भारत में कम बारिश और कमजोर मानसून का ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर धीरे-धीरे कम हो रहा है। RBI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गांवों में अब लोगों की कमाई सिर्फ खेती पर निर्भर नहीं है। पशुपालन, दूध, अंडा, मांस और मछली पालन जैसे कामों के साथ ग्रामीण इलाकों में दूसरे रोजगार भी बढ़े हैं। इसके अलावा सिंचाई का दायरा बढ़ने से भी किसानों की मानसून पर निर्भरता कम हुई है।
दूसरे कामों की बड़ी हिस्सेदारी
RBI की रिपोर्ट के मुताबिक, एक एकड़ तक जमीन रखने वाले कृषि परिवारों की कुल कमाई में मजदूरी की हिस्सेदारी 55 फीसदी से ज्यादा है। वहीं फसल उत्पादन और पशुपालन से मिलकर करीब 36 फीसदी आय आती है। इससे पता चलता है कि ग्रामीण परिवारों की कमाई अब सिर्फ फसल पर निर्भर नहीं है।
कम बारिश में खेती पर असर
RBI ने 1994-95 से 2025-26 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि जब मानसून में ज्यादा कमी होती है तो कृषि उत्पादन की बढ़त पर ज्यादा असर पड़ता है। वहीं खेती के अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े दूसरे कामों की ग्रोथ अलग-अलग बारिश की स्थिति में भी करीब 6 फीसदी के आसपास बनी रहती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जब बारिश सामान्य से ज्यादा होती है तो कृषि क्षेत्र की औसत ग्रोथ 5.1 फीसदी रही, जबकि सामान्य बारिश वाले वर्षों में यह करीब 4.3 फीसदी रही।
सिंचाई और फसलों में बदलाव से घट रही मानसून पर निर्भरता
RBI के मुताबिक, खेती के अंदर भी मानसून पर निर्भरता कम होने के कुछ कारण हैं। इनमें सिंचाई का बढ़ता दायरा, मौसम के हिसाब से बेहतर किस्मों का इस्तेमाल और कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ता रुझान शामिल है।
इसके अलावा कृषि क्षेत्र में दूध, अंडा, मांस और मछली पालन जैसी Allied Activities की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। इन कामों पर बारिश की कमी का असर फसल उत्पादन की तुलना में कम पड़ता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था अब पहले से ज्यादा मजबूत
RBI की रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि कम बारिश आज भी खेती के उत्पादन को प्रभावित करती है, लेकिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका असर पहले की तुलना में कम हुआ है। खेती के साथ दूसरे रोजगार और पशुपालन जैसे काम बढ़ने से गांवों की कमाई को सहारा मिल रहा है।


