News Potli
न्यूज़ पोटलीभारत के किसानों और गाँवों की आवाज़
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. बाजार
  3. दालों की महंगाई पर सरकार का फोकस, आयात शुल्क घटाने पर विचार
बाजार

दालों की महंगाई पर सरकार का फोकस, आयात शुल्क घटाने पर विचार

भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और आयातक है। देश में दालों की मांग और उत्पादन के बीच अंतर को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में दालें विदेशों से मंगाई जाती हैं। 2024-25 में भारत ने करीब 7.3 मिलियन टन दालों का आयात किया था, जबकि घरेलू उत्पादन 25.7 मिलियन टन रहा।

News Potli

News Potli·News Potli Desk·01 Oct 2026

दालों की महंगाई पर सरकार का फोकस, आयात शुल्क घटाने पर विचार

देश में दालों की कीमतों को काबू में रखने और बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने के लिए सरकार कुछ दालों पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर विचार कर रही है। कमजोर मानसून की वजह से इस साल घरेलू उत्पादन कम रहने की चिंता है, ऐसे में सरकार आयात के जरिए दालों की उपलब्धता बढ़ाना चाहती है।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार मसूर और पीली मटर पर आयात शुल्क कम कर सकती है, जबकि चने को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। फिलहाल भारत में लाल मसूर और चने पर 10% और पीली मटर पर 30% आयात शुल्क है। वहीं अरहर और उड़द के आयात पर मार्च 2027 तक शुल्क नहीं लिया जा रहा है।

भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और आयातक है। देश में दालों की मांग और उत्पादन के बीच अंतर को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में दालें विदेशों से मंगाई जाती हैं। 2024-25 में भारत ने करीब 7.3 मिलियन टन दालों का आयात किया था, जबकि घरेलू उत्पादन 25.7 मिलियन टन रहा।

इस साल चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि दालों की खेती मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर रहती है। जून से सितंबर के मानसून के दौरान कई प्रमुख दाल उत्पादक राज्यों में सामान्य से 30% तक कम बारिश हुई है। इससे इस साल दालों के उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका है।

रॉयटर्स की एक खबर के मुताबिक सरकार चने पर आयात शुल्क बनाए रखकर किसानों को अक्टूबर से चने की ज्यादा बुवाई के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है। वहीं त्योहारी सीजन में दालों की मांग बढ़ने से कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।

दालों की महंगाई पहले से ही चिंता का विषय बनी हुई है। अगस्त में अरहर की कीमतों में सालाना आधार पर 5.6% और उड़द की कीमतों में 7.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऐसे में आयात शुल्क में कटौती से बाजार में दालों की सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने में मदद मिल सकती है।

News Potli.
Clip & Share
“

— दालों की महंगाई पर सरकार का फोकस, आयात शुल्क घटाने पर विचार

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
Import Duty on Pulses
News Potli

About the Author

News Potli

News Potli Desk

Related Coverage

और पढ़ें

मसालों के निर्यात में गिरावट, मिर्च और जीरे की कमजोर मांग का असर
बाजार

मसालों के निर्यात में गिरावट, मिर्च और जीरे की कमजोर मांग का असर

मात्रा के लिहाज से भी मसालों का निर्यात 4 प्रतिशत घटकर 17.34 लाख टन रहा, जबकि एक साल पहले यह 17.99 लाख टन था।

Mithilesh Dhar Dubey·
रबी फसलों के दाम: गेहूं-चना MSP से नीचे, सरसों किसानों के लिए बनी फायदे का सौदा
बाजार

रबी फसलों के दाम: गेहूं-चना MSP से नीचे, सरसों किसानों के लिए बनी फायदे का सौदा

एगमार्कनेट के मंडी आंकड़ों के अनुसार, 8 जुलाई तक गेहूं को छोड़कर बाकी सभी प्रमुख रबी फसलों के दाम पिछले तीन महीनों के औसत से ऊपर चल रहे हैं।

Mithilesh Dhar Dubey·
2025-26 फसल वर्ष में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 5% बढ़ा
बाजार

2025-26 फसल वर्ष में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 5% बढ़ा

चावल उत्पादन रिकॉर्ड 154 मिलियन टन पहुंचा, गेहूं भी 120.66 मिलियन टन के नए शिखर पर।

News Potli·
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs