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GMO के आरोप में चीन ने 3 और भारतीय चावल निर्यातकों का Registration रद्द किया, Exporters ने उठाए सवाल

राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक, चीन ने जिन चावल की खेप को खारिज किया था, उन्हें वापस भारत लाया गया और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने उनकी जांच की। जांच में किसी भी खेप में GMO नहीं मिला।

Mithilesh Dhar Dubey

Mithilesh Dhar Dubey·ASSOCIATE EDITOR (CONTENT)·17 Sep 2026

GMO के आरोप में चीन ने 3 और भारतीय चावल निर्यातकों का Registration रद्द किया, Exporters ने उठाए सवाल

चीन ने कथित तौर पर चावल में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म यानी GMO पाए जाने के आरोप में तीन और भारतीय चावल निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। हालांकि, भारतीय निर्यातकों का कहना है कि चीन ऐसा करके एक तरह का ट्रेड वॉर कर रहा है और गैर-टैरिफ बाधाएं खड़ी कर रहा है।

ट्रेड से जुड़े सूत्रों के हवाले से ब‍िजनेस लाइन की अपनी खबर में बताया है क‍ि प्रभावित निर्यातकों में आंध्र प्रदेश के काकीनाडा स्थित सरला फूड्स और पट्टाभी एग्रो फूड्स तथा नई दिल्ली की ओम इंडिया ट्रेडिंग लिमिटेड शामिल हैं। रजिस्ट्रेशन रद्द होना असल में इन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने जैसा है। इसके साथ ही चीन द्वारा रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए भारतीय चावल निर्यातकों की कुल संख्या 10 हो गई है।

छत्तीसगढ़ राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश जैन ने बिजनेसलाइन से कहा कि चीन द्वारा भारतीय चावल की खेप को खारिज करना संदिग्ध है। उनका आरोप है कि चीन गैर-टैरिफ बाधा खड़ी कर रहा है।

‘मानकों के अनुरूप नहीं था’

राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक, चीन ने जिन चावल की खेप को खारिज किया था, उन्हें वापस भारत लाया गया और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने उनकी जांच की। जांच में किसी भी खेप में GMO नहीं मिला।

मुकेश जैन ने कहा कि इन चावलों को बाद में दूसरे देशों में निर्यात किया गया और वहां भी गुणवत्ता जांच में कोई समस्या नहीं मिली।

राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष और पट्टाभी एग्रो फूड्स के मैनेजिंग डायरेक्टर बीवी कृष्णा राव ने कहा कि चीन के कस्टम विभाग यानी GACC ने बताया कि भारत से भेजी गई चावल की खेप उसके तय मानकों के अनुरूप नहीं थी।

उन्होंने कहा, “हमारे चीनी खरीदार ने बताया कि वहां के अधिकारियों को हमारी चावल की खेप में GMO मिला है। हमारी सभी खेप टूटे हुए चावल यानी broken rice की थीं।”

मुकेश जैन और कृष्णा राव के मुताबिक, चीन की भारतीय शाखा द्वारा शिपमेंट भेजे जाने से पहले की गई जांच में GMO की मौजूदगी नहीं मिली थी। लेकिन चावल चीन पहुंचने के बाद वहां के अधिकारियों ने उसमें GMO पाए जाने की बात कही।

अमेरिकी कृषि विभाग यानी USDA के पूर्व अधिकारी फ्रेड गेल्स ने कहा कि चीन द्वारा ऐसे खाद्य उत्पादों में GMO पाए जाने और उन्हें खारिज किए जाने से काफी भ्रम पैदा हुआ है, जबकि संबंधित देशों का कहना है कि वे GM फसलें उगाते ही नहीं हैं।

उनके मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में चीन ने GMO पाए जाने के आरोप में 146 शिपमेंट खारिज किए। इनमें रेपसीड ऑयल, चावल, आटा और सोयाबीन से बने खाद्य उत्पाद शामिल हैं। इन खेपों में रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान और जापान जैसे देशों के उत्पाद भी थे, जबकि ये देश GM फसलें नहीं उगाते।

कृष्णा राव ने कहा, “हमें चीन को निर्यात करने का कोई मतलब नहीं दिखता। व्यापार पूरी तरह रुक गया है। एक चावल कंटेनर को चीन भेजने में करीब 250 डॉलर खर्च होते हैं, लेकिन खारिज हुई खेप को वापस भारत लाने में 2,500 डॉलर तक खर्च करने पड़ते हैं।”

मुकेश जैन के मुताबिक, कई मामलों में खारिज खेप को वापस लाने की लागत 4,000 से 4,500 डॉलर तक पहुंच जाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि चीन पाकिस्तान को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, भारत से चावल का निर्यात बढ़ने के बाद अब पाकिस्तान के निर्यातकों को भी मात्रा और कीमत, दोनों के मामले में फायदा मिल रहा है।

चीन के कदम पर सवाल

भारतीय चावल निर्यातक संगठनों ने यह मामला वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के सामने उठाया है। जैन के मुताबिक, उन्होंने आश्वासन दिया कि पिछले सप्ताह हुई BRICS बैठक में वह इस मुद्दे को दूसरे देशों के व्यापार मंत्रियों के साथ उठाएंगे।

इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक अधिकारियों की ओर से भेजे गए सवालों का जवाब नहीं मिला था।

इस साल की शुरुआत में चीन ने कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सात अन्य चावल निर्यातकों पर भी कार्रवाई की थी।

भारतीय अधिकारियों का मानना है कि चीन के इस कदम के पीछे गलत मंशा हो सकती है। उनका कहना है कि संभव है कि चीन की इस साल की चावल की जरूरत पूरी हो चुकी हो।

चीन के कदम पर अधिकारी, कारोबारी, निर्यातक और विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि भारत में चीन की ओर से नियुक्त जांच एजेंसी ने शिपमेंट भेजे जाने से पहले चावल को मंजूरी दी थी।

भारत में कोई भी GM फसल व्यावसायिक रूप से नहीं उगाई जाती, ऐसे में GM धान उगाए जाने का सवाल ही नहीं उठता।

मई के अंत तक चीन कम से कम 70 भारतीय नॉन-बासमती चावल की खेपों को खारिज कर चुका था। चीन ने इन खेपों में GMO होने का आरोप लगाया था।

यह कार्रवाई तब भी जारी रही जब भारत सरकार ने चीन को स्पष्ट रूप से बताया था कि देश में कोई GM फसल नहीं उगाई जाती।

चीन के पुराने चावल से मुकाबला?

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी APEDA के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने 2025 में 2.07 लाख टन नॉन-बासमती चावल चीन को निर्यात किया था।

वहीं, जनवरी से जून 2026 के बीच यह मात्रा बढ़कर 4.92 लाख टन हो गई, यानी एक साल पहले की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा।

पूर्व USDA अधिकारी फ्रेड गेल्स का कहना है कि भारत से चावल के आयात को चीन द्वारा खारिज किए जाने का समय भी महत्वपूर्ण है। चीन ने मार्च से अपने सरकारी भंडार में रखा पुराना चावल बेचने की प्रक्रिया शुरू की थी।

चीन द्वारा खारिज की गई भारतीय खेपों में लगभग सभी broken rice यानी टूटे हुए चावल थे। यह अपेक्षाकृत सस्ता चावल है और सीधे तौर पर चीन के सरकारी भंडार में रखे पुराने चावल से प्रतिस्पर्धा करता है।

गौर करने वाली बात यह है कि चीन ने वियतनाम, म्यांमार और पाकिस्तान जैसे दूसरे देशों से आने वाले broken rice को इसी तरह खारिज नहीं किया है।

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— GMO के आरोप में चीन ने 3 और भारतीय चावल निर्यातकों का Registration रद्द किया, Exporters ने उठाए सवाल

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Mithilesh Dhar Dubey

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ASSOCIATE EDITOR (CONTENT) Ex-Principal correspondent for IndiaSpend Hindi. Previously at Gaon Connection, Nav Bharat Times, Prabhat Khabar, and Dainik Bhaskar. Expertise in agriculture, education, and climate change.

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