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Milk Production: प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए योगी सरकार का बड़ा प्लान, इसके लिए 10 हज़ार पशु सखियों को दी जाएगी ट्रेनिंग

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य में पशुधन को बढ़ावा देने के लिए और ग्रामीण लोगों के आर्थिक विकास के लिए A -Help कार्यक्रम का संचालन करने जा रहे हैं, जिसे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और पशुपालन विभाग क

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Pooja Rai·Correspondent·13 Jul 2024· 2 min read

Milk Production: प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए योगी सरकार का बड़ा प्लान, इसके लिए 10 हज़ार पशु सखियों को दी जाएगी ट्रेनिंग

Milk Production: प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए योगी सरकार का बड़ा प्लान, इसके लिए 10 हज़ार पशु सखियों को दी जाएगी ट्रेनिंग

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य में पशुधन को बढ़ावा देने के लिए और ग्रामीण लोगों के आर्थिक विकास के लिए A -Help कार्यक्रम का संचालन करने जा रहे हैं, जिसे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और पशुपालन विभाग के संयुक्त प्रयास से संचालित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को पहले पायलट प्रोजेक्ट के तहत अगस्त माह के पहले हफ्ते में लांच किया जाएगा। शुरुआत में इसे 25 जिलों के 50 विकास खंडों में लागू किया जाएगा, जिसके बाद योगी सरकार इसे पूरे प्रदेश में लागू करेगी। इसके अंतर्गत अगले दो साल में 10 हजार पशु सखियों को प्रशिक्षित भी किया जाएगा।

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन डायरेक्टर दीपा रंजन ने मीडिया से बात कर बताया कि ग्रामीणों की आय बढ़ाने एवं उच्च गुणवत्ता के दुधारु पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए लगातार प्रदेश भर में विभिन्न कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। इसी के तहत प्रदेश के 25 जिलों के 50 विकास खंडों में A -Help कार्यक्रम का संचालन पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर किया जाएगा।

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क्या है इसका उद्देश्य-
1.इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी पशु चिकित्सालयों के साथ मिलकर ज़रूरी पशु चिकित्सा सेवाओं जैसे पशु रोगों की रोकथाम, समय पर टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, पशु बीमा आदि को गांव स्तर पर ही उपलब्ध करना है।

2.इसके तहत वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2,000 पशु सखियों को A -Help एजेंट के रूप में प्रशिक्षित किया जाये, जिसका अगले दो वर्षों में यह संख्या बढ़कर 10,000 एजेंटों तक पहुंचने की उम्मीद है, जिससे कार्यक्रम को जन जन तक पहुँचाने में आसानी होगी।

3.A -Help कार्यक्रम का उद्देश्य पशु सखियों की आय को बढ़ावा देना भी है, इस योजना से उनकी वार्षिक आय 60,000 रुपये तक बढ़ सकती है।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के तहत कवर किए गए जिलों और विकास खंडों में मिशन स्टाफ का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। इसके अलावा, पशु सखियों को आवश्यक कौशल और ज्ञान से लैस करने के लिए प्रशिक्षण योजनाएं विकसित की गई हैं ताकि वे अपनी भूमिकाओं को प्रभावी ढंग से निभा सकें। इससे न केवल पशुधन उत्पादकता और स्वास्थ्य में सुधार करेगा, बल्कि ग्रामीण लोगों को पशुपालन से ज़्यादा आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए आवश्यक ज्ञान और संसाधनों से भी मदद करेगा।

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