भारत में अगले सीजन चीनी का उत्पादन कम होने का अनुमान है। इसकी बड़ी वजह अल नीनो का असर और सामान्य से कम बारिश बताई जा रही है। उत्पादन घटने से देश में चीनी की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है और आने वाले समय में कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026-27 सीजन में भारत में करीब 2.9 करोड़ से 3.1 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हो सकता है। वहीं, मौजूदा सीजन में चीनी का उत्पादन करीब 3.1 करोड़ टन रहने का अनुमान है।
15 फीसदी कम बारिश
भारत में गन्ने की फसल काफी हद तक मानसून की बारिश पर निर्भर रहती है। इस बार मानसून की बारिश सामान्य से करीब 15 फीसदी कम चल रही है। वहीं, अल नीनो के मजबूत होने से एशिया के कई हिस्सों में फसलों पर असर पड़ने की आशंका है।
इसका असर भारत में गन्ने की फसल पर भी पड़ सकता है। अगर गन्ने की पैदावार कम होती है तो इसका सीधा असर चीनी के उत्पादन पर पड़ेगा।
30 फीसदी बढ़े भाव
अगले सीजन कम चीनी उत्पादन के अनुमान का असर बाजार पर अभी से दिखाई देने लगा है। इस साल न्यूयॉर्क में कच्ची चीनी के वायदा भाव करीब 30 फीसदी बढ़ चुके हैं।
भारत दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता और दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। ऐसे में देश में उत्पादन कम होने पर घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
चीनी आयात की तैयारी
घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने पिछले महीने चीनी मिलों और रिफाइनरियों को बिना शुल्क कच्ची चीनी आयात करने की मंजूरी दी थी।
इसके साथ ही सरकार ने कारोबारियों और बड़ी मात्रा में चीनी इस्तेमाल करने वालों के लिए चीनी का ज्यादा स्टॉक रखने पर भी सीमा तय की है।
30 लाख टन तक आयात
बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि अगर अगले सीजन चीनी का उत्पादन कम हुआ तो भारत को अपनी जरूरत पूरी करने और चीनी का भंडार बनाए रखने के लिए आयात करना पड़ सकता है।
कुछ अनुमानों के मुताबिक, अगले साल भारत को करीब 20 से 30 लाख टन चीनी आयात करनी पड़ सकती है। कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि अगले साल जुलाई से ही चीनी आयात की जरूरत पड़ सकती है।
त्योहारों पर सरकार की नजर
देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में सरकार ने चीनी मिलों को कीमतें उचित रखने और बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, सरकार चीनी की कीमतों और उत्पादन पर हर महीने नजर रखेगी। इससे देश में चीनी की उपलब्धता का बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा और जरूरत पड़ने पर समय पर फैसले लिए जा सकेंगे।
इथेनॉल पर भी असर
जानकारों के मुताबिक, मौजूदा समय में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें अच्छी रहने से मिलों के लिए गन्ने से ज्यादा चीनी बनाना फायदेमंद हो सकता है। ऐसे में अगले सीजन गन्ने से इथेनॉल बनाने के लिए चीनी का इस्तेमाल कम किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
ब्लूमबर्ग के सर्वे में शामिल 11 कारोबारियों, जानकारों और चीनी मिलों में से छह का मानना है कि अगले सीजन चीनी से इथेनॉल बनाने के लिए ज्यादा मात्रा में चीनी नहीं हटाई जाएगी। वहीं, पांच लोगों का कहना है कि भारत को लगातार दूसरे साल चीनी का आयात करना पड़ सकता है।





