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पूर्वोत्तर में रबी मौसम में मूंगफली की खेती, किसानों के लिए ICAR की जरूरी सलाह

रबी सीजन में मूंगफली की बुवाई नवंबर मध्य से दिसंबर की शुरुआत तक करनी चाहिए। अच्छी किस्मों में TAG-73, कदरी लेपाक्षी और GG-39 शामिल हैं। बीज उपचार, संतुलित खाद, 5–6 सिंचाई और सही समय पर कीट-रोग नियंत्र

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Pooja Rai· Correspondent

28 नवंबर 2025· 2 min read

पूर्वोत्तर में रबी मौसम में मूंगफली की खेती, किसानों के लिए ICAR की जरूरी सलाह

पूर्वोत्तर में रबी मौसम में मूंगफली की खेती, किसानों के लिए ICAR की जरूरी सलाह

रबी सीजन में मूंगफली की बुवाई नवंबर मध्य से दिसंबर की शुरुआत तक करनी चाहिए। अच्छी किस्मों में TAG-73, कदरी लेपाक्षी और GG-39 शामिल हैं। बीज उपचार, संतुलित खाद, 5–6 सिंचाई और सही समय पर कीट-रोग नियंत्रण से उत्पादन और किसानों की आमदनी बढ़ती है।

पूर्वोत्तर पहाड़ी क्षेत्रों (NEH Region) में रबी सीजन के दौरान मूंगफली की खेती किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बन सकती है। इस सीजन में मूंगफली की बुवाई मध्य नवंबर से लेकर शुरुआती दिसंबर तक की जाती है। जहां सिंचाई की सुविधा मौजूद हो, वहां किसान मार्च तक गर्मियों में भी बुवाई कर सकते हैं।

कौन-कौन सी किस्में बेहतर रहेंगी?
ICAR के मुताबिक TAG–73, Kadiri Lepakshi (K-1812) और GG–39 जैसी किस्में सबसे अच्छा प्रदर्शन करती हैं।पूर्वोत्तर क्षेत्र में यह फसल खेती की डायवर्सिफिकेशन और स्थिर आय का अच्छा साधन बन रही है।

बीज और बुवाई का सही तरीका
अच्छी पैदावार के लिए प्रति हेक्टेयर 100–120 किलो बीज की जरूरत होती है।बुवाई करते समय पौधों की दूरी 30×10 सेमी रखें।बीजों को बोने से पहले इन्हें ज़रूर ट्रीट करें—

ट्राइकोडर्मा → 4 ग्राम/किलो बीज
या

कार्बेन्डाजिम → 2 ग्राम/किलो बीज
इसके बाद राइजोबियम कल्चर का लेप लगाना ज़रूरी है, ताकि पौधों में नाइट्रोजन बनाने की क्षमता बढ़े और फसल मजबूत हो।

खाद और पोषण प्रबंधन
जमीन तैयार करते समय किसान इस मात्रा में खाद दें— नाइट्रोजन : 20 kg/ha, फॉस्फोरस : 40 kg/ha और पोटाश : 40 kg/ha । इसके साथ ही 500 किलो जिप्सम प्रति हेक्टेयर बुवाई के समय डालना बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि यह दानों के बनने की प्रक्रिया को मजबूत करता है।

ये भी पढ़ें - पंजाब का रणसिंह कलां गांव बना पराली रहित खेती का मॉडल

सिंचाई कब और कितनी करें?
मूंगफली की फसल को कुल 5–6 बार सिंचाई की जरूरत होती है।इसमें दो स्टेज सबसे महत्वपूर्ण हैं। एक फूल आने का समय और दूसरा फली (पॉड) बनने का समय।इन दो चरणों में पानी की कमी से उत्पादन कम हो सकता है।

खरपतवार और कीट नियंत्रण
20 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई और मिट्टी चढ़ाना (Earthing up) ज़रूर करें। इससे पौधे मजबूत बनते हैं।
चूसक कीटों के नियंत्रण के लिए: डाइमेथोएट या इमिडाक्लोप्रिड
टिका रोग (Leaf spot) के लिए: क्लोरोथैलोनिल या मैनकोज़ेब

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