मुंबई। महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अगले छह से आठ महीने तक अतिरिक्त सहायता देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए रोजगार उपलब्ध कराने, जरूरतमंदों तक अनाज पहुंचाने, पेयजल की व्यवस्था करने और पशुओं के लिए चारे व पानी का इंतजाम करने की योजना बनाई जा रही है। यह जानकारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय सूखा निरीक्षण दल के साथ हुई बैठक में दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्रीय दल सूखाग्रस्त क्षेत्रों की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय दल ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्तर पर सूखे की स्थिति का जायजा लिया है। इससे प्रभावित लोगों को अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचने की उम्मीद जगी है। दल के दौरे से सूखे की गंभीरता को केंद्र सरकार के सामने रखने में मदद मिलेगी।
दो महीने तक बारिश नहीं होने से फसलों को भारी नुकसान
फडणवीस ने बताया कि मानसून के शुरुआती दो महीनों में अच्छी बारिश होने से रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद थी। लेकिन फसलों में फूल आने के समय करीब दो महीने तक बारिश नहीं हुई। इसका सबसे ज्यादा असर सोयाबीन की फसल पर पड़ा है। कपास, अरहर और गन्ने की फसलें भी प्रभावित हुई हैं।
पानी की कमी के कारण रबी फसलों की बुवाई की संभावना कम हो गई है, जबकि गर्मी की फसलों से भी किसानों को ज्यादा उम्मीद नहीं है। ऐसे में किसान खरीफ फसलों में हुए नुकसान की भरपाई रबी या गर्मी की फसलों से नहीं कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि खेती के साथ खेत मजदूरी पर निर्भर छोटे किसानों के सामने भी आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में रोजगार और खाद्य सुरक्षा योजनाओं के जरिए प्रभावित परिवारों को राहत देने की तैयारी की जा रही है।
अगस्त 2027 तक पेयजल को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के कई छोटे गांवों में जलस्रोत सूख गए हैं। ऐसे इलाकों में टैंकरों के जरिए बड़े पैमाने पर पानी पहुंचाना पड़ सकता है। टैंकरों से होने वाली जलापूर्ति को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए तकनीक आधारित योजना तैयार की जा रही है।
उन्होंने बताया कि उपलब्ध जल भंडार में अगस्त 2027 तक पेयजल की जरूरतों के लिए प्राथमिकता के आधार पर पानी आरक्षित किया गया है। इसमें लोगों और पशुओं की जरूरतों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। अन्य कामों के लिए पानी देने से पहले पेयजल की जरूरतों को पूरा किया जाएगा। इस व्यवस्था का सख्ती से पालन किया जाएगा।
जरूरत पड़ने पर शुरू होंगी चारा छावनियां
फडणवीस ने कहा कि विभिन्न जिलों में उपलब्ध चारे का भंडार करीब 90 से 120 दिनों तक के लिए पर्याप्त है। जिन क्षेत्रों में मिट्टी में नमी बची हुई है, वहां चारा उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। सरकार द्वारा तय दरों पर चारा खरीदकर उसका भंडारण किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अच्छी बारिश वाले दूसरे राज्यों से भी चारा मंगाने पर विचार किया जाएगा।
पशुधन को बचाने के लिए जरूरत के अनुसार चारा छावनियां और पशु शिविर भी शुरू किए जाएंगे।
इसके अलावा पुराने जलस्रोतों से गाद निकालने, उनकी मरम्मत करने और उन्हें दोबारा उपयोगी बनाने के काम बड़े पैमाने पर किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले 25 हजार गांवों में ऐसे काम किए गए थे, जिससे बारिश में 15 से 17 प्रतिशत की कमी के बावजूद राहत मिली थी।
इस बार भी इन कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सॉफ्टवेयर और ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। जलसंधारण के लिए पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर निचले इलाकों तक काम करने की योजना है। इसके तहत ग्रामीणों की भागीदारी से पुराने ढांचों की मरम्मत और नए ढांचों का निर्माण किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
केंद्र से जल्द सहायता मिलने की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के निर्धारित मानकों के अनुसार आंकड़ों पर आधारित विस्तृत प्रस्ताव सौंपेगी। केंद्रीय कृषि मंत्री के संपर्क के बाद अग्रिम ज्ञापन भी सौंपा जा चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री ने अंतरमंत्रालयी समूह की बैठक जल्द बुलाकर सहायता प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन दिया है।
उन्होंने कहा कि फसल बीमा का दायरा अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद बीमा कराने वाले किसानों को जल्द लाभ दिलाने के लिए राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से प्रयास करेगी।
मुंबई स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा में हुई इस बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन, कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे, राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव पाटील और केंद्रीय सूखा निरीक्षण दल के प्रमुख व केंद्रीय संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल सहित दल के अन्य सदस्य मौजूद थे।





