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बारिश से ज्यादा प्रबंधन की कमी बनी पंजाब बाढ़ की वजह, किसानों से लेकर व्यापारियों तक सब प्रभावित

पंजाब इस साल 40 साल की सबसे भयानक बाढ़ का सामना कर रहा है। भारी बारिश और डैम से छोड़े गए पानी ने लाखों एकड़ खेत डुबो दिए, जिससे धान, मक्का और गन्ने की फसलें बर्बाद हो गईं और हजारों किसान मुश्किल में ह

Pooja Rai

Pooja Rai·15 Sep 2025· 5 min read

बारिश से ज्यादा प्रबंधन की कमी बनी पंजाब बाढ़ की वजह, किसानों से लेकर व्यापारियों तक सब प्रभावित

बारिश से ज्यादा प्रबंधन की कमी बनी पंजाब बाढ़ की वजह, किसानों से लेकर व्यापारियों तक सब प्रभावित

पंजाब इस साल 40 साल की सबसे भयानक बाढ़ का सामना कर रहा है। भारी बारिश और डैम से छोड़े गए पानी ने लाखों एकड़ खेत डुबो दिए, जिससे धान, मक्का और गन्ने की फसलें बर्बाद हो गईं और हजारों किसान मुश्किल में हैं। अब तक 53 लोगों की जान जा चुकी है और करीब 3.88 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 1,600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद और किसानों व बाढ़ प्रभावितों के लिए राहत पैकेज का ऐलान किया है।

पंजाब इस समय पिछले लगभग 40 सालों की सबसे भयंकर बाढ़ का सामना कर रहा है। 1988 की तबाही को भी पीछे छोड़ते हुए इस बार हालात और गंभीर हो गए हैं। अगस्त 2025 की शुरुआत में हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में हुई भारी बारिश के बाद सतलुज, ब्यास और रावी जैसी नदियाँ खतरे के स्तर से ऊपर बहने लगीं। ऊपर से पोंग, भाखड़ा और रणजीत सागर डैम से छोड़े गए अतिरिक्त पानी ने पंजाब के निचले इलाकों में तबाही और बढ़ा दी।

"लगभग 27 अगस्त को बांध टूट गया।पंजाब की अर्थव्यवस्था खेती पर निर्भर है और पंजाब का मजदूर वर्ग किसानों के साथ काम करता है। अगर किसान के पास खेती नहीं बचेगी तो मजदूरों के पास काम नहीं बचेगा। ये दोनों नहीं बचेंगे तो पंजाब का बाज़ार भी नहीं बचेगा और व्यापारी वर्ग भी प्रभावित होगा।"

"जब 27 तारीख को गुरदासपुर में 10 से 11 फीट पानी था, तब पंजाब के मुख्यमंत्री तमिलनाडु में थे। उन्हें 30 तारीख को पता चला कि पंजाब में बाढ़ आई हुई है।इसका असर किसानों के साथ-साथ व्यापार वर्ग पर भी गहरा पड़ने वाला है।"

"आपने बाढ़ के लिए कोई अच्छा प्रबंधन नहीं देखा। आपको जनवरी से मालूम था, आईएमडी लगातार बता रहा था कि इस बार जरूरत से ज्यादा बारिश आने वाली है। हम लोग साफ़ कहते हैं और अपनी कमेटी की तरफ से केंद्र और पंजाब सरकार से कहते हैं कि यह बाढ़ सिर्फ भारी बारिश से नहीं बल्कि प्रबंधन की कमी की वजह से हुई है।"

– हरविंदर सिंह मसानिया, किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी

किसानों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। करीब 3.75 लाख एकड़ खेत पानी में डूब गए हैं। धान, मक्का और गन्ने की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। घरों में रखा अनाज सड़ गया और हजारों पशु मर गए। अब किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ खेत खाली हो गए, दूसरी तरफ आजीविका का सहारा भी टूट गया।

"जो भी अनाज घरों में खाने के लिए ड्रम में रखा था, वह भी खराब हो गया। कुछ भी नहीं बचा। बिस्तर, कपड़े सब खत्म हो गए।"

– गुरप्रीत सिंह, निवासी

"हमने गेहूँ खरीदा था, स्टोर किया था, और अचानक बाढ़ आ गई। देखिए सब बर्बाद हो गया। लगभग दस हजार का गेहूँ खराब हो गया और ट्रेडर्स के मुताबिक 50 से 60 लाख का नुकसान हो गया है।"

– रामदास, ट्रेडर, अमृतसर

गाँव-गाँव में तबाही का मंजर है। अब तक 53 लोगों की जान जा चुकी है और 22 जिलों के 2,185 गाँवों के करीब 3.88 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। राहत कार्यों में अब तक 23,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है और 115 राहत कैंपों में करीब 4,500 लोग शरण लिए हुए हैं।

"पूरी उम्र लगाकर घर बनता है, लेकिन इस बाढ़ में 25 से 30 प्रतिशत घरों में दरारें पड़ गईं। बहुत से घर बह गए। यह एक बड़ी क्षति है। लोगों की जान जाना एक और बड़ी क्षति है। पशुओं का नुकसान तीसरी बड़ी क्षति है। गन्ना, कपास और सब्जियों समेत खरीफ की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।"

– सरवन सिंह पंधेर, किसान नेता (किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी)

बाढ़ का असर सिर्फ गाँवों तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब की सबसे बड़ी पहचान बासमती चावल की खेती और निर्यात पर भी पड़ा है। पंजाब अकेले भारत के बासमती निर्यात में 40% योगदान देता है। लेकिन इस बार उत्पादन में 20–25% गिरावट की आशंका है। 2024-25 में भारत ने 60.7 लाख टन बासमती चावल निर्यात किया था, जो इस साल काफी घट सकता है।

"बासमती की फसल की पत्तियाँ काली हो गई हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में इतना पानी भर गया है कि अब फसल खड़ी नहीं हो पाएगी।"
– जीत सिंह, किसान

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस नुकसान का बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है। उनका कहना है कि 70% नुकसान असामान्य और अत्यधिक बारिश से हुआ है, जबकि 30% डैम से छोड़े गए पानी से। बदलते मौसम पैटर्न की वजह से मानसून अब अचानक और तेज़ बारिश लेकर आता है, जिससे व्यवस्था और ढांचा दोनों ही चरमरा जाते हैं।

हालात की गंभीरता देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के लिए विशेष राहत पैकेज का ऐलान किया है। पहले से जारी ₹12,000 करोड़ के अलावा अतिरिक्त ₹1,600 करोड़ दिए जाएंगे। साथ ही आपदा राहत कोष (SDRF) की दूसरी किस्त और पीएम-किसान सम्मान निधि की अगली किस्त तुरंत जारी की जाएगी। प्रभावित किसानों और परिवारों के लिए पीएम आवास योजना के तहत घर बनाने, हाईवे और स्कूलों की मरम्मत करने और किसानों-पशुपालकों को राहत सामग्री देने की घोषणा की गई है।

"1988 के बाद से पंजाब में ऐसी तबाही नहीं हुई थी। पहले बाढ़ सिर्फ कुछ जिलों तक सीमित रहती थी। लेकिन इस बार अगस्त में जो बारिश हुई, वह बहुत अनएक्सपेक्टेड थी। इसलिए पानी को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया।"

– गिरजेश मिश्रा, एग्जीक्यूटिव एडिटर, दैनिक भास्कर, जालंधर

प्रधानमंत्री मोदी ने खुद हवाई सर्वे कर हालात का जायजा लिया और प्रभावित परिवारों व किसानों से मुलाकात की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर हर संभव मदद करेंगी और पुनर्वास का काम तेजी से किया जाएगा।

आपको बता दें कि पंजाब में सभी गुरुद्वारे बाढ़ पीड़ितों के लिए खोल दिए गए हैं। लोग अलग-अलग जगहों से राशन, पानी और जरूरी सामान लेकर आ रहे हैं और पीड़ितों की मदद कर रहे हैं।

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