मानसून में सुधार के चलते देश में दलहन की कुल बुवाई पिछले साल के स्तर के करीब पहुंच गई है। 14 अगस्त तक देश में दलहन का रकबा 108.14 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 108.49 लाख हेक्टेयर था।
हालांकि, तूर और मूंग की बुवाई में करीब 4 फीसदी की कमी है। कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में कम बारिश के कारण तूर का रकबा घटा है। इसके बावजूद देश में पर्याप्त स्टॉक होने से आपूर्ति को लेकर बड़ी चिंता नहीं है।
तूर की बुवाई में उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और आंध्र प्रदेश में बढ़ोतरी ने कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में हुई कमी की भरपाई की है। कर्नाटक में तूर का रकबा 23 फीसदी घटकर 10.53 लाख हेक्टेयर रह गया। महाराष्ट्र में यह 11.79 लाख और मध्य प्रदेश में 2.51 लाख हेक्टेयर रहा।
वहीं, गुजरात में तूर का रकबा 9 फीसदी बढ़कर 2.38 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 7 फीसदी बढ़कर 2.02 लाख हेक्टेयर और आंध्र प्रदेश में 16 फीसदी बढ़कर 1.78 लाख हेक्टेयर हो गया। उत्तर प्रदेश में तूर की बुवाई 39 फीसदी बढ़कर 4.92 लाख हेक्टेयर पहुंच गई।
इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के मानद सचिव सतीश उपाध्याय के मुताबिक, तूर और मूंग के रकबे में कमी चिंता की बात नहीं है, क्योंकि देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार के पास करीब 12 लाख टन दलहन का स्टॉक है। इसके अलावा बंदरगाहों, किसानों और कारोबारियों के पास भी पर्याप्त स्टॉक है।
उड़द की बुवाई ने भी राहत दी है। उत्तर प्रदेश में उड़द का रकबा 65 फीसदी बढ़कर 6.11 लाख हेक्टेयर, राजस्थान में 28 फीसदी बढ़कर 3.99 लाख और मध्य प्रदेश में 19 फीसदी बढ़कर 7.07 लाख हेक्टेयर हो गया है। इससे महाराष्ट्र में हुई कमी की भरपाई हुई है।
मूंग की बुवाई राजस्थान में लगभग पिछले साल के बराबर रही। हालांकि महाराष्ट्र में इसका रकबा 30 फीसदी घटकर 1.45 लाख हेक्टेयर और कर्नाटक में 12 फीसदी घटकर 3.66 लाख हेक्टेयर रह गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सितंबर में पूर्वानुमान के मुताबिक बारिश होती है तो दलहन की पैदावार में सुधार की उम्मीद है।

