छत्रपति संभाजीनगर। कहीं सोयाबीन की वृद्धि रुक गई है, तो कहीं कटाई के करीब पहुंच चुकी फसल बर्बाद हो गई है। कहीं पाझर तालाब सूखने से पानी का संकट गहरा गया है। पशुओं के चारे की चिंता, फल बागानों को बचाने की जद्दोजहद और पीने के पानी का इंतजार... बीड जिले में सूखे की यह भयावह तस्वीर केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी दल के प्रत्यक्ष निरीक्षण के दौरान सामने आई। शनिवार, 10 अक्टूबर को दल ने जिले के 15 स्थानों पर पहुंचकर खेती, जलस्रोतों और जलापूर्ति की स्थिति का जायजा लिया। सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की बदहाल स्थिति देखकर सूखे की गंभीरता का अंदाजा लगा।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव और दल प्रमुख मुक्तानंद अग्रवाल के नेतृत्व में यह दौरा किया गया। इस दौरान राज्य के कृषि सचिव परिमल सिंह, महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र के उपनिदेशक सुनील कुमार दुबे, जिलाधिकारी डॉ. विवेक जॉन्सन और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितिन रहमान सहित संबंधित अधिकारी मौजूद थे। दल ने खेतों में जाकर फसलों की स्थिति देखी और किसानों से सीधे बातचीत कर नुकसान की जानकारी ली।
अपेक्षित उत्पादन 7 से 8 क्विंटल, हाथ आएगा महज 50 किलो सोयाबीन!
बीड तहसील के मोरगांव में बाबासाहेब चोखामार के दो एकड़ क्षेत्र में लगी सोयाबीन की फसल का निरीक्षण किया गया। सामान्य परिस्थितियों में जहां प्रति एकड़ सात से आठ क्विंटल उत्पादन होने की उम्मीद रहती है, वहीं इस साल प्रति एकड़ मुश्किल से 50 किलो सोयाबीन मिलने की आशंका कृषि सहायकों ने जताई। फूल आने के समय बारिश नहीं होने से फसल की वृद्धि रुक गई।
मोरगांव के करीब 1,400 किसानों में से लगभग 70 प्रतिशत किसानों की फसलों को 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने की जानकारी दी गई। दल ने किरण भास्कर केकाण के खेत का भी निरीक्षण किया। इसी क्षेत्र के खंडाला में किसानों ने कुओं के सूखने और सोयाबीन की फसल की ऊंचाई तीन फीट तक भी नहीं पहुंचने की समस्या बताई। फसल पंचनामों की जांच के दौरान अधिकारियों ने फसलों की वास्तविक स्थिति, तस्वीरों और नुकसान से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी ली। सरपंच श्रीधर गिते से भी खेती और फसल पद्धति के बारे में चर्चा की गई।
65 दिनों से बारिश नहीं; सोयाबीन के साथ फल बागान भी संकट में
पाटोदा तहसील के वैद्यकिन्ही और सोनेगांव में पिछले 65 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेती और जलापूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। वैद्यकिन्ही में देवीदास भानदास के दो हेक्टेयर क्षेत्र में लगी सोयाबीन की फसल का निरीक्षण किया गया। बारिश के अभाव में फसल बर्बाद होने से किसानों को लगातार दूसरे साल नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पशुओं के चारे की कीमत 4,000 रुपये प्रति टन तक पहुंचने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों ने बताया कि पुराने कुएं से दिन में केवल तीन से साढ़े तीन घंटे ही पानी मिल पा रहा है। गांव के लगभग 1,100 हेक्टेयर क्षेत्र में से 950 हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती की गई है। ऐसे में बारिश के लंबे अंतराल से किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
सोनेगांव में सोयाबीन के साथ अरहर, अनार, मौसंबी और अंगूर के बागानों पर भी पानी की कमी का असर दिखाई दिया। किसान अशोक चौरे ने फसलों के लिए 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर और फल बागानों के लिए दो लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि पानी की कमी से सालभर की मेहनत से तैयार किए गए फल बागान सूखने की कगार पर हैं। ऐसे में समय पर आर्थिक मदद मिलना जरूरी है।
सोयाबीन सुखाती महिला को देखकर रुका केंद्रीय दल का काफिला
दाशखेड में खेत में सोयाबीन सुखा रही रेखा जयंत कोकाटे से बातचीत करने के लिए केंद्रीय दल का काफिला रुका। उन्होंने बताया कि पिछले साल 30 बोरी सोयाबीन का उत्पादन हुआ था, लेकिन इस साल डेढ़ से दो एकड़ में मुश्किल से 40 किलो उत्पादन होने की आशंका है। अच्छी काली मिट्टी होने के बावजूद बारिश की कमी से फसल अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ी। हल्की जमीन पर लगी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई, जबकि अच्छी जमीन पर भी उत्पादन घट गया। खेत के पास की नदी सूख जाने से सिंचाई का कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं बचा है।
इसी गांव में सुधाकर नवनाथ ठोंबरे ने बताया कि तीन एकड़ में सोयाबीन की खेती पर 54 हजार रुपये खर्च करने के बावजूद केवल डेढ़ से दो क्विंटल उत्पादन मिलने की संभावना है। इससे लगभग नौ से दस हजार रुपये की आय होने की उम्मीद है।
बबनराव ठोंबरे के ढाई एकड़ सोयाबीन से भी केवल 60 से 70 किलो उत्पादन मिलने की आशंका है। खेती पर किए गए खर्च और संभावित आय के बीच का भारी अंतर किसानों की आर्थिक बदहाली को दर्शाता है।
प्याज, गेंदे और मक्का उत्पादक भी परेशान
वैजाला में केंद्रीय दल ने प्याज, गेंदे और मक्का उत्पादक किसानों से चर्चा की। प्याज उत्पादक बंकट शेवराव येडे ने बताया कि पानी की कमी के कारण उन्हें प्याज की खेती 10 एकड़ से घटाकर इस साल केवल एक एकड़ तक सीमित करनी पड़ी। खेत के तालाब में भी पानी नहीं होने से फसल का भविष्य अनिश्चित हो गया है।
गेंदे की खेती करने वाले पांडुरंग बाबासाहेब मस्के ने बताया कि बढ़ते तापमान के कारण फूलों का आकार छोटा हो रहा है। मक्का उत्पादक काकासाहेब नामदेव येडे ने भी बारिश की कमी से फसल की वृद्धि प्रभावित होने की जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि पानी की कमी का असर केवल पारंपरिक फसलों पर ही नहीं, बल्कि सब्जियों और फूलों की खेती जैसे वैकल्पिक आय के साधनों पर भी पड़ रहा है।
पशुओं के चारे की चिंता; पशुधन बचाना चुनौती
पाटोदा तहसील के बेडूकवाड़ी में वैभव अंकुश शिंदे और अंकुश परसराम शिंदे नामक किसान भाइयों ने पशुओं के चारे की समस्या बताई। फिलहाल उनके पास ज्वार का सूखा चारा और नेपियर घास उपलब्ध है, लेकिन यह भंडार मुश्किल से 15 दिन तक ही चल सकेगा।
बाहर से चारा खरीदने पर प्रति टन 11 हजार रुपये खर्च आ रहा है। प्रतिदिन करीब 130 लीटर दूध का संकलन करने वाले इन किसानों के लिए चारे की बढ़ती लागत बड़ी चुनौती बन गई है। चारा खत्म होने के बाद पशुधन को कैसे बचाया जाए, यह सवाल उनके सामने है। किसानों ने चारे की कमी बढ़ने पर सरकार से चारा डिपो शुरू करने की मांग की।
पाझर तालाब सूखे; बीड शहर की जलापूर्ति पर भी दबाव
फसलों के साथ जलसंकट की स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय दल ने पाली स्थित स्वचालित मौसम केंद्र और बिंदुसरा तालाब का भी निरीक्षण किया। महावेध प्रणाली के माध्यम से तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और दिशा तथा वर्षा की जानकारी हर 10 मिनट में दर्ज की जाती है। अधिकारियों ने बताया कि जिले के 79 राजस्व मंडलों में स्वचालित मौसम केंद्र कार्यरत हैं।
बीड शहर के समीप स्थित बिंदुसरा तालाब में उपयोगी जल भंडारण 30 जून को 17 प्रतिशत था, जो अब घटकर पांच प्रतिशत रह गया है। पिछले साल इसी अवधि में तालाब में 100 प्रतिशत जल भंडारण था।
बीड शहर को प्रतिदिन लगभग 38 मिलियन लीटर पानी की जरूरत होती है। इसमें से 28 मिलियन लीटर पानी माजलगांव बांध से उपलब्ध होता है। शेष पानी के लिए बिंदुसरा तालाब पर निर्भर रहना पड़ता है। इस साल उपलब्ध जल भंडारण को पीने के पानी के लिए सुरक्षित रखने की योजना की जानकारी दल को दी गई।
मोरगांव की दराडे बस्ती स्थित पाझर तालाब में पानी का भंडारण शून्य पाया गया। दल ने प्रभु दराडे के कुएं का निरीक्षण कर भूजल स्तर और पानी की उपलब्धता की जानकारी ली। खंडाला तालाब का भी जायजा लिया गया।
मोरगांव के सरपंच लिंबाजी जाधव ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत गांव की जलापूर्ति योजना का काम पिछले चार से पांच वर्षों से लंबित है। संबंधित अधिकारियों ने इस मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। जिला परिषद के लघु सिंचाई विभाग के अंतर्गत 625 पाझर तालाब और 55 सिंचाई तालाब होने की जानकारी भी दल को दी गई।
बीड में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक
निरीक्षण दौरे के बाद जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी डॉ. विवेक जॉन्सन ने जिले में सूखे की स्थिति पर प्रस्तुतीकरण दिया। इस दौरान फसलों की स्थिति, जलसंकट, भूजल स्तर, चारे की उपलब्धता और किसानों को सहायता वितरण की समीक्षा की गई।
केंद्रीय दल के इस दौरे के दौरान विभिन्न गांवों में किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं और केंद्र सरकार से बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद जताई। लगातार दूसरे साल प्राकृतिक संकट का सामना कर रहे किसानों को अब सरकारी मदद का इंतजार है।





