कृषि की पढ़ाई करने के बाद अगर छात्र नौकरी के लिए भटकते रहें, तो पढ़ाई का फायदा क्या है? कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से इसी सवाल पर ध्यान देने को कहा है। उन्होंने कहा कि संस्थानों को सिर्फ डिग्री देने पर नहीं, बल्कि छात्रों को रोजगार के लायक बनाने पर भी जोर देना चाहिए।
शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के 36वें वार्षिक सम्मेलन में यह बात कही। सम्मेलन में कृषि शिक्षा, रोजगार और किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
10 साल में 25 लाख छात्र पास, 8 लाख को रोजगार नहीं
सम्मेलन में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 साल में करीब 25 लाख छात्र कृषि विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। इनमें से करीब 17 लाख छात्रों को रोजगार मिला, जबकि लगभग 8 लाख छात्र रोजगार हासिल नहीं कर सके।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हर कृषि विश्वविद्यालय के पास यह साफ आंकड़ा होना चाहिए कि उसके कितने छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद कहां गए और क्या कर रहे हैं। उनका कहना था कि अगर छात्र डिग्री लेने के बाद भी लगातार नौकरी की तलाश करते रहें, तो कृषि शिक्षा का उद्देश्य पूरा नहीं होता।
निजी कृषि विश्वविद्यालयों पर भी निगरानी की जरूरत
कृषि मंत्री ने देश में तेजी से खुल रहे निजी कृषि विश्वविद्यालयों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा के क्षेत्र में उचित नियम और निगरानी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि कोई भी संस्थान अपनी इच्छा से कृषि शिक्षा शुरू कर दे और इसे सिर्फ कमाई का जरिया बना ले। कृषि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निजी संस्थानों पर भी सही तरीके से निगरानी होनी चाहिए।
KVK को मजबूत करने की मांग
देशभर से आए कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) को और मजबूत करने की मांग की। KVK कृषि वैज्ञानिकों की तकनीक और शोध को किसानों तक पहुंचाने का काम करते हैं।
कुलपतियों ने इसके लिए ज्यादा फंड देने की जरूरत बताई। इसके साथ ही देश में प्राकृतिक खेती के लिए पहला कॉलेज शुरू करने और ब्लॉक स्तर पर एकीकृत खेती की इकाइयां बनाने का सुझाव भी दिया गया।
प्याज की बढ़ती कीमतों पर भी बोले शिवराज
कृषि मंत्री ने प्याज की बढ़ती कीमतों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी है कि किसान को मिलने वाली कीमत और बाजार में ग्राहक द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत के बीच का अंतर कम किया जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को कम कीमत पर प्याज बेचने से बचाने के लिए बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत प्याज खरीदा था। लेकिन अब जब किसानों के पास प्याज का स्टॉक नहीं है, तो कीमतें तेजी से क्यों बढ़ रही हैं, इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिले और ग्राहकों को भी प्याज ज्यादा महंगा न खरीदना पड़े, इसके बीच संतुलन बनाना जरूरी है।


