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सरकारी ड्राफ्ट सीड्स बिल पर विवाद, क्या बदल जाएगा किसानों और बीज कंपनियों के लिए?

भारत सरकार के नए ड्राफ्ट सीड्स बिल में विदेशी संस्थाओं को बीजों के ट्रायल और सर्टिफिकेशन की अनुमति देने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे बीजों की मंजूरी तेज होगी और किसानों तक नए बीज जल्दी पहु

Pooja Rai

Pooja Rai·18 Nov 2025· 3 min read

सरकारी ड्राफ्ट सीड्स बिल पर विवाद, क्या बदल जाएगा किसानों और बीज कंपनियों के लिए?

सरकारी ड्राफ्ट सीड्स बिल पर विवाद, क्या बदल जाएगा किसानों और बीज कंपनियों के लिए?

भारत सरकार के नए ड्राफ्ट सीड्स बिल में विदेशी संस्थाओं को बीजों के ट्रायल और सर्टिफिकेशन की अनुमति देने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे बीजों की मंजूरी तेज होगी और किसानों तक नए बीज जल्दी पहुंचेंगे। ICAR की भूमिका भी बनी रहेगी।लेकिन अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे बड़ी विदेशी और घरेलू कंपनियों का दबदबा बढ़ेगा और बीज महंगे हो सकते हैं।

भारत सरकार ने नया ड्राफ्ट सीड्स बिल जारी किया है और जनता से सुझाव मांगे हैं। इस बिल में विदेशी संस्थाओं को बीजों की टेस्टिंग (ट्रायल) और सर्टिफिकेशन करने की अनुमति देने का प्रावधान है। इसी कारण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के कुछ वैज्ञानिकों और बीज विशेषज्ञों में भ्रम की स्थिति है। उन्हें लगता है कि इससे ICAR की भूमिका कम हो सकती है।लेकिन कृषि मंत्रालय का कहना है कि ICAR की भूमिका और बढ़ेगी और इस कदम से किसानों तक नए बीज जल्दी पहुंच सकेंगे।

विदेशी संस्थाओं को ट्रायल और सर्टिफिकेशन की अनुमति
रिपोर्ट के मुताबिक बिल की धारा 16 (3) कहती है कि सरकार विदेश में स्थित किसी भी संस्था को बीजों के ट्रायल करने की अनुमति दे सकती है, ताकि उनकी Value for Cultivation and Use (VCU) यानी खेती में उपयोगिता का परीक्षण हो सके।
धारा 27 के अनुसार सरकार विदेश की किसी Seed Certification Agency को भारत में मान्यता दे सकती है।

यह प्रावधान क्यों लाया गया?
कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि इससे भारत को लाभ होगा क्योंकि अभी विदेशी बीजों पर ऐसी कोई अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन व्यवस्था लागू नहीं है। कई देशों में ऐसा होता है कि केवल मान्यता प्राप्त विदेशी एजेंसी के प्रमाणित बीज ही आयात किए जा सकते हैं।

भारत में अभी आयातित बीजों (विशेषकर फल–सब्जी और चारे की किस्मों) के लिए ऐसी बाध्यता नहीं है। इसी तरह, भारतीय कृषि उत्पादों को निर्यात करने के लिए भी भारत की कई लैबों को विदेशी देशों से मंजूरी लेनी पड़ती है। अधिकारियों का कहना है कि बीज आयात में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू होनी चाहिए।

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बीज ट्रायल तेज होंगे
अभी किसी भी नए बीज को भारत में मंजूरी मिलने से पहले तीन सीजन तक टेस्ट किया जाता है।अगर विदेशी संस्थाओं को भी ट्रायल करने की अनुमति मिलती है और उनका डेटा ICAR के साथ साझा किया जाता है, तो यह प्रक्रिया 1–2 सीजन में पूरी की जा सकेगी—अगर बीज उस देश की जलवायु में पहले से टेस्ट हुआ हो।

AIKS का विरोध
अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने इस बिल का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह बिल छोटे किसानों को नुकसान पहुंचाएगा और भारत की सीड सॉवरेनिटी (बीज स्वतंत्रता) कुछ बड़ी विदेशी और घरेलू कंपनियों के हाथों में चली जाएगी।AIKS का आरोप है कि यह बिल कंपनियों को मनमानी कीमतें तय करने की छूट देगा, जिससे बीज महंगे हो सकते हैं।

संस्था ने यह भी कहा कि नया बिल Plant Varieties and Farmers’ Rights Act 2001, और भारत की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों—CBD और ITPGRFA—के खिलाफ नहीं होना चाहिए।

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