बीड। महाराष्ट्र के बीड जिले में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रभावित किसानों को दिवाली से पहले मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए फसल कटाई प्रयोग समय पर पूरे करें और फसल नुकसान का सटीक आकलन करें। यह निर्देश केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव और केंद्रीय अंतरमंत्रालयी दल के प्रमुख मुक्तानंद अग्रवाल ने दिए।
बीड जिले में सूखे की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे केंद्रीय दल ने फसल नुकसान, पेयजल संकट, भूजल स्तर, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता और किसानों को सहायता राशि के वितरण की समीक्षा की। इस दौरान पात्र किसानों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए जरूरी प्रक्रियाओं में तेजी लाने पर जोर दिया गया।
7.42 लाख हेक्टेयर में फसलें प्रभावित
जिले में सूखे के कारण करीब 7.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं। 8.22 लाख से अधिक किसान इस नुकसान से प्रभावित हुए हैं। बांधों में उपयोगी जल भंडारण घटकर महज 14.61 प्रतिशत रह गया है। वहीं, उपलब्ध चारा मौजूदा मांग के हिसाब से केवल 47 दिनों तक ही पर्याप्त रहने का अनुमान है।
सोयाबीन की उत्पादकता में भी भारी गिरावट आने की आशंका है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, प्रति हेक्टेयर उत्पादन 1,534 किलोग्राम से घटकर महज 410 किलोग्राम रह सकता है। इससे किसानों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ गई हैं।
पेयजल और चारे की उपलब्धता पर जोर
केंद्रीय दल ने पेयजल की उपलब्धता, टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति, भूजल स्तर और वैकल्पिक जलस्रोतों की स्थिति की समीक्षा की। लोगों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी योजना बनाने के निर्देश दिए गए।
पशुओं के लिए संभावित चारा संकट को देखते हुए मक्का के बीज वितरण, चारा फसलों की बुवाई और रबी मौसम में चारा उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
ई-केवाईसी की बाधाएं दूर करने के निर्देश
किसानों को समय पर सहायता राशि मिल सके, इसके लिए फसल कटाई प्रयोग समय पर पूरे करने और फसल बीमा से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही आधार लिंकिंग और ई-केवाईसी में आने वाली दिक्कतों को दूर करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में जिलाधिकारी विवेक जॉन्सन ने जिले में सूखे की स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इस अवसर पर राज्य के कृषि सचिव परिमल सिंह, केंद्रीय दल के अधिकारी, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।





