News Potli
न्यूज़ पोटलीभारत के किसानों और गाँवों की आवाज़
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. बाजार
  3. खाने के तेल की कीमतों पर राहत की उम्मीद, सरकार ने घटाई इंपोर्ट ड्यूटी
बाजार

खाने के तेल की कीमतों पर राहत की उम्मीद, सरकार ने घटाई इंपोर्ट ड्यूटी

भारत अपनी खाने के तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऑयल ईयर 2025-26 के पहले 10 महीनों यानी नवंबर से अगस्त के दौरान देश में 136.19 लाख टन खाद्य तेल का आयात हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 130.24 लाख टन था। यानी आयात में करीब 4.56 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

Pooja Rai

Pooja Rai·24 Sep 2026

खाने के तेल की कीमतों पर राहत की उम्मीद, सरकार ने घटाई इंपोर्ट ड्यूटी

त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले खाने के तेल की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 24 सितंबर से कच्चे और रिफाइंड पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी घटा दी गई है। सरकार का मकसद घरेलू बाजार में खाने के तेल की कीमतों को कम करना और इसकी उपलब्धता बढ़ाना है। हालांकि, इसका फायदा ग्राहकों को कितनी जल्दी और कितना मिलेगा, यह अंतरराष्ट्रीय कीमतों, डॉलर-रुपये की दर, माल ढुलाई और देश में तेल की उपलब्धता जैसे कई दूसरे फैक्टर्स पर भी निर्भर करेगा।

सोयाबीन और पाम तेल पर ड्यूटी कितनी घटी?

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, कच्चे सोयाबीन और पाम तेल पर Basic Customs Duty यानी BCD को 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। वहीं, रिफाइंड सोयाबीन और पाम तेल पर ड्यूटी 32.5 फीसदी से घटाकर 27.5 फीसदी कर दी गई है।

सूरजमुखी तेल के मामले में भी बड़ी राहत दी गई है। कच्चे सूरजमुखी तेल पर 10 फीसदी की BCD पूरी तरह खत्म कर दी गई है। वहीं, रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी 32.5 फीसदी से घटाकर 22.5 फीसदी कर दी गई है।

खाने के तेल की महंगाई क्यों बढ़ी?

खाने के तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय हो रही है, जब कुल खाद्य महंगाई भी बढ़ी है। अगस्त में All India Consumer Food Price Index (CFPI) 5.95 फीसदी रहा, जो जुलाई में 5.52 फीसदी था।

खास बात यह है कि रिफाइंड तेल की खुदरा महंगाई लगातार बढ़ रही है। मार्च में यह 7.62 फीसदी थी, जो अप्रैल में बढ़कर 10.25 फीसदी हो गई और अगस्त में 14.24 फीसदी तक पहुंच गई।

त्योहारों में बढ़ती मांग के बीच फैसला

Indian Vegetable Oil Producers’ Association (IVPA) के अध्यक्ष सुधाकर देसाई के मुताबिक, सरकार का यह फैसला त्योहारों से पहले अहम है। इस दौरान घरों में तेल की मांग बढ़ने के साथ मिठाई, नमकीन, होटल-रेस्तरां और फूड सर्विस कारोबार में भी खपत बढ़ जाती है।

हालांकि, सिर्फ इंपोर्ट ड्यूटी घटने से ही तेल की कीमतें तुरंत कम होंगी, यह जरूरी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम, फ्रेट यानी माल ढुलाई का खर्च, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, देश में उपलब्ध स्टॉक और सप्लाई जैसे factors भी कीमत तय करते हैं।

भारत में खाने के तेल का आयात भी बढ़ा

भारत अपनी खाने के तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऑयल ईयर 2025-26 के पहले 10 महीनों यानी नवंबर से अगस्त के दौरान देश में 136.19 लाख टन खाद्य तेल का आयात हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 130.24 लाख टन था। यानी आयात में करीब 4.56 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

इस दौरान पाम तेल का आयात 61.47 लाख टन से बढ़कर 65.34 लाख टन, सोयाबीन तेल का आयात 44.64 लाख टन से बढ़कर 45.61 लाख टन और सूरजमुखी तेल का आयात 24 लाख टन से बढ़कर 25.15 लाख टन हो गया।

आयात बढ़ने से घरेलू तेल उद्योग की चिंता

दूसरी तरफ, तेल उद्योग ने बढ़ते सस्ते आयात को लेकर चिंता जताई है। IVPA के मुताबिक, खासकर उत्तर और उत्तर-पूर्व भारत में नेपाल से जीरो ड्यूटी आयात की वजह से घरेलू रिफाइंड तेल पर दबाव बना हुआ है। संगठन ने SAFTA देशों से होने वाले ऐसे आयात के लिए इंपोर्ट कोटा तय करने की मांग भी की है।

वहीं, Solvent Extractors’ Association of India (SEA) ने वैश्विक बाजार में आगे तेल की कीमतों और सप्लाई में उतार-चढ़ाव की आशंका जताई है। El Niño, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सूरजमुखी तेल की सप्लाई में अनिश्चितता और इंडोनेशिया के B50 बायोडीजल कार्यक्रम का असर वैश्विक वेजिटेबल ऑयल बाजार पर पड़ सकता है।

News Potli.
Clip & Share
“

— खाने के तेल की कीमतों पर राहत की उम्मीद, सरकार ने घटाई इंपोर्ट ड्यूटी

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
Edible oilImport duty
Pooja Rai

About the Author

Pooja Rai

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें

मसालों के निर्यात में गिरावट, मिर्च और जीरे की कमजोर मांग का असर
बाजार

मसालों के निर्यात में गिरावट, मिर्च और जीरे की कमजोर मांग का असर

मात्रा के लिहाज से भी मसालों का निर्यात 4 प्रतिशत घटकर 17.34 लाख टन रहा, जबकि एक साल पहले यह 17.99 लाख टन था।

Mithilesh Dhar Dubey·
रबी फसलों के दाम: गेहूं-चना MSP से नीचे, सरसों किसानों के लिए बनी फायदे का सौदा
बाजार

रबी फसलों के दाम: गेहूं-चना MSP से नीचे, सरसों किसानों के लिए बनी फायदे का सौदा

एगमार्कनेट के मंडी आंकड़ों के अनुसार, 8 जुलाई तक गेहूं को छोड़कर बाकी सभी प्रमुख रबी फसलों के दाम पिछले तीन महीनों के औसत से ऊपर चल रहे हैं।

Mithilesh Dhar Dubey·
2025-26 फसल वर्ष में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 5% बढ़ा
बाजार

2025-26 फसल वर्ष में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 5% बढ़ा

चावल उत्पादन रिकॉर्ड 154 मिलियन टन पहुंचा, गेहूं भी 120.66 मिलियन टन के नए शिखर पर।

News Potli·
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs