News Potli
न्यूज़ पोटलीभारत के किसानों और गाँवों की आवाज़
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. मौसम-बेमौसम
  3. Climate Change: बढ़ता तापमान और घटते संसाधन से कैसे निपटेगा भारत?
मौसम-बेमौसम

Climate Change: बढ़ता तापमान और घटते संसाधन से कैसे निपटेगा भारत?

पिछले एक दशक में पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन ने असर डाला है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। भारत में सर्दियों के दिन घट रहे। गर्मियों के दिन बढ़ते जा रहे हैं। 2025 को ही ले लीजिए, वक्त से पहले ही गर्

NP

Jalish·Reporter·24 Feb 2025· 4 min read

Climate Change: बढ़ता तापमान और घटते संसाधन से कैसे निपटेगा भारत?

Climate Change: बढ़ता तापमान और घटते संसाधन से कैसे निपटेगा भारत?

पिछले एक दशक में पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन ने असर डाला है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। भारत में सर्दियों के दिन घट रहे। गर्मियों के दिन बढ़ते जा रहे हैं। 2025 को ही ले लीजिए, वक्त से पहले ही गर्मी आ गई। फरवरी में तापमान औसत से ज्यादा रहा, और मार्च में भी तापमान औसत से ज्यादा ही रहने की आशंका है। कृषि जानकारों का मानना है कि, इस बार पाला जरूरत से ज्यादा कम पड़ने और वक्त से पहले आई गर्मी का असर गेहूं के उत्पादन पर पड़ सकता है।

जलवायु परिवर्तन का असर सिर्फ खेती-किसानी पर ही नहीं पड़ रहा है। प्राकृतिक आपदाएं लगातार बढ़ रही हैं। तपती रेत पर कभी जरूरत से ज्यादा बारिश हो जा रही, तो वहीं पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं। पर्यावरण में हुए इस बदलाव का असर ना सिर्फ हमारी अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचा रहा है, बल्कि लोगों की सेहत पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है।

क्यों हो रहा जलवायु परिवर्तन?

जलवायु परिवर्तन का अर्थ है, पृथ्वी की जलवायु में हो रहे दीर्घकालिक बदलाव, जो मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों और प्राकृतिक प्रक्रियाओं के कारण होते हैं। जलवायु परिवर्तन प्रमुखता से ग्रीन हाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन की वजह से होता है, जो मानवीय गतिविधियों और कुछ प्राकृतिक कारकों का परिणाम है। जब हम कोयला, पेट्रोल, डीजल और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों को जलाते हैं, तो बड़ी तादाद में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄) और नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) जैसी ग्रीन हाउस गैसें वायुमंडल में पहुंचती हैं। ये गैसें सूर्य की ऊष्मा को अवशोषित कर लेती हैं, और उसे अंतरिक्ष में वापस जाने से रोकती हैं, जिससे पृथ्वी का तापमान धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। इसे ग्रीन हाउस प्रभाव कहा जाता है। इसके अलावा, वनों की कटाई (डीफॉरेस्टेशन) भी जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा कारण है। पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके वायुमंडल को संतुलित रखते हैं, लेकिन जब जंगलों को काटा जाता है, तो यह संतुलन बिगड़ जाता है और वायुमंडल में CO₂ की मात्रा बढ़ जाती है।

औद्योगीकरण, शहरीकरण और परिवहन के बढ़ते उपयोग से भी प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे वातावरण में अधिक गर्मी जमा हो रही है। खेती में रासायनिक खादों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से भी मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है, जो जलवायु परिवर्तन को तेज करता है।

इसे भी पढ़ें: GRAVIS ने राजस्थान के 1500 गांवों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग से पानी की समस्या का कैसे किया समाधान

भारत पर जलवायु परिवर्तन पर असर

भारत के बड़े भू-भाग में कृषि आज भी मौनसून पर निर्भर है, लेकिन जलवायु परिवर्तन की वजह से मौनसून का पैटर्न काफी बदल गया है। जिसका असर हमारे यहां खेती पर पड़ रहा है। इसके साथ ही बढ़ता तापमान भी कई क्षेत्रों में बेहतर उत्पादन पर असर डाल रहा है। University of Delaware की एक स्टडी के मुताबिक 2022 में भारत को GDP का 8 फीसदी नुकसान सिर्फ क्लाइमेट चेंज की वजह से हुआ। The Asian Development Bank का अनुमान है कि, 2070 तक भारत को GDP का 24.7 % नुकसान अकेले जलवायु परिवर्तन की वजह से हो सकता है।

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत की योजनाएं

जलावयु परिवर्तन धीरे-धीरे विकराल रूप लेता जा रहा है। इसे सभी वाकिफ है। सरकार भी इसे निपटने के लिए कई बड़े कदम उठा रही है। अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देना, कोयले पर निर्भरता कम करना, और हरित तकनीकों को अपनाना इस दिशा में जरूरी कदम हैं। भारत ने 2070 तक नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है।

आप कैसे इस बदलाव के भागीदार बन सकते हैं?

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जितना जरूरी सरकार का इस दिशा में कदम उठाना है, उतना ही जरूरी समाज की भागीदारी भी है। व्यक्तिगत स्तर पर भी हम जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अपनी भूमिका निभा सकते हैं। कम ऊर्जा की खपत, पानी के बेहतर इस्तेमाल, प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने जैसी छोटी-छोटी कोशिशों से बड़ा बदलाव आ सकता है।

Social Heroes: कैसे एक संस्था बूंद-बूंद सहेज कर बदल रही पश्चिमी राजस्थान के 1500 गावों में जिंदगी?

News Potli.
Clip & Share
“

— Climate Change: बढ़ता तापमान और घटते संसाधन से कैसे निपटेगा भारत?

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
agricultureclimate changefarmingheat waveNews PotliWinterजलवायु परिवर्तन
NP

About the Author

Jalish

Reporter

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें

उत्तर भारत में फिर बदलेगा मौसम, पश्चिमी विक्षोभ से बारिश-बर्फबारी के आसार
मौसम-बेमौसम

उत्तर भारत में फिर बदलेगा मौसम, पश्चिमी विक्षोभ से बारिश-बर्फबारी के आसार

उत्तर भारत में 27- 28 जनवरी को एक तेज पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसके असर से पहाड़ी इलाकों में बारिश और बर्फबारी, जबकि मैदानी क्षेत्रों में बारिश, तेज हवा और ठंड बढ़ने की संभावना है। कोहरा और शीतलहर

Pooja Rai·27 Jan 2026·2 min
IMD Alert: उत्तर में कड़ाके की ठंड, दक्षिण में भारी बारिश
मौसम-बेमौसम

IMD Alert: उत्तर में कड़ाके की ठंड, दक्षिण में भारी बारिश

भारत के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक मौसम चुनौतीपूर्ण बना रहेगा। उत्तर, मध्य और पूर्वी राज्यों में घना कोहरा और शीतलहर का असर दिखेगा, जबकि दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी

Pooja Rai·07 Jan 2026·3 min
देशभर में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का कहर, उत्तर भारत में अगले कई दिन शीतलहर का अलर्ट
मौसम-बेमौसम

देशभर में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का कहर, उत्तर भारत में अगले कई दिन शीतलहर का अलर्ट

देश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड और घना कोहरा जारी है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत में अगले कुछ दिनों तक शीतलहर, कोहरा और गिरते तापमान का असर रहेगा, जिससे जनजीवन, यातायात और खेती प्रभावित हो सक

Pooja Rai·03 Jan 2026·3 min
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs