक भाव में भी कम से कम ₹100 प्रति क्विंटल की कमी दर्ज की गई है।
महाराष्ट्र की एक चीनी मिल ने बुधवार को S-30 ग्रेड की चीनी ₹4,801 और M-30 ग्रेड ₹4,901 प्रति क्विंटल में बेची। बाजार कारोबारियों के मुताबिक, खरीदार अब पहले की तुलना में कम कीमत पर चीनी खरीदना चाहते हैं।
दुकानों पर अभी महंगी चीनी
मिलों और थोक बाजार में भाव घटने के बावजूद आम ग्राहकों को अभी इसका फायदा नहीं मिला है। बुधवार को चेन्नई में खुदरा चीनी करीब ₹65 और मुंबई में करीब ₹61 प्रति किलो बिकी। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, देश में चीनी का औसत खुदरा भाव ₹65.05 प्रति किलो पहुंच गया।
नई खरीद के बाद घट सकते हैं खुदरा दाम
व्यापारियों के मुताबिक, दुकानदारों के पास अभी पुराना महंगा स्टॉक है। इसलिए मिलों से सस्ती चीनी मिलने के बावजूद खुदरा कीमत तुरंत कम नहीं हुई है। जैसे-जैसे पुराना स्टॉक खत्म होगा और दुकानदार कम कीमत पर नई चीनी खरीदेंगे, खुदरा भाव में भी राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने भी उठाए कई कदम
चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक की निगरानी और बड़े थोक खरीदारों के लिए स्टॉक सीमा जैसे कदम उठाए गए हैं।
जो खरीदार हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी खरीदते हैं, उन्हें करीब 15 दिन की जरूरत के बराबर ही स्टॉक रखने की अनुमति दी गई है। अब बाजार में नजर इस बात पर है कि मिल गेट की गिरती कीमतों का फायदा आम उपभोक्ताओं तक कब पहुंचता है।
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