बिहार में धान का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन सरकारी खरीद का लक्ष्य कम होता जा रहा है। खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने बिहार से 35 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया है। अब बिहार सरकार ने इस लक्ष्य को बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन करने की मांग की है। राज्य सरकार का कहना है कि धान का उत्पादन बढ़ने के साथ सरकारी खरीद का लक्ष्य भी बढ़ना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को अपनी उपज बेचने का मौका मिल सके।
1 नवंबर से शुरू होगी धान खरीद
बिहार में इस साल धान की सरकारी खरीद 1 नवंबर से शुरू होने वाली है। राज्य में खरीफ सीजन में करीब 42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें बोई जाती हैं, जिसमें धान का रकबा 37 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। ऐसे में धान बिहार के किसानों की आमदनी का एक बड़ा जरिया है।
केंद्र से 50 लाख टन खरीद का लक्ष्य मांगा
बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने केंद्र सरकार से धान खरीद का लक्ष्य 35 लाख से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन करने की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र लिखकर लक्ष्य बढ़ाने की मांग की है और जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया है।
राज्य सरकार का कहना है कि इस साल बिहार में धान का उत्पादन करीब 154.39 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। ऐसे में 35 लाख टन का खरीद लक्ष्य पर्याप्त नहीं है।
उत्पादन बढ़ा, लेकिन खरीद का लक्ष्य घटता गया
पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो बिहार में धान का उत्पादन बढ़ा है, लेकिन सरकारी खरीद का लक्ष्य कम हुआ है।
- 2023-24: धान उत्पादन 133.26 लाख मीट्रिक टन, खरीद लक्ष्य 45 लाख टन
- 2024-25: उत्पादन 141.08 लाख मीट्रिक टन, खरीद लक्ष्य 45 लाख टन
- 2025-26: उत्पादन 151.36 लाख मीट्रिक टन, खरीद लक्ष्य 36.85 लाख टन
- 2026-27: अनुमानित उत्पादन 154.39 लाख मीट्रिक टन, खरीद लक्ष्य 35 लाख टन
वहीं, सरकारी खरीद के लक्ष्य को हासिल करने की क्षमता भी पिछले वर्षों में बढ़ी है। 2023-24 में लक्ष्य का करीब 68.42 फीसदी, 2024-25 में 87.18 फीसदी और 2025-26 में करीब 99.84 फीसदी खरीद हुई थी।
बिहार को हर साल करीब 48.87 लाख टन धान की जरूरत
बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत हर साल करीब 33.16 लाख मीट्रिक टन चावल की जरूरत होती है। इसके लिए लगभग 48.87 लाख मीट्रिक टन धान की जरूरत पड़ती है।
राज्य सरकार का तर्क है कि अगर बिहार में ही ज्यादा धान की खरीद की जाए और उसे चावल में बदला जाए, तो राज्य की खाद्यान्न जरूरत स्थानीय स्तर पर पूरी करने में मदद मिलेगी। साथ ही दूसरे राज्यों से चावल लाने में होने वाला परिवहन खर्च भी कम किया जा सकता है।





