देश में नए Sugar Season की शुरुआत इस बार रिकॉर्ड उत्पादन के साथ हुई है। अक्टूबर 2026 में चीनी मिलों ने कुल 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन किया, जो पिछले साल अक्टूबर के मुकाबले काफी ज्यादा है। इस रिकॉर्ड उत्पादन में महाराष्ट्र की चीनी मिलों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही। वहीं, देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में अक्टूबर के दौरान चीनी का उत्पादन नहीं हो सका। हालांकि, आने वाले दिनों में देश की बाकी चीनी मिलों के भी शुरू होने की उम्मीद है, जिससे बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ सकती है।
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में देश की 152 चीनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी थी। इन मिलों ने कुल 105.43 लाख टन गन्ने की पेराई की और 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन किया। जबकि पिछले साल अक्टूबर में सिर्फ 31 मिलों ने पेराई की थी और उस दौरान 11.84 लाख टन गन्ने से केवल 1 लाख टन चीनी बनी थी।
इस बार अक्टूबर में सबसे ज्यादा चीनी का उत्पादन महाराष्ट्र में हुआ। राज्य की 123 मिलों ने पेराई शुरू की और कुल 7.20 लाख टन चीनी बनाई। पिछले साल अक्टूबर में महाराष्ट्र की सिर्फ 2 मिलें शुरू हुई थीं और वहां चीनी का उत्पादन नहीं हुआ था। इस बार राज्य में चीनी की रिकवरी दर 7.90 प्रतिशत रही है। शुरुआत में जब 20-30 मिलों ने पेराई शुरू की थी, तब रिकवरी 6 प्रतिशत से भी कम थी।
उत्तर प्रदेश में नहीं हुआ चीनी का उत्पादन
देश में सबसे ज्यादा गन्ना पैदा करने वाले राज्य उत्तर प्रदेश में अक्टूबर के दौरान चीनी का उत्पादन नहीं हुआ। हालांकि, राज्य की 3 मिलों ने पेराई शुरू कर दी थी। पिछले साल अक्टूबर में यूपी की 10 मिलों ने करीब 10 हजार टन चीनी का उत्पादन किया था।
वहीं, कर्नाटक में अक्टूबर 2026 के दौरान 7 चीनी मिलों ने 8.33 लाख टन गन्ने की पेराई कर करीब 80 हजार टन चीनी बनाई। राज्य में चीनी की रिकवरी दर 9.6 प्रतिशत रही। पिछले साल इसी महीने 17 मिलों ने 7.07 लाख टन गन्ने की पेराई करके 70 हजार टन चीनी का उत्पादन किया था। उस समय रिकवरी दर 9.9 प्रतिशत थी।
कर्नाटक में गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर किसान आंदोलन कर रहे थे। राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बाद हाल ही में यह आंदोलन खत्म हुआ है।
नवंबर में बढ़ सकती है चीनी की उपलब्धता
अक्टूबर में रिकॉर्ड उत्पादन के बाद नवंबर में बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। इसकी एक वजह यह भी है कि 1 अक्टूबर को देश में करीब 36 लाख टन चीनी का शुरुआती स्टॉक मौजूद था। इसके अलावा सरकार ने अक्टूबर में चीनी मिलों को बिक्री के लिए 27 लाख टन चीनी का कोटा दिया था।
अब उम्मीद है कि अगले 7 से 10 दिनों में देश की बाकी चीनी मिलें भी पेराई शुरू कर देंगी। इससे चीनी का उत्पादन और बढ़ सकता है।
नवंबर के पहले पखवाड़े के लिए 13 लाख टन चीनी का कोटा
खाद्य मंत्रालय ने चीनी मिलों को नवंबर के पहले 15 दिनों में बिक्री के लिए कुल 13 लाख टन चीनी का कोटा आवंटित किया है। इसमें कर्नाटक की मिलों को 2.63 लाख टन, महाराष्ट्र को 4.78 लाख टन और उत्तर प्रदेश को 4.17 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति दी गई है।
वहीं, एडवांस लाइसेंस स्कीम (ALS) के तहत चीनी आयात करने वाले दो आयातकों को 31 अक्टूबर की समयसीमा खत्म होने के बाद नवंबर के लिए कोई बिक्री कोटा नहीं दिया गया है।
इस सीजन के लिए गन्ने का FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल
केंद्र सरकार हर सीजन में गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) तय करती है। कुछ राज्य इसके अलावा अपना राज्य परामर्श मूल्य (SAP) भी घोषित करते हैं। चीनी मिलों को किसानों से सरकार की ओर से तय कीमत पर गन्ना खरीदना होता है।
गन्ने का FRP चीनी की रिकवरी दर से जुड़ा होता है। 2026-27 सीजन के लिए केंद्र सरकार ने 10.25 प्रतिशत की बेसिक रिकवरी दर के आधार पर गन्ने का FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। अगर किसी मिल में चीनी की रिकवरी दर इस स्तर से कम रहती है, तो किसानों को मिलने वाली कीमत भी उसी हिसाब से कम हो सकती है।


