त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले देश में चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। कारोबारियों और चीनी उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक महीने में थोक चीनी के दाम करीब 10 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। उनका कहना है कि अगले तीन महीनों तक कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, क्योंकि बाजार में आपूर्ति सीमित है और त्योहारों के चलते मांग लगातार बढ़ रही है।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर, जो चीनी का प्रमुख व्यापारिक केंद्र है, वहां थोक चीनी का भाव बढ़कर 4,716 रुपये प्रति 100 किलोग्राम पहुंच गया है। यह पिछले एक महीने की तुलना में करीब 10.2 फीसदी अधिक है।
इस वजह से बढ़ी चीनी की खपत
व्यापारियों का कहना है कि गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों से पहले मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। इसी वजह से चीनी की खपत भी बढ़ रही है। दूसरी ओर, कई चीनी मिलें सीमित मात्रा में चीनी बाजार में उतार रही हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।
उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, बिस्कुट, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक और पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियां भी भविष्य में कमी से बचने के लिए अभी से बड़ी मात्रा में चीनी खरीद रही हैं। इससे बाजार में मांग और बढ़ गई है।
उत्पादन घरेलू खपत के मुकाबले कम रहा
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा चीनी सीजन में उत्पादन घरेलू खपत के मुकाबले कम रहा है। साथ ही भारत ने करीब 8 लाख टन चीनी का निर्यात भी किया, जिससे स्टॉक पर दबाव बढ़ा। अनुमान है कि 1 अक्टूबर को नए चीनी सीजन की शुरुआत में मिलों के पास केवल 35 लाख टन चीनी का भंडार बचेगा, जो पिछले तीन दशक में सबसे कम स्तर हो सकता है।
नवंबर से सुधार की उम्मीद
कारोबारियों का मानना है कि बाजार में आपूर्ति की स्थिति में सुधार नवंबर से शुरू होगा, जब नई गन्ना फसल की पेराई शुरू होगी। तब तक चीनी की कीमतों में बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है।
चीनी निर्यात पर है रोक
चीनी की बढ़ती कीमतों का असर महंगाई पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि केंद्र सरकार पहले ही चीनी निर्यात पर रोक लगा चुकी है और बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए स्टॉक लिमिट जैसे कदम भी उठा चुकी है।
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