नई दिल्ली। गेहूं निर्यात के लिए सरकार की ओर से दिए गए कोटे का कितना इस्तेमाल हुआ और कितनी मात्रा अभी बाकी है, अब इसका पूरा हिसाब लिया जाएगा। वाणिज्य मंत्रालय के तहत विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने संबंधित निर्यातकों से आवंटित कोटे के इस्तेमाल की जानकारी और जरूरी दस्तावेज मांगे हैं। निर्यातकों को 31 अगस्त 2026 तक अपनी जानकारी जमा करनी होगी।
यह समीक्षा HS Code 10011900 और 10019910 के तहत किए गए गेहूं निर्यात से जुड़ी है। इन कोड के तहत 2025-26 और 2026-27 में अलग-अलग सार्वजनिक सूचनाओं के जरिए निर्यात कोटा दिया गया था। अब सरकार यह देखेगी कि आवंटित मात्रा में से वास्तव में कितना गेहूं निर्यात किया गया।
26 अगस्त तक हुए निर्यात की देनी होगी जानकारी
DGFT के मुताबिक, निर्यातकों को 26 अगस्त 2026 तक यह बताना होगा कि उन्हें मिले कोटे में से कितनी मात्रा का इस्तेमाल किया जा चुका है। इसके लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित उपयोग प्रमाणपत्र और संबंधित शिपिंग बिल की जानकारी देनी होगी।
अगर किसी निर्यातक को आगे और गेहूं निर्यात करने के लिए अतिरिक्त कोटे की जरूरत है, तो उसे इसकी जानकारी भी देनी होगी। वहीं, जो निर्यातक अपना बचा हुआ कोटा वापस करना चाहते हैं, उन्हें इसकी जानकारी के साथ कारण भी बताना होगा।
31 अगस्त के बाद नहीं मिलेगा अतिरिक्त कोटे का मौका
सभी जरूरी दस्तावेज और जानकारी 31 अगस्त तक निर्धारित ईमेल पर भेजनी होगी। अतिरिक्त कोटे की मांग करने वाले निर्यातकों को ऑनलाइन पोर्टल पर संशोधन आवेदन भी इसी तारीख तक करना होगा।
50% से ज्यादा कोटा इस्तेमाल करने वालों को फायदा
DGFT ने कोटे के दोबारा आवंटन के लिए उसके इस्तेमाल को महत्वपूर्ण आधार बनाया है। जिन निर्यातकों ने अपने आवंटित कोटे का 50% से ज्यादा इस्तेमाल किया है, उनके लिए अतिरिक्त गेहूं कोटा देने पर विचार किया जा सकता है।
वहीं, जिन निर्यातकों ने 50% से कम कोटा इस्तेमाल किया है, उनकी बची हुई मात्रा को दोबारा आवंटन के लिए कॉमन पूल में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, वैध निर्यात अनुबंध या खरीद आदेश रखने वाले निर्यातकों के मामलों पर अलग से विचार किया जा सकता है।
दस्तावेजों के आधार पर होगा कोटे का पुनः आवंटन
कॉमन पूल में उपलब्ध गेहूं निर्यात कोटे को निर्यातकों की ओर से जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर दोबारा आवंटित किया जाएगा। DGFT ने कहा है कि जरूरत के अनुसार आवंटन की प्रक्रिया और उसके तौर-तरीकों में बदलाव का अधिकार उसके पास रहेगा।
साथ ही, तय समय पर जानकारी नहीं देने वाले निर्यातकों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। इसमें बचे हुए कोटे का पुनः आवंटन और भविष्य में प्रतिबंधित श्रेणी के गेहूं निर्यात की अनुमति पर रोक जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
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