भारत में तुअर दाल की जरूरत को देखते हुए अब ब्राजील भी तुअर की सप्लाई करने की तैयारी में है। ब्राजील से तुअर की पहली खेप अक्टूबर-नवंबर 2026 में भारत पहुंच सकती है। इस साल करीब 20 से 30 हजार टन तुअर आने की उम्मीद है। हालांकि, अगले साल ब्राजील से तुअर की सप्लाई और बढ़ सकती है।
इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के चेयरमैन बिमल कोठारी के मुताबिक, भारत में तुअर की जरूरत बनी रहेगी और आने वाले समय में बड़ी मात्रा में इसका आयात जारी रहेगा।
भारतीय बाजार के लिए ब्राजील में उगाई जा रही तुअर
IPGA की पहल पर ब्राजील के किसानों और निर्यातकों ने भारत की जरूरत को ध्यान में रखते हुए तुअर की खेती शुरू की है। अब वहां से तुअर भारत भेजने की तैयारी चल रही है।
ब्राजील पहले से ही भारत को उड़द (Black Matpe) भेज रहा है। उड़द के मामले में म्यांमार के बाद ब्राजील भारत को दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन चुका है। अब तुअर भी ब्राजील से भारत आने वाली दालों में शामिल होने जा रही है।
भारत कई देशों से करता है तुअर का आयात
भारत अपनी जरूरत पूरी करने के लिए मोजाम्बिक, म्यांमार, तंजानिया, सूडान और मलावी जैसे देशों से तुअर मंगाता है।
जनवरी से जुलाई 2026 के बीच भारत ने 5.79 लाख टन तुअर का आयात किया, जो पिछले साल इसी अवधि में 4.01 लाख टन था। यानी इस दौरान तुअर का आयात करीब 44 फीसदी बढ़ा है।
इस अवधि में मोजाम्बिक से सबसे ज्यादा 2.18 लाख टन, म्यांमार से 1.35 लाख टन, तंजानिया से 1.04 लाख टन और सूडान से करीब 68,499 टन तुअर भारत आई।
पूरे 2025 में भारत का तुअर आयात 13.25 लाख टन रहा था, जो 2024 के मुकाबले 5.42 फीसदी ज्यादा था।
देश में तुअर की खेती का रकबा बढ़ा
खरीफ 2026 में देश में करीब 47.25 लाख हेक्टेयर में तुअर बोई गई है। पिछले साल यह रकबा करीब 45.95 लाख हेक्टेयर था।
कर्नाटक में तुअर का रकबा करीब 6 फीसदी घटकर 14.16 लाख हेक्टेयर रह गया है। महाराष्ट्र में भी रकबा करीब 1.5 फीसदी घटकर 12.02 लाख हेक्टेयर रह गया।
वहीं, उत्तर प्रदेश में तुअर की खेती का रकबा करीब 33 फीसदी बढ़कर 4.95 लाख हेक्टेयर हो गया है। गुजरात में भी करीब 11 फीसदी बढ़ोतरी के साथ रकबा 3.3 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी तुअर की खेती का रकबा बढ़ा है।
सूखे से तुअर की फसल पर असर की चिंता
इस साल कर्नाटक और महाराष्ट्र के कई इलाकों में बारिश कम होने से तुअर की फसल को लेकर चिंता बनी हुई है। दोनों राज्यों के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति भी घोषित की गई है।
हालांकि, अभी तुअर की फसल को लेकर पूरी तस्वीर साफ नहीं है। IPGA के मुताबिक, अक्टूबर के मध्य तक फसल की स्थिति का बेहतर अंदाजा लग सकेगा, क्योंकि कुछ इलाकों में बाद में बारिश हुई है।





