नई दिल्ली। भारतीय किसानों के लिए अब देश के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी अपनी उपज बेचने के नए अवसर खुल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से किसानों और कृषि-प्रसंस्करण से जुड़े लोगों से अपील की कि वे मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का फायदा उठाकर भारतीय कृषि उत्पादों को ग्लोबल ब्रांड बनाएं।
विदेशी बाजारों में बढ़ाएं भारतीय कृषि की पहचान
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अलग-अलग देशों और समूहों के साथ 9 मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं। इन समझौतों से भारतीय कृषि उत्पादों और प्रोसेस्ड फूड के लिए विदेशी बाजारों तक पहुंच आसान हुई है।
उन्होंने किसानों से कहा कि अब जरूरत है कि उत्पाद खेत से सीधे एक्सपोर्ट मार्केट तक पहुंचे। भारत के पारंपरिक खाद्य उत्पाद, बाजरा, मसाले, फल और फूल दुनिया के बाजार में अपनी पहचान बना सकते हैं। इन्हें ग्लोबल ब्रांड के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जाना चाहिए।
केमिकल-फ्री खेती पर भी जोर
PM मोदी ने किसानों से रासायनिक मुक्त खेती को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में ऐसे कृषि उत्पादों की मांग बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इसमें और इजाफा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर भारतीय कृषि उत्पाद गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हैं, तो उन्हें वैश्विक बाजार तक पहुंचाना आसान होगा।
महंगी खाद का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने देने का दावा
प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की बढ़ती कीमतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत करीब 3,000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई है, लेकिन सरकार किसानों को इसे करीब 300 रुपये में उपलब्ध करा रही है।
इसी तरह, वैश्विक बाजार में DAP की कीमत करीब 5,000 रुपये पहुंचने के बावजूद किसानों को इसे 1,350 रुपये में उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
बढ़ सकती है सरकार की उर्वरक सब्सिडी
वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमत बढ़ने से सरकार पर सब्सिडी का खर्च भी बढ़ रहा है। अनौपचारिक अनुमानों के मुताबिक, 2026-27 में उर्वरक सब्सिडी 2.4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है, जबकि बजट में इसके लिए करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये का अनुमान रखा गया है।
प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि किसान बेहतर गुणवत्ता, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट के जरिए अपनी उपज का दायरा देश से बाहर तक बढ़ाएं। इससे भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलने के साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।


