जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड ने कार्बन हटाने के कारोबार से जुड़ी कंपनी सुपरक्रिटिकल (Supercritical) के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत जैन इरिगेशन अपने प्लांट से 19,000 टन तक के बायोचार क्रेडिट उपलब्ध कराएगी। कंपनी के मुताबिक, ये क्रेडिट महाराष्ट्र के जलगांव स्थित उसके बायोचार प्लांट से मिलेंगे, जहां 2026 की शुरुआत से उत्पादन हो रहा है।
कृषि अवशेषों से तैयार किया जा रहा बायोचार
जैन इरिगेशन अपने फूड प्रोसेसिंग प्लांट से निकलने वाले अवशेषों और फसलों के बचे हुए हिस्सों से बायोचार तैयार करती है। इसके लिए गैसीफिकेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया में कृषि अवशेषों को गर्म करके उनसे गैस और बायोचार तैयार किया जाता है।
कंपनी के मुताबिक, इस प्रक्रिया से तैयार बायोचार में कार्बन लंबे समय तक स्थिर रूप में बना रहता है। इसे मिट्टी में मिलाने पर कार्बन सैकड़ों साल तक उसमें जमा रह सकता है।
कंपनी इस प्रक्रिया से तैयार होने वाली सभी चीजों का इस्तेमाल अपने कामकाज में ही करती है। इससे निकलने वाली सिंथेटिक गैस (Syngas) का इस्तेमाल औद्योगिक प्लांट में ईंधन के रूप में किया जाता है, जिससे जीवाश्म ईंधन की जरूरत कम होती है। वहीं, बायोचार का इस्तेमाल कंपनी अपने कृषि कारोबार में करती है और किसानों को भी मिट्टी में मिलाने के लिए उपलब्ध कराती है।
मिट्टी की सेहत सुधारने में मददगार है बायोचार
बायोचार एक तरह का कार्बनयुक्त पदार्थ है, जिसे कृषि अवशेषों जैसे फसल के डंठल, भूसे और दूसरे जैविक पदार्थों से तैयार किया जाता है। इसे मिट्टी में मिलाने से मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और उसकी पानी रोकने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके फायदे मिट्टी के प्रकार और बायोचार की गुणवत्ता पर भी निर्भर करते हैं।
जैन इरिगेशन का कहना है कि वह अपनी रिसर्च और किसानों के साथ लंबे समय से जुड़े नेटवर्क की मदद से बायोचार से जुड़े उत्पादों को बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की योजना बना रही है।
बायोचार प्रोजेक्ट की हो रही जांच
कंपनी के मुताबिक, उसके बायोचार प्रोजेक्ट का सत्यापन Puro.earth के जरिए किया जा रहा है। इसके साथ ही BeZero Carbon की स्वतंत्र रेटिंग की प्रक्रिया भी चल रही है। इस प्रक्रिया का मकसद प्रोजेक्ट से होने वाले कार्बन हटाने के दावों का आकलन करना है।
सुपरक्रिटिकल के सीनियर सप्लाई मैनेजर स्टीव मॉरिन ने कहा कि जैन इरिगेशन के पास कृषि क्षेत्र में करीब 60 साल का अनुभव और पहले से तैयार सप्लाई नेटवर्क है। इससे कंपनी के लिए बड़े स्तर पर बायोचार की आपूर्ति करना आसान हो सकता है।
जैन इरिगेशन के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत जैन ने कहा कि सुपरक्रिटिकल के साथ साझेदारी से बायोचार के इस्तेमाल को बड़े स्तर पर बढ़ाने में मदद मिलेगी।
1963 से किसानों के साथ काम कर रही है कंपनी
जैन इरिगेशन 1963 से किसानों के साथ काम कर रही है और अब तक 1 करोड़ से ज्यादा किसानों तक पहुंच चुकी है। कंपनी आम की प्रोसेसिंग और टिशू कल्चर नर्सरी के कारोबार से भी जुड़ी है। इसकी नर्सरी में हर साल करीब 15 करोड़ पौधे तैयार किए जाते हैं।
पिछले 30 साल में कंपनी ने माइक्रो इरिगेशन और केले की टिशू कल्चर तकनीक समेत कई कृषि तकनीकों को बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचाया है। अब कंपनी इसी अनुभव और अपने किसान नेटवर्क के जरिए बायोचार उत्पादों का कारोबार बढ़ाना चाहती है।
सुपरक्रिटिकल की 2026 की दूसरी छमाही की बायोचार बाजार रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई तक 2026 में उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले बायोचार की 81 फीसदी आपूर्ति के लिए पहले ही समझौते हो चुके थे। पिछले साल इसी स्थिति तक पहुंचने में तीन महीने ज्यादा लगे थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, अब कंपनियां बायोचार की खरीद के लिए सिर्फ एक बार के सौदों के बजाय कई साल के समझौते कर रही हैं। ऐसे में जैन इरिगेशन और सुपरक्रिटिकल के बीच हुआ यह समझौता बायोचार के बढ़ते बाजार को दिखाता है।


