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न्यूज़ीलैंड का बासमती चावल के ल‍िए भारत को ट्रेडमार्क देने से इनकार, कहा- दूसरे देशों में भी इसका उत्‍पादन

न्यूजीलैंड ने बासमती चावल (Basmati Rice) के लिए ट्रेडमार्क (Trademark) के प्रमाण देने से मना कर द‍िया जो भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग के बराबर होता है। ऑस्ट्रेलिया यह पहले ही कर चुका है। ऑस्ट्रेलियाई क्षे

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Indal·Correspondent·04 Jul 2024· 3 min read

न्यूज़ीलैंड का बासमती चावल के ल‍िए भारत को ट्रेडमार्क देने से इनकार, कहा- दूसरे देशों में भी इसका उत्‍पादन

न्यूज़ीलैंड का बासमती चावल के ल‍िए भारत को ट्रेडमार्क देने से इनकार, कहा- दूसरे देशों में भी इसका उत्‍पादन

न्यूजीलैंड ने बासमती चावल (Basmati Rice) के लिए ट्रेडमार्क (Trademark) के प्रमाण देने से मना कर द‍िया जो भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग के बराबर होता है। ऑस्ट्रेलिया यह पहले ही कर चुका है। ऑस्ट्रेलियाई क्षेत्र की सबसे बड़ी बौद्धिक संपदा फर्मों में से एक एजे पार्क ने कहा कि न्यूजीलैंड के बौद्धिक संपदा कार्यालय (आईपीओएनजेड) ने यह कहते हुए प्रमाणन प्रदान करने से इनकार कर दिया कि सुगंधित चावल भारत के बाहर उगाया जाता है और उत्पादकों को इस शब्द का उपयोग करने का वैध अधिकार है।

जनवरी 2023 में ऑस्ट्रेलिया ने अपने बासमती चावल के लिए भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग की मांग करने वाले भारत के आवेदन को खारिज कर दिया था। उनका कहना था क‍ि ऐसे नहीं है कि इसकी खेती बस भारत में ही होती है।

भारत की ओर कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने ट्रेडमार्क के प्रमाणन के लिए आवेदन दायर किया। एपीडा निर्यात को बढ़ावा देता है और विदेशों में भारतीय उत्पादों के लिए जीआई पंजीकरण का ख्याल रखता है।

'रणनीति की समीक्षा की जरूरत है'

एजे पार्क ने कहा कि भारत सरकार उत्पाद में इसके सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व को बनाए रखने के लिए बासमती शब्द की रक्षा करना चाहती है। भारत ने अपनी कृषि और पाक परंपराओं के साथ बासमती के ऐतिहासिक जुड़ाव के आधार पर विशेष अधिकारों के लिए तर्क दिया। हालांकि आईपीओएनजेड ने कहा कि उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों से पता चलता है कि पाकिस्तान जैसे अन्य चावल उत्पादक देश भी इस मांग वाले चावल की किस्म के बाजार में योगदान करते हैं।

यह भी पढ़ें- झारखंड में इफको का अभियान, नैनो उर्वरकों की तरफ बढ़ें किसान

“बासमती चावल: भौगोलिक संकेत का इतिहास” के लेखक एस चंद्रशेखरन ने कहा, “ऑस्ट्रेलिया के फैसले के बाद, आईपीओएनजेड का निर्णय संकेत देता है कि भारत को बासमती चावल पर विशेष अधिकार का दावा करने के लिए अपनी ऐतिहासिक प्रतिष्ठा पर अधिक काम करना चाहिए था।” उन्होंने जीआई टैग प्राप्त करने की भारत की रणनीति की व्यापक समीक्षा का आह्वान किया क्योंकि विशिष्टता का मामला देश की संप्रभुता से जुड़ा हुआ है।

पाकिस्तान का भी दावा

चंद्रशेखरन जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह सैकड़ों वर्षों से बासमती चावल उगा रहा है, जबकि पाकिस्तान जैसे देशों का केवल 75 साल का इतिहास है।

पाकिस्तान के व्यापार विकास प्राधिकरण ने दिसंबर 2023 में बासमती ट्रेडमार्क के लिए आवेदन किया था और उसे अपने आवेदन के समर्थन में और दस्तावेज़ जमा करने के लिए मई 2024 से और समय दिया गया है।

एजे पार्क ने कहा कि इस निर्णय से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भौगोलिक संकेतों के स्वामित्व और संरक्षण के बारे में विवाद और कानूनी चुनौतियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। ऑस्ट्रेलिया के मामले में भारत ने फरवरी 2023 में ऑस्ट्रेलिया के संघीय न्यायालय का रुख किया है और तब से मामला लंबित है।

ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के अलावा, यूरोपीय संघ (ईयू) भी जून 2018 से भारत को बासमती के लिए जीआई टैग प्रदान करने में अपने कदम पीछे खींच रहा है। हालांकि, जल्द ही चीजें बदल सकती हैं क्योंकि भारत और ईयू जीआई टैग प्रदान करने के लिए द्विपक्षीय समझौते में प्रवेश करने की संभावना है, जिसमें नई दिल्ली बासमती चावल को तरजीह देने के बदले में इसे ईयू के पनीर और वाइन तक बढ़ाएगी।

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