भारत के खास कृषि उत्पादों की मांग अब विदेशों में भी बढ़ रही है। इसी कड़ी में तेलंगाना की GI टैग वाली तंदूर अरहर दाल पहली बार ऑस्ट्रेलिया भेजी गई है। इसकी 2.5 मीट्रिक टन की पहली खेप 28 अक्टूबर को हैदराबाद से रवाना की गई। इस निर्यात में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने मदद की है। यह संस्था वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करती है।
PIB के मुताबिक, हैदराबाद की कंपनी दुर्गा एक्सपोर्ट्स एंड इम्पोर्ट्स ने ‘AMMAAS’ ब्रांड के तहत इस दाल का निर्यात किया है। इसे समुद्री रास्ते से ऑस्ट्रेलिया भेजा जा रहा है, जहां भारतम्मा PTY लिमिटेड इसे आयात करेगी।
क्या है तंदूर अरहर दाल की खासियत?
तंदूर अरहर दाल तेलंगाना के तंदूर क्षेत्र में उगाई जाती है। इसकी खेती मुख्य रूप से विकाराबाद जिले के तंदूर, बशीराबाद, पेद्देमुल और यालाल मंडलों में होती है। इस क्षेत्र की काली मिट्टी और यहां मौजूद खास खनिजों की वजह से इस दाल की अपनी अलग पहचान है।
इसमें करीब 22 से 24 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। इसके स्वाद, जल्दी पकने और लंबे समय तक अच्छी गुणवत्ता बनाए रखने की खासियत के लिए भी इसे जाना जाता है।
तंदूर अरहर दाल तेलंगाना का पहला कृषि उत्पाद है, जिसे भौगोलिक संकेतक यानी GI टैग मिला है। GI टैग किसी खास क्षेत्र में बनने वाले या उगाए जाने वाले उत्पाद की पहचान और उसकी विशेषताओं को मान्यता देता है।
किसानों को कैसे होगा फायदा?
तंदूर अरहर दाल का ऑस्ट्रेलिया के बाजार में पहुंचना तेलंगाना के किसानों और निर्यातकों के लिए नए अवसर खोल सकता है। विदेशों में इस दाल की पहचान और मांग बढ़ने से किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार मिल सकता है।
APEDA GI टैग वाले भारतीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए निर्यातकों को सहयोग देता है। तंदूर अरहर दाल का यह पहला निर्यात भारत के क्षेत्रीय कृषि उत्पादों को विदेशों में पहचान दिलाने की दिशा में एक अहम कदम है।





