इस साल मानसून के दौरान देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हुई है। इसका असर रबी सीजन की फसलों पर भी पड़ सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 4 जून से 15 अक्टूबर के बीच कुल 76.86 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 90.63 सेंटीमीटर होती है। यानी इस बार मानसून के दौरान सामान्य से 15 फीसदी कम बारिश हुई।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, मानसून 4 जून को केरल पहुंचा था और 15 अक्टूबर को पूरे देश से विदा हो गया। अब दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून सक्रिय हो गया है। इससे सर्दियों की फसलों, खासकर उन इलाकों में जहां सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं है, को बारिश मिलने की उम्मीद है।
दक्षिण भारत में सबसे कम बारिश
रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण भारत के मौसम संबंधी सभी उपखंडों में सामान्य से 23 से 46 फीसदी तक कम बारिश हुई। सिर्फ अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में सामान्य से 1 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई। अब उत्तर-पूर्वी मानसून से दक्षिण भारत के इन इलाकों में बारिश की उम्मीद है, जिससे सर्दियों की फसलों को मदद मिल सकती है।
महाराष्ट्र और गोवा में भी बारिश की कमी
मध्य भारत में सामान्य से 6 फीसदी कम बारिश हुई। महाराष्ट्र में 23 फीसदी और गोवा में 36 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। वहीं, ओडिशा में सामान्य से 23 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। छत्तीसगढ़ में 2 फीसदी, मध्य प्रदेश में 7 फीसदी और गुजरात में 12 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भी कम बारिश
उत्तर-पश्चिम भारत में भी सामान्य से 6 फीसदी कम बारिश हुई। इस क्षेत्र के प्रमुख कृषि राज्यों में पंजाब में 37 फीसदी, हरियाणा में 21 फीसदी और राजस्थान में 24 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। इसके उलट, उत्तर प्रदेश में सामान्य से 6 फीसदी ज्यादा बारिश हुई।
बिहार और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी बारिश की कमी
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 27 फीसदी कम बारिश हुई। अरुणाचल प्रदेश में 45 फीसदी, असम में 29 फीसदी, बिहार में 32 फीसदी और मेघालय में 61 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। वहीं, पश्चिम बंगाल में 2 फीसदी और झारखंड में 6 फीसदी कम बारिश हुई।
लद्दाख में सबसे ज्यादा, मेघालय में सबसे कम बारिश
पूरे देश में लद्दाख में सामान्य से 112 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई, जबकि मेघालय में सामान्य से 61 फीसदी कम बारिश हुई। कुल बारिश की मात्रा के हिसाब से गोवा में सबसे ज्यादा 196.68 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं, पंजाब में सिर्फ 28 सेंटीमीटर बारिश हुई, जो राज्यों में सबसे कम रही।
खेती पर क्या असर पड़ सकता है?
मानसून के दौरान कम बारिश होने से उन इलाकों में रबी फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है, जहां सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। खासकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में किसानों के लिए पानी की उपलब्धता अहम रहेगी। हालांकि, फसलों पर वास्तविक असर स्थानीय बारिश, मिट्टी में नमी, सिंचाई की सुविधा और जलाशयों में पानी की स्थिति पर भी निर्भर करेगा।





