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Mulching विधि से लहसुन की खेती, लाखों की कमाई...रतलाम के इस किसान से जानिए तरीक़ा

“हमारा पुश्तैनी परिवार खेती करता रहा है। उस खेती से हटकर मैंने मल्चिंग तकनीक(Mulching) में खेती शुरू की। यह मेरा दूसरा साल है। शुरुआत में मुझे दिक्कतें हुईं। फिर मैंने ज़रूरत की मशीन मँगवा ली। सामान्य

Pooja Rai

Pooja Rai·20 Jan 2025· 3 min read

Mulching विधि से लहसुन की खेती, लाखों की कमाई...रतलाम के इस किसान से जानिए तरीक़ा

Mulching विधि से लहसुन की खेती, लाखों की कमाई...रतलाम के इस किसान से जानिए तरीक़ा

“हमारा पुश्तैनी परिवार खेती करता रहा है। उस खेती से हटकर मैंने मल्चिंग तकनीक(Mulching) में खेती शुरू की। यह मेरा दूसरा साल है। शुरुआत में मुझे दिक्कतें हुईं। फिर मैंने ज़रूरत की मशीन मँगवा ली। सामान्य लहसुन और इस लहसुन में अंतर यह है कि इसकी गुणवत्ता बेहतर है और उत्पादन भी दोगुना से ज्यादा है।" यह कहना है किसान जगदीश पाटीदार का।

जगदीश मध्य प्रदेश के रतलाम ज़िले के रहने वाले हैं। मध्य प्रदेश का यह क्षेत्र प्याज़ और लहसुन की खेती का गढ़ माना जाता है। जगदीश लहसुन की खेती करते हैं। एक खेत में उन्होंने पुराने तरीक़े से लहसुन की खेती है और दूसरे में मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल किया है। वो बताते हैं कि पुराने तरीक़े से लहसुन्न की खेती से मुश्किल से 7 से 8 क्विंटल प्रति बीघा निकलता है जबकि मल्चिंग तकनीक से लगभग 25 क्विंटल प्रति बीघा निकला है, जो की सामान्य से बहुत अधिक है।

जगदीश ने न्यूज़ पोटली को बताया कि “मैं पहला किसान था, जो मेरे क्षेत्र में ऐसे मल्चिंग में लहसुन की खेती पहली बार करी। लोगों का कहना है कि मल्चिंग में केवल ऊँटी लहसुन ही सही होता है लेकिन मैंने देखा कि लहसुन की जी 2, विदिशा क़िस्मों के अलावा अगर हम देशी लहसुन भी लगाते हैं तो उत्पादन अच्छा होता है”

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उन्होंने बताया कि वो सिंचाई के लिए ड्रिप का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन बुवाई मज़दूरों ने किया है। उनके मुताबिक़ इस तरीक़े में मज़दूर कम लगते हैं। इसलिए लागत भी कम लगती है, खेत में खरपतवार नहीं लगते तो खरपतवार नियंत्रण का कोई खर्च नहीं है। इसलिए इसमें खर्चा कम और मुनाफ़ा ज़्यादा हुआ।

उनके मुताबिक़ पुराने तरीक़े के मुकाबले मल्चिंग तकनीक से 20-30% ज्यादा उत्पादन हुआ। बताया कि पुराने तरीके से लहसुन की खेती में 2-3 सालों बाद मिट्टी की उर्वरता और उत्पादन क्षमता कम हो जाती है। इसके विपरीत, मल्चिंग तकनीक के इस्तेमाल से ना केवल मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है, बल्कि लगातार बेहतर उत्पादन मिलता रहता है।

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मल्चिंग तकनीक को बेहतर बताते हुए उन्होंने कहा कि इस तकनीक से मिट्टी में नमी और पोषण बना रहता है, जिससे लंबे समय तक बेहतर गुणवत्ता की फसल उगाई जा सकती है। उनके पुराने तरीके से उगाए गए लहसुन का दाम 15,000-16,000 रुपये प्रति क्विंटल मिला, जबकि मल्चिंग विधि से उगाए गए लहसुन का दाम 25,000-27,000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिला।

तो बात ये है कि जगदीश पाटीदार ने मल्चिंग तकनीक के इस्तेमाल से 40 लाख रुपये की कमाई कर ये साबित कर दिया है कि अपने अनुभव और तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाये तो कम लागत में उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है और उत्पाद की क्वालिटी भी बेहतर की जा सकती है

मल्चिंग तकनीक क्या है?

खेती करने की यह एक ऐसी विधि है, जिसमें प्लास्टिक शीट या दूसरे जैविक पदार्थों से मिट्टी को ढक दिया जाता है। इससे खरपतवार नहीं उगती, मिट्टी में नमी बनी रहती है और पोषण का अधिकतम उपयोग संभव होता है।

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