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नकली कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री पर लगाम की मांग, सरकार से उद्योग की अपील

कीटनाशक उद्योग ने सरकार से मांग की है कि पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल, 2025 में ऐसे सख्त और स्पष्ट नियम हों, जिससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नकली कीटनाशकों की बिक्री रोकी जा सके। उद्योग का कहना है कि बिना लाइस

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Pooja Rai· Correspondent

22 जनवरी 2026· 3 min read

नकली कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री पर लगाम की मांग, सरकार से उद्योग की अपील

नकली कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री पर लगाम की मांग, सरकार से उद्योग की अपील

कीटनाशक उद्योग ने सरकार से मांग की है कि पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल, 2025 में ऐसे सख्त और स्पष्ट नियम हों, जिससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नकली कीटनाशकों की बिक्री रोकी जा सके। उद्योग का कहना है कि बिना लाइसेंस गोदामों और कमजोर निगरानी के कारण किसानों तक नकली उत्पाद पहुंच रहे हैं, जो फसल और सुरक्षा के लिए खतरा हैं। यह मांग मुनाफे से ज्यादा किसानों की सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और उत्पादों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

भारत का करीब 66 हजार करोड़ रुपये का कीटनाशक उद्योग चाहता है कि सरकार पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल, 2025 में ऐसे साफ और सख्त नियम बनाए, जिससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नकली कीटनाशकों की बिक्री रोकी जा सके।
फिलहाल बाजार में नकली कीटनाशकों के कारोबार को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। कुछ आकलन इसे 250 करोड़ रुपये का बताते हैं, तो कुछ के अनुसार यह 5,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का हो सकता है।

उद्योग संगठन ने क्या कहा?
उद्योग संगठन क्रॉपलाइफ इंडिया के चेयरमैन अंकुर अग्रवाल ने बताया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक रहे कीटनाशकों की असली होने की पहचान और उनकी ट्रैकिंग (पता लगाना) मुश्किल हो रही है। इसलिए सरकार को नए बिल और उसके नियमों में ऑनलाइन बिक्री को लेकर स्पष्ट प्रावधान करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि सिर्फ सामान्य जांच अब काफी नहीं है। ऑनलाइन कीटनाशक बेचने के लिए अनिवार्य अनुमति और लाइसेंस होना जरूरी है, लेकिन कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म इस नियम को सही तरह से लागू नहीं कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उद्योग ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ नहीं है, बल्कि सही नियमों की मांग कर रहा है।

ये भी पढ़ें - किसानों से लेकर महिलाओं तक को फायदा, ई-रेडिएशन सेंटर से बढ़ा निर्यात और रोजगार

डिजिटल बिक्री से बढ़ी चुनौती
अंकुर अग्रवाल के मुताबिक, जैसे-जैसे देश में डिजिटल लेन-देन बढ़ेगा, वैसे-वैसे कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री भी बढ़ेगी। चूंकि कीटनाशक एक नियंत्रित (रेगुलेटेड) उत्पाद है, इसलिए इसकी पूरी सप्लाई चेन को नियमों के तहत चलना चाहिए।
बिज़नेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक क्रॉपलाइफ इंडिया ने बताया कि कुछ ऑनलाइन मॉडल में कीटनाशकों को ऐसे गोदामों में रखा और भेजा जा रहा है, जिनके पास जरूरी लाइसेंस नहीं है। जबकि ऑफलाइन बाजार में यही काम लाइसेंस के बिना नहीं किया जा सकता। इससे निगरानी कमजोर होती है और नकली या गैरकानूनी उत्पादों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

मुनाफे से ज्यादा किसानों की सुरक्षा अहम
अंकुर अग्रवाल ने कहा कि अगर ऑनलाइन नकली बिक्री पर रोक लगती है, तो उद्योग की आमदनी में 1 प्रतिशत से भी कम का इजाफा होगा। लेकिन मुद्दा पैसा नहीं, बल्कि किसानों की सुरक्षा और सही उत्पाद तक उनकी पहुंच है। नकली कीटनाशक किसानों की फसल, सेहत और खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।उन्होंने बताया कि कई कंपनियों ने बिना अनुमति कीटनाशक बेचने पर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को कानूनी नोटिस भेजे हैं और कुछ मामलों में कोर्ट ने ऐसे उत्पादों की लिस्टिंग हटाने का आदेश भी दिया है।अंकुर अग्रवाल के अनुसार, भारत से कीटनाशकों का निर्यात करीब 40 हजार करोड़ रुपये का है और उम्मीद है कि आने वाले 10 वर्षों में यह उद्योग 8–9 प्रतिशत की सालाना दर से आगे बढ़ेगा।

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