मखाना अब सिर्फ बिहार के पारंपरिक खान-पान का हिस्सा नहीं रह गया है, बल्कि देश-दुनिया में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत दुनिया में मखाने का सबसे बड़ा उत्पादक है और वैश्विक सप्लाई में करीब 80-85 फीसदी हिस्सेदारी रखता है। भारत के अंदर भी बिहार मखाना उत्पादन में सबसे आगे है और देश के कुल उत्पादन का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अकेले बिहार से आता है। बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार भी मखाना उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट तक पूरे सेक्टर को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
बिहार है मखाना उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र
मखाना यानी Euryale ferox एक जलीय फसल है, जिसकी खेती मुख्य रूप से उथले तालाबों, झीलों और दलदली इलाकों में की जाती है। इसके बीजों को प्रोसेस और भूनने के बाद पॉप करके खाया जाता है।
भारत में मखाने की खेती मुख्य रूप से बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में होती है, लेकिन इसका सबसे बड़ा उत्पादन क्षेत्र उत्तर बिहार है। देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी करीब 75 फीसदी है। यही वजह है कि भारत के मखाना कारोबार में बिहार की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है।
2025-26 में 7,264.89 मीट्रिक टन मखाना उत्पादों का एक्सपोर्ट
मखाने की बढ़ती मांग का असर इसके निर्यात पर भी देखने को मिल रहा है। 2025-26 में भारत ने 7,264.89 मीट्रिक टन मखाना उत्पादों का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत ₹19,296.08 लाख रही।
घरेलू बाजार में भी मखाने की मांग बढ़ी है। हेल्थ और प्रीमियम स्नैक्स को लेकर बढ़ती रुचि के कारण मखाने की कीमतों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली है। अब मखाना देश के बड़े शहरों में भी हेल्थ फूड और स्नैक के तौर पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
बिहार के पारंपरिक भोजन से ग्लोबल हेल्थ फूड तक
मखाना लंबे समय से बिहार के खान-पान का हिस्सा रहा है, लेकिन अब इसकी पहचान हेल्थ फूड के तौर पर भी बन रही है। बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के साथ मखाने से कई तरह के वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं।
इस कारोबार में स्टार्टअप्स और किसान उत्पादक संगठन यानी FPOs भी आगे आ रहे हैं। इससे मखाने की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच को बढ़ावा मिल रहा है।
सरकार ने बनाया नेशनल मखाना बोर्ड
मखाना क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बजट 2025-26 में नेशनल मखाना बोर्ड बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद 15 सितंबर 2025 को बिहार में नेशनल मखाना बोर्ड की शुरुआत की गई।
बोर्ड का उद्देश्य मखाने की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है, ताकि किसानों को उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और एक्सपोर्ट तक बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
मखाना विकास के लिए ₹476 करोड़ की योजना
सरकार ने मखाना क्षेत्र के विकास के लिए ₹476.03 करोड़ की Central Sector Scheme को मंजूरी दी है। यह योजना 2025-26 से 2030-31 तक चलेगी।
इसके तहत रिसर्च और इनोवेशन, बेहतर गुणवत्ता वाले बीज, किसानों की ट्रेनिंग, कटाई और पोस्ट-हार्वेस्ट तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही मखाने की प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और एक्सपोर्ट को मजबूत करने पर भी काम होगा।
इस योजना के तहत 2025-26 के लिए ₹30 करोड़ और 2026-27 के लिए ₹90 करोड़ मंजूर किए गए हैं।
किसानों की कमाई बढ़ाने की बड़ी संभावना
मखाने की घरेलू और विदेशी बाजार में बढ़ती मांग किसानों के लिए कमाई का अच्छा मौका बन सकती है। अगर उत्पादन के साथ प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान दिया जाए, तो किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिल सकता है। सरकार के मुताबिक, मखाना सेक्टर को बढ़ावा मिलने से किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने और भारत के एग्री-फूड एक्सपोर्ट को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।





