महाराष्ट्र में इस बार बारिश किसानों का साथ देती नजर नहीं आ रही है। लंबे समय से बारिश में आए ब्रेक ने खरीफ फसलों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर मराठवाड़ा में हालात ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। कम बारिश का असर अब खेतों के साथ-साथ पानी और पशुओं के चारे पर भी दिखने लगा है। राज्य में सितंबर की शुरुआत तक सामान्य से करीब 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि मराठवाड़ा में बारिश की कमी करीब 37 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
जिलों की बात करें तो सोलापुर में सबसे ज्यादा 53 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। इसके बाद बीड और हिंगोली में 49-49 प्रतिशत, जालना में 45 प्रतिशत, अमरावती और परभणी में 42-42 प्रतिशत, नंदुरबार और धाराशिव में 41-41 प्रतिशत और अकोला में 38 प्रतिशत बारिश कम हुई है। वहीं नांदेड, वाशिम, नागपुर और सिंधुदुर्ग में 34-34 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है।
मराठवाड़ा में स्थिति इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि कई इलाकों में 35 से45 दिनों तक बारिश का लंबा ब्रेक रहा है। इसका सीधा असर सोयाबीन, कपास और मक्का जैसी खरीफ फसलों पर पड़ रहा है। बीड में करीब 3 लाख हेक्टेयर फसल पर संकट की खबरें सामने आई हैं।

तालुका स्तर पर ज्यादा चिंता
राज्य की औसत बारिश से ज्यादा गंभीर तस्वीर कई तालुका और मंडल स्तर पर दिखाई दे रही है। मराठवाड़ा के 76 तालुकों में से 24 तालुक ऐसे हैं, जहां जून से सितंबर के बीच होने वाली सामान्य बारिश की आधी बारिश भी नहीं हुई है।
बारिश कम होने से कुएं, बोरवेल, नाले और दूसरे जलस्रोतों पर भी दबाव बढ़ रहा है। अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों के साथ रबी की खेती और पीने के पानी को लेकर भी परेशानी बढ़ सकती है।
सरकार ने मांगी फसल की रिपोर्ट
इसी बीच राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मराठवाड़ा के सभी जिलाधिकारियों, प्रांत अधिकारियों और तहसीलदारों को खेतों का दौरा कर फसल की स्थिति की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से किसानों की फसल, पानी और पशुओं के चारे की स्थिति की जानकारी जुटाने को कहा गया है। समीक्षा बैठक में बताया गया कि छत्रपति संभाजीनगर विभाग में अब तक सामान्य बारिश की 57.78 प्रतिशत बारिश ही हुई है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 106.38 प्रतिशत था। जिलेवार देखें तो छत्रपति संभाजीनगर में 82.36 प्रतिशत, जालना में 80.04 प्रतिशत, नांदेड में 74.23 प्रतिशत, हिंगोली में 70.08 प्रतिशत, बीड में 64.05 प्रतिशत, धाराशिव में 62.73 प्रतिशत, परभणी में 55.34 प्रतिशत और लातूर में 52.18 प्रतिशत बारिश हुई है।
विभाग के कुल 496 मंडलों में से 218 मंडल ऐसे हैं, जहां सामान्य बारिश के मुकाबले 50 से 75 प्रतिशत तक ही बारिश हुई है।
बांधों में कितना पानी?
बारिश कम होने का असर अब बांधों और दूसरे जलस्रोतों पर भी दिख रहा है। छत्रपति संभाजीनगर विभाग के 11 बड़े बांधों में 66.74 प्रतिशत पानी है, जबकि 76 मध्यम बांधों में 21.34 प्रतिशत और 780 छोटे बांधों में सिर्फ 20.48 प्रतिशत पानी बचा है।
वहीं विभाग में करीब 93 प्रतिशत खरीफ क्षेत्र में बुआई हो चुकी है। अब फसल को बचाने के लिए किसानों को आगे की बारिश का इंतजार है।
चारे को लेकर भी चिंता
बारिश की कमी का असर सिर्फ फसलों तक सीमित नहीं है। पशुओं के चारे को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। हालांकि फिलहाल विभाग में करीब 55.66 लाख पशुधन के लिए 1.07 करोड़ मीट्रिक टन चारा भंडार उपलब्ध बताया गया है। लेकिन अगर बारिश की स्थिति आगे भी खराब रही तो चारे और पानी की समस्या बढ़ सकती है।
जानकारी के मुताबिक 23 अगस्त से 11 सितंबर के बीच करीब 20 दिनों तक अच्छी या लगातार बारिश नहीं हुई। यानी इस दौरान बारिश का लंबा ब्रेक रहा। ऐसे में सरकार अब फसलों के साथ पानी और चारे की स्थिति का भी जायजा ले रही है।
अब खेतों की स्थिति देखकर होगा फैसला
सरकार ने अधिकारियों को सिर्फ कागजों पर आंकड़े देखने के बजाय सीधे खेतों में जाकर फसल की स्थिति देखने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद फसल, पानी, चारे और किसानों की स्थिति की रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
बारिश की कमी लगातार बनी रही तो सूखे जैसे हालात और गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में किसान संगठनों और किसानों की मांग है कि सरकार फसल नुकसान का आकलन कर समय रहते राहत और जरूरी उपायों पर फैसला ले। महाराष्ट्र में लंबे ड्राई स्पेल के कारण फसल नुकसान का तत्काल सर्वे कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
रिपोर्ट: सिद्धनाथ माने, लातूर





