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BRICS देशों के बीच बनेगा Grain Exchange, अनाज और कृषि जिंसों के कारोबार को मिलेगा नया प्लेटफॉर्म

BRICS Grain Exchange बनाने का प्रस्ताव पहली बार 2023 में सामने आया था। इस पहल को रूस आगे बढ़ा रहा है। रूस दुनिया के बड़े अनाज उत्पादक देशों में शामिल है। इस प्लेटफॉर्म का मकसद अनाज के कारोबार में BRICS देशों की भूमिका को मजबूत करना और वैश्विक बाजार में पश्चिमी देशों के प्रभाव को कम करना है।

Pooja Rai

Pooja Rai·14 Sep 2026

BRICS देशों के बीच बनेगा Grain Exchange, अनाज और कृषि जिंसों के कारोबार को मिलेगा नया प्लेटफॉर्म

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच दुनिया भर में खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में BRICS देशों ने आपस में अनाज के कारोबार के लिए एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने पर जोर दिया है। इसे BRICS Grain Exchange नाम दिया गया है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए BRICS देश आपस में अनाज का कारोबार कर सकेंगे। आगे चलकर इसमें दूसरी कृषि उपज और जिंसों को भी शामिल किया जा सकता है।

BRICS Grain Exchange बनाने का प्रस्ताव पहली बार 2023 में सामने आया था। इस पहल को रूस आगे बढ़ा रहा है। रूस दुनिया के बड़े अनाज उत्पादक देशों में शामिल है। इस प्लेटफॉर्म का मकसद अनाज के कारोबार में BRICS देशों की भूमिका को मजबूत करना और वैश्विक बाजार में पश्चिमी देशों के प्रभाव को कम करना है।

खाद्य सुरक्षा पर BRICS का जोर

दिल्ली में BRICS देशों की बैठक में जारी संयुक्त घोषणा में खाद्य सुरक्षा और पोषण को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया। देशों ने कहा कि खाद्य कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी और सप्लाई में आने वाली रुकावटों से निपटना जरूरी है। इसमें उर्वरकों की कमी जैसी समस्याएं भी शामिल हैं।

घोषणा में BRICS Grain Exchange को आगे बढ़ाने और इसके काम करने के तरीके पर बातचीत जारी रखने की बात कही गई है। भविष्य में इस प्लेटफॉर्म को दूसरी कृषि उपज और जिंसों तक भी बढ़ाया जा सकता है।

कृषि इनपुट और बीजों पर भी सहयोग

BRICS देशों ने BRICS AGRIN नाम से एक नेटवर्क बनाने पर भी सहमति जताई है। इसमें कृषि इनपुट, आनुवंशिक संसाधनों और कृषि से जुड़ी जानकारी को साझा किया जाएगा। यह नेटवर्क किसानों को ध्यान में रखकर काम करेगा और अलग-अलग देशों के अनुभवों से सीखने पर जोर देगा।

इसके अलावा बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकार को लेकर एक ग्लोबल फोरम शुरू करने का फैसला किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों की पारंपरिक जानकारी और बीजों से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करना और देशों के बीच जानकारी साझा करना है।

जलवायु अनुकूल खेती पर भी जोर

BRICS देशों ने Agroecology और Regenerative Agriculture के लिए Centres of Excellence का नेटवर्क बनाने का समर्थन किया है। इसके जरिए टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल खेती से जुड़ी तकनीकों और ज्ञान को साझा किया जाएगा।

साथ ही Digital Agriculture के लिए भी BRICS Network बनाने पर सहमति बनी है। इसमें कृषि के साथ Agroforestry, Fisheries और Aquaculture जैसे क्षेत्र भी शामिल होंगे।

खाद्य संकट से निपटने के लिए मजबूत व्यवस्था

BRICS देशों ने अचानक होने वाली सप्लाई की समस्या से निपटने के लिए देशों की अपनी क्षमता मजबूत करने पर भी जोर दिया। इसके लिए राष्ट्रीय खाद्य भंडार, सूखा सहने वाली और जलवायु के अनुकूल बीज प्रणालियों को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

घोषणा में छोटे और सीमांत किसान, परिवार आधारित किसान, पशुपालक, छोटे मछुआरे, मत्स्य और जलीय कृषि से जुड़े उत्पादक, आदिवासी और स्थानीय समुदायों के साथ महिलाओं और युवाओं को कृषि और खाद्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।

BRICS देशों ने WTO में कृषि व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने की बात भी कही। देशों ने ऐसी कृषि व्यापार व्यवस्था की जरूरत बताई, जो निष्पक्ष, संतुलित और विकास को बढ़ावा देने वाली हो।

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