नई दिल्ली। किसानों और मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर 10 अगस्त को देशभर में जेल भरो आंदोलन किया गया। SKM के मुताबिक, आंदोलन में किसान, कृषि मजदूर, औद्योगिक मजदूर, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता, छात्र, युवा और महिलाएं शामिल हुए।
SKM ने दावा किया कि कई जगह प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और सरकारी कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। संगठन के मुताबिक, कई कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी होने तक प्रदर्शन स्थल से हटने से इनकार किया।
राष्ट्रपति को सौंपा मांगों का ज्ञापन
SKM ने 28 जुलाई के अपने अखिल भारतीय सम्मेलन और 29 जुलाई को किसानों-मजदूरों के राष्ट्रीय सम्मेलन में तय मांगों को शामिल करते हुए भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।
संगठन की प्रमुख मांगों में सभी फसलों के लिए C2+50% के आधार पर कानूनी MSP और सुनिश्चित खरीद, किसानों के भूमि अधिकारों की रक्षा और कृषि क्षेत्र से कॉरपोरेट कंपनियों को बाहर करने की मांग शामिल है।
मनरेगा और कर्जमाफी की भी मांग
SKM ने खेत मजदूरों के लिए 200 दिनों के रोजगार और ₹700 प्रतिदिन मजदूरी के साथ मनरेगा को बहाल करने की मांग की है। किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों के लिए कर्जमाफी और ₹25 लाख मुआवजे की मांग भी रखी गई है।
इसके अलावा संगठन ने सभी मजदूरों के लिए ₹42,000 न्यूनतम वेतन और चार श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग की है।
बिजली निजीकरण और बीज विधेयक का विरोध
SKM ने बिजली के निजीकरण और प्री-पेड स्मार्ट मीटर का विरोध किया है। संगठन ने बीज विधेयक 2025 को पूरी तरह वापस लेने की भी मांग की है।
साथ ही मुक्त व्यापार समझौतों का विरोध, राज्यों के वित्तीय अधिकारों की रक्षा और केंद्र के विभाज्य कर पूल में राज्यों की हिस्सेदारी को मौजूदा 31% से बढ़ाकर 50% करने की मांग भी की गई है।
26 नवंबर से बड़े आंदोलन की चेतावनी
SKM ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार इन मांगों को स्वीकार नहीं करती है, तो 26 नवंबर 2026 से देशभर में व्यापक और लगातार आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन ने कहा कि यह आंदोलन मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा।


