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75% ग्रामीण खर्च पर घटा टैक्स बोझ, 22 सितंबर से लागू होंगी नई दरें: FICCI

नई जीएसटी दरें 22 सितंबर से लागू होंगी, जिनसे ग्रामीण भारत को बड़ी राहत मिलेगी। अब गाँवों के लगभग 75% और शहरों के 66% खर्च पर या तो टैक्स नहीं लगेगा या सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा। 12% स्लैब हट गया है, 5% श

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Pooja Rai·21 Sep 2025· 4 min read

75% ग्रामीण खर्च पर घटा टैक्स बोझ, 22 सितंबर से लागू होंगी नई दरें: FICCI

75% ग्रामीण खर्च पर घटा टैक्स बोझ, 22 सितंबर से लागू होंगी नई दरें: FICCI

नई जीएसटी दरें 22 सितंबर से लागू होंगी, जिनसे ग्रामीण भारत को बड़ी राहत मिलेगी। अब गाँवों के लगभग 75% और शहरों के 66% खर्च पर या तो टैक्स नहीं लगेगा या सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा। 12% स्लैब हट गया है, 5% श्रेणी का दायरा बढ़ा है और ऊँचे टैक्स वाले स्लैब में बहुत कम वस्तुएँ बची हैं। इसका सीधा फायदा आम लोगों, खासकर ग्रामीण परिवारों को होगा क्योंकि उनकी रोज़मर्रा की ज़रूरतें सस्ती पड़ेंगी।

सरकार ने 22 सितंबर से लागू होने वाली नई जीएसटी दरों के जरिए रोजमर्रा की खपत पर लगने वाले टैक्स का बोझ कम करने का कदम उठाया है। FICCI के विश्लेषण के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के खर्च का लगभग 75% हिस्सा अब या तो टैक्स फ्री रहेगा या सिर्फ 5% जीएसटी के दायरे में आएगा। शहरों में यह लाभ थोड़ा कम होगा। करीब 66% खर्च पर टैक्स का भार घटेगा। इसका मतलब साफ है।गाँव-शहर दोनों जगह की आम ज़रूरतों पर खर्च कम महंगा होगा, खासकर ग्रामीण इलाकों में राहत ज्यादा मिलेगी।

क्या बदल रहा है?
नई जीएसटी व्यवस्था के तहत टैक्स स्लैब और वस्तुओं की श्रेणियों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब भी लगभग 29% वस्तुएँ पूरी तरह टैक्स-फ्री रहेंगी, जो ग्रामीण खर्च का करीब 36% और शहरी खर्च का लगभग 32% हिस्सा कवर करती हैं। सबसे बड़ा बदलाव 5% स्लैब में हुआ है, जहाँ पहले सिर्फ 14.7% वस्तुएँ आती थीं, वहीं अब यह बढ़कर 40.5% हो गया है। इसका मतलब है कि रोजमर्रा की अधिकतर चीज़ें अब सिर्फ 5% टैक्स पर मिलेंगी, जिससे ग्रामीण खर्च का करीब 38.8% और शहरी खर्च का 33.3% हिस्सा इस श्रेणी में आ जाएगा।

वहीं 12% स्लैब को पूरी तरह हटा दिया गया है और उसकी वस्तुओं को अन्य स्लैब्स में शामिल कर लिया गया है। 18% स्लैब का दायरा भी घटा है—पहले इसमें 26.6% वस्तुएँ आती थीं, लेकिन अब यह घटकर 23.1% रह गया है, जिसमें ग्रामीण खर्च का लगभग 12.3% और शहरी खर्च का 14.1% शामिल होगा। सबसे ऊँचा टैक्स स्लैब यानी 28% और उससे ऊपर अब बेहद सीमित हो गया है, इसमें सिर्फ 0.5% वस्तुएँ बचेंगी, जिनका असर कुल खर्च पर मात्र 0.2% होगा। कुल मिलाकर नई व्यवस्था का फोकस आम उपयोग की वस्तुओं को सस्ता बनाने पर है।

ये भी पढ़ें - भारत-अमेरिका व्यापार समझौता करीब, कृषि क्षेत्र पर क्या होगा असर?

इस बदलाव का सीधा असर क्या होगा?
रोज़मर्रा की चीज़ें सस्ती होंगी — खाने-पीने और घरेलू उपभोग की कई चीज़ें या तो बिलकुल टैक्स-फ्री होंगी या 5% पर उपलब्ध होंगी, जिससे परिवारों की मासिक खर्च क्षमता बढ़ेगी।
ग्रामीणों को बड़ा लाभ — क्योंकि गाँवों में खर्च का बड़ा हिस्सा उन चलने वाली चीज़ों पर ही होता है जिन्हें अब कम टैक्स मिलेगा, ग्रामीण परिवारों की खरीदी शक्ति बढ़नी चाहिए।
मांग में बढ़ोत्तरी की संभावना — चीज़ों के सस्ते होने से घरेलू मांग बढ़ सकती है, जिसका फायदा छोटे व्यवसाय और कृषक भी उठा सकते हैं।
सरकार की आमदनी पर असर — टैक्स घटने से कुछ मदों में राजस्व घट सकता है। इसलिए यह बदलाव सरकार की वित्तीय योजना और सब्सिडी-निर्धारण के साथ संतुलित होना चाहिए।

ये भी जरूरी
नई जीएसटी दरें रोज़मर्रा की जरूरतों पर टैक्स का बोझ घटाने पर केंद्रित हैं और इसका सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण परिवारों को मिलने की संभावना है। वहां के खर्च का अब करीब 75% हिस्सा कम टैक्स वाले दायरे में आ रहा है। शहरी घरों को भी राहत मिलेगी लेकिन वह अपेक्षाकृत कम होगी। कुल मिलाकर यह कदम उपभोक्ता-स्तर पर सस्ती वस्तुओं और खरीदी शक्ति बढ़ाने की दिशा में लिया गया दिखता है, पर सफल क्रियान्वयन के लिए कीमतों में कटौती का लाभ सीधे उपभोक्ता तक पहुँचाना और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु रखना ज़रूरी होगा।

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