चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में रखने और बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने के लिए सरकार ने सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए 13 लाख टन चीनी बिक्री की मंजूरी दी है। इसमें 1 लाख टन आयातित चीनी भी शामिल है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब चीनी के मिल-गेट भाव में गिरावट के बावजूद खुदरा बाजार में कीमतों में उतनी कमी नहीं आई है।
पहले हफ्ते में 5.2 लाख टन चीनी बेचनी होगी
खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, चीनी मिलों को तय 13 लाख टन के कोटे में से कम से कम 40 फीसदी यानी करीब 5.2 लाख टन चीनी 1 से 7 सितंबर के बीच बेचनी होगी। बाकी चीनी दूसरे हफ्ते में बेचनी होगी। इस दौरान 4 सितंबर को जन्माष्टमी और 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी है, इसलिए त्योहारों के समय बाजार में चीनी की मांग बढ़ सकती है।
यूपी और महाराष्ट्र को सबसे ज्यादा कोटा
सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों को 4.20 लाख टन, महाराष्ट्र को 4.10 लाख टन और कर्नाटक को 1.77 लाख टन का बिक्री कोटा मिला है। वहीं, आयातित चीनी में से श्री रेणुका शुगर्स और श्री दत्त इंडिया को 50-50 हजार टन बेचने की अनुमति दी गई है।
खुदरा कीमतों में राहत नहीं
चीनी के मिल-गेट भाव हाल में करीब 18-20 फीसदी तक नीचे आए हैं। कुछ बाजारों में भाव 6,500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास से गिरकर 4,800-5,000 रुपये तक आ गए हैं। हालांकि, इसका असर अभी खुदरा बाजार में साफ तौर पर नहीं दिख रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को सस्ती चीनी के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।
कारोबारियों के सामने भी चुनौती
चीनी की कीमतों में अचानक गिरावट से कुछ कारोबारियों को नुकसान हुआ है। वहीं, सरकार ने चीनी का स्टॉक रखने पर सीमा भी तय की है। ऐसे में कारोबारियों के लिए तय समय में चीनी उठाना और उसे आगे बेचना चुनौती बन सकता है।





