बिहार के जीआई-टैग वाले मिथिला मखाना ने विदेशी बाजार में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। APEDA की मदद से पहली बार 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना समुद्री रास्ते से ऑस्ट्रेलिया भेजा गया। इस खेप से जुड़े किसानों को सामान्य बाजार भाव की तुलना में करीब 18% ज्यादा कीमत मिली है।
यह मखाना दरभंगा जिले के किसानों से सीधे खरीदा गया था। इसके बाद इसे बिहार के बिहटा स्थित बीआईएडीए औद्योगिक क्षेत्र में पैक किया गया और समुद्री रास्ते से ऑस्ट्रेलिया भेजा गया। इससे किसानों को सीधे निर्यात बाजार से जुड़ने और बेहतर दाम पाने का मौका मिला है।
इस खेप को बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने रवाना किया। निर्यात NIAD Green ने किया, जबकि लॉजिस्टिक्स की जिम्मेदारी Jitban Supply Chain Pvt Ltd ने संभाली। APEDA ने बिहार सरकार के कृषि विभाग के सहयोग से इस निर्यात को सुगम बनाया।
बिहार में होता है देश का 85% मखाना उत्पादन
भारत के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी करीब 85% है। मखाना के कारोबार और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जुलाई 2025 से इसके लिए अलग HS कोड भी लागू किया गया है। इससे मखाना के निर्यात का सही आंकड़ा जुटाने और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 20 से ज्यादा देशों को 7,000 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और मूल्यवर्धित मखाना उत्पादों का निर्यात किया। अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीका के अलावा अब ऑस्ट्रेलिया भी भारतीय मखाना के प्रमुख बाजारों में शामिल हो रहा है।
किसानों के लिए बढ़ेंगे कमाई के अवसर
APEDA के मुताबिक, मिथिला मखाना की बढ़ती वैश्विक मांग से बिहार के किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं और निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। सीधे किसानों से खरीद और निर्यात बाजार से जुड़ाव होने पर किसानों को स्थानीय बाजार की तुलना में बेहतर कीमत मिल सकती है।
यह समुद्री निर्यात बिहार के मखाना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में मिथिला मखाना की अंतरराष्ट्रीय पहचान और किसानों की आय दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
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