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खेती में बदलाव की कहानी: 10 साल में 26% बढ़ी बागवानी, अनाज पीछे क्यों छूटा?

पिछले 10 सालों में देश में बागवानी फसलों का रकबा 26% बढ़ा है, जबकि अनाज की खेती की रफ्तार धीमी रही। बेहतर दाम, ज्यादा आमदनी और लोगों की बदलती खानपान आदतों के कारण किसान तेजी से फल और सब्ज़ियों की खेती

Pooja Rai

Pooja Rai·21 Jan 2026· 4 min read

खेती में बदलाव की कहानी: 10 साल में 26% बढ़ी बागवानी, अनाज पीछे क्यों छूटा?

खेती में बदलाव की कहानी: 10 साल में 26% बढ़ी बागवानी, अनाज पीछे क्यों छूटा?

पिछले 10 सालों में देश में बागवानी फसलों का रकबा 26% बढ़ा है, जबकि अनाज की खेती की रफ्तार धीमी रही। बेहतर दाम, ज्यादा आमदनी और लोगों की बदलती खानपान आदतों के कारण किसान तेजी से फल और सब्ज़ियों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। इससे खेती का रुझान अब उच्च मूल्य वाली फसलों की तरफ साफ दिखने लगा है।

भारत की खेती में एक बड़ा लेकिन धीरे-धीरे होने वाला बदलाव देखने को मिल रहा है। किसान अब गेहूं-धान जैसे अनाज की बजाय फल और सब्ज़ियों की खेती की ओर ज्यादा झुक रहे हैं। फल और सब्ज़ियों से आमदनी ज्यादा मिलना इसकी मुख्य वजह बताई जा रही है।

फल-सब्ज़ियों का रकबा तेज़ी से बढ़ा
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2014-15 से 2024-25 के बीच फल-सब्ज़ियों (बागवानी) का रकबा हर साल औसतन 1.66% बढ़ा है जबकि अनाज का रकबा सिर्फ 1.08% बढ़ पाया है। इस दौरान बागवानी फसलों की खेती में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। साल 2014-15 से 2024-25 के बीच फलों की खेती का रकबा करीब 17%, सब्ज़ियों का लगभग 23% और कुल बागवानी फसलों का रकबा 26% बढ़ा है। इसके मुकाबले अनाज की खेती का रकबा सिर्फ 10% ही बढ़ पाया है।

अनाज की खेती की बढ़ोतरी सिर्फ 1.57% सालाना
पिछले पांच सालों में भी यही रुझान बना रहा है और 2014-15 के बाद बागवानी की रफ्तार और तेज हुई है। इस दौरान फलों की खेती हर साल औसतन 1.15%, सब्ज़ियों की 2.56% और कुल बागवानी फसलों की 2.17% की दर से बढ़ी, जबकि अनाज की खेती की बढ़ोतरी सिर्फ 1.57% सालाना रही।

वजह ज़्यादा आमदनी
बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक इस बदलाव की बड़ी वजह यह है कि फल और सब्ज़ियों से किसानों को अनाज के मुकाबले ज्यादा आमदनी मिलती है। नीति आयोग के सदस्य और कृषि अर्थशास्त्री रमेश चंद के अध्ययन के अनुसार, 2014-15 से 2023-24 के बीच अनाज से होने वाली आमदनी की सालाना बढ़ोतरी सिर्फ 2.36% रही, जबकि फलों में यह 3.68% और सब्ज़ियों में 2.77% रही। खाद्यान्न फसलों में अनाज की वृद्धि सबसे कम पाई गई।इसके अलावा चारा और घास जैसी फसलों से होने वाली आमदनी में सबसे तेज, करीब 7.39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह पशुपालन के तेजी से बढ़ते उत्पादन से जुड़ा हुआ है, जो पिछले वर्षों में और मजबूत हुआ है।

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बदलती खान-पान की आदतें भी वजह
फल-सब्ज़ियों की मांग बढ़ने की एक बड़ी वजह लोगों की बदलती खाने-पीने की आदतें भी हैं। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार लोग अब सिर्फ अनाज पर निर्भर नहीं हैं। इसलिए फल, सब्ज़ियां, दालें, दूध-मांस और प्रोसेस्ड फूड की खपत बढ़ रही है। यह बदलाव गांव और शहर—दोनों जगह देखने को मिल रहा है।

भविष्य में मांग और बढ़ेगी
रिपोर्ट के अनुमान बताते हैं कि आने वाले वर्षों में फल और सब्ज़ियों की मांग और तेज़ी से बढ़ने वाली है। वर्ष 2047-48 तक सब्ज़ियों की मांग 365 से 417 मिलियन टन के बीच पहुँच सकती है, जबकि फलों की मांग 233 से 283 मिलियन टन तक बढ़ने का अनुमान है। अगर देश की आर्थिक विकास दर तेज़ रहती है, तो खाने-पीने की चीज़ों की कुल मांग में इससे भी ज़्यादा बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, मौजूदा उत्पादन की बात करें तो 2024-25 के ताज़ा अनुमानों के अनुसार भारत में फलों का उत्पादन लगभग 115 मिलियन टन और सब्ज़ियों का उत्पादन करीब 220 मिलियन टन रहा है, जो भविष्य की संभावित मांग के मुकाबले काफी कम है।

मतलब भारत की खेती अब धीरे-धीरे कम मुनाफे वाले अनाज से हटकर ज्यादा कमाई देने वाली फल-सब्ज़ियों और पशुपालन की ओर बढ़ रही है। यही वजह है कि आने वाले वर्षों में बागवानी खेती का महत्व और बढ़ने वाला है।

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