कर्नाटक की मशहूर गुलबर्गा तुअर दाल अब देश के बाहर भी अपनी पहचान बना रही है। GI टैग वाली इस खास तुअर दाल की एक मीट्रिक टन खेप मालदीव भेजी गई है। खास बात यह है कि इस निर्यात से जुड़े चैनल के जरिए किसानों को स्थानीय बाजार के मुकाबले काफी बेहतर दाम मिला। जहां स्थानीय बाजार में तुअर दाल करीब 60 रुपये किलो बिक रही है, वहीं किसानों को निर्यात के लिए 82 रुपये किलो का भाव मिला। यानी किसानों को हर किलो पर करीब 22 रुपये ज्यादा मिले।
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की मदद से कर्नाटक से मालदीव के लिए यह पहली खेप भेजी गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, खेप को 24 सितंबर को रवाना किया गया और इसे समुद्री रास्ते से मालदीव भेजा जाएगा।
किसानों को मिला 22 रुपये ज्यादा भाव
इस खेप का निर्यात मैसूर की Silken Global Exports and Imports ने अपने FPO आधारित ब्रांड के जरिए किया है। निर्यात से किसानों को तुअर दाल का भाव 82 रुपये प्रति किलो मिला, जबकि स्थानीय बाजार में इसका भाव करीब 60 रुपये किलो है।
FPO के जरिए विदेशी बाजार से जुड़ेंगे किसान
सरकार का कहना है कि इस तरह की पहल से किसान उत्पादक संगठन यानी FPO सीधे निर्यात की सप्लाई चेन से जुड़ सकते हैं। इससे किसानों को अपने क्षेत्र के खास कृषि उत्पादों के लिए देश के बाहर भी बाजार मिल सकता है और उन्हें बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
सरकार को उम्मीद है कि गुलबर्गा तुअर दाल का मालदीव निर्यात आगे चलकर नियमित सप्लाई का रास्ता खोल सकता है। अगर ऐसा होता है तो कर्नाटक के किसानों और निर्यातकों के लिए एक स्थायी विदेशी बाजार तैयार हो सकता है।
2019 में मिला था GI टैग
गुलबर्गा तुअर दाल कर्नाटक के कलबुर्गी इलाके की पहचान मानी जाती है। इसे साल 2019 में GI टैग मिला था। अपने खास स्वाद और अच्छी क्वालिटी के लिए पहचानी जाने वाली यह दाल कलबुर्गी की कृषि अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका रखती है। कलबुर्गी कर्नाटक में तुअर की खेती और उत्पादन के प्रमुख इलाकों में शामिल है।
APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव के मुताबिक, GI टैग वाले भारतीय कृषि उत्पादों को विदेशी बाजार तक पहुंचाने से उनकी पहचान दुनिया में मजबूत होगी और किसानों के लिए नए बाजार भी खुलेंगे।
इस पहल का मकसद सिर्फ तुअर दाल का निर्यात बढ़ाना नहीं है, बल्कि FPO और किसानों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना भी है, ताकि उन्हें अपने उत्पाद की बेहतर कीमत मिल सके।





