सुपारी को लेकर लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि इसके सेवन से कैंसर का खतरा होता है या नहीं। अब इस सवाल का वैज्ञानिक जवाब जल्द मिल सकता है। केरल के कासरगोड स्थित ICAR-CPCRI के निदेशक के. बालचंद्र हेब्बर ने कहा है कि अगले एक से दो साल में इस बात पर साफ जवाब मिलने की उम्मीद है कि सुपारी का सेवन इंसानों में कैंसर का कारण बनता है या नहीं।
इसके लिए साल 2025 में ‘Evidence-Based Research on Arecanut and Human Health’ नाम से एक बड़ा शोध प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस रिसर्च की जिम्मेदारी ICAR-CPCRI के पास है और इसमें देश की करीब 16 राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थाएं शामिल हैं। इनमें AIIMS, NBRI, CCMB, IISc, JIPMER और CFTRI जैसे संस्थान भी शामिल हैं। संस्थान के मुताबिक, यह सुपारी और मानव स्वास्थ्य पर दुनिया में अपनी तरह का पहला व्यापक शोध है।
हेब्बर ने बताया कि संस्थान सुपारी के साथ-साथ कोको की खेती पर भी काम कर रहा है। देश में हर साल करीब 1.10 लाख टन कोको बीन्स की मांग है, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 30 हजार टन ही है। ऐसे में सुपारी, नारियल और ऑयल पाम के बागानों में इंटरक्रॉप के तौर पर कोको की खेती की संभावनाओं पर भी अध्ययन किया जा रहा है।
इसी कार्यक्रम के दौरान ICAR-CPCRI के क्षेत्रीय केंद्र परिसर में टिश्यू कल्चर से तैयार बौनी सुपारी के 24 पौधे भी लगाए गए। संस्थान ने पहली बार ऐसे पौधे तैयार किए हैं और करीब 100 पौधों को फील्ड ट्रायल के लिए विकसित किया गया है।


