Skip to content
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • साक्षात्कार
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
सहयोग करें
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • साक्षात्कार
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
सहयोग करें
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. एग्री बुलेटिन
  3. देश में वित्तीय संकट से जूझ रही है प्राकृतिक रूप से रंगीन कपास की खेती
एग्री बुलेटिन

देश में वित्तीय संकट से जूझ रही है प्राकृतिक रूप से रंगीन कपास की खेती

भारत में प्राकृतिक रूप से रंगीन कपास की खेती वैश्विक मांग और दशकों से चल रहे सरकारी शोध प्रयासों के बावजूद मुश्किल दौर से गुजर रही है। यह व्यवसाय 1940 के दशक में तेजी से बढ़ रहा था। हालांकि, इस समय यह

NP

Pooja Rai· Correspondent

21 जुलाई 2025· 2 min read

agricultureagriculture newscoloured cotton
देश में वित्तीय संकट से जूझ रही है प्राकृतिक रूप से रंगीन कपास की खेती

देश में वित्तीय संकट से जूझ रही है प्राकृतिक रूप से रंगीन कपास की खेती

भारत में प्राकृतिक रूप से रंगीन कपास की खेती वैश्विक मांग और दशकों से चल रहे सरकारी शोध प्रयासों के बावजूद मुश्किल दौर से गुजर रही है। यह व्यवसाय 1940 के दशक में तेजी से बढ़ रहा था। हालांकि, इस समय यह विशेष फसल कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में केवल 200 एकड़ में उगाई जाती है।

वर्तमान में देश में रंगीन कपास की कीमत 240 रुपये प्रति किलोग्राम है, जो सामान्य कपास (160 रुपये प्रति किलोग्राम) से 50 प्रतिशत अधिक है। लेकिन किसान कम पैदावार के कारण इसकी खेती करने से हिचकिचा रहे हैं।

आईसीएआर-केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरसीओटी) के प्रमुख वैज्ञानिक अशोक कुमार ने पीटीआई को बताया कि हल्के भूरे रंग के कपास की उत्पादकता बहुत कम यानी 1.5-2 क्विंटल प्रति एकड़ है, जबकि सामान्य कपास की उत्पादकता 6-7 क्विंटल प्रति एकड़ है। इसलिए किसान इस फसल की अधिक खेती नहीं करते हैं।

उत्पादकता बढ़ाने पर शोध की जरूरत
भारत में रंगीन कपास की खेती 2500 ईसा पूर्व से हो रही है। इसमें लाल, खाकी और भूरी किस्में शामिल थीं। हरित क्रांति के दौरान उच्च उपज देने वाली सफेद कपास की किस्मों पर जोर देने से रंगीन कपास हाशिये पर चला गया। हालांकि कृषि वैज्ञानिक इस समय हल्के भूरे रंग के कपास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें - बीजों पर अनुदान, फसल की MSP पर खरीदी…योगी सरकार कम बारिश वाले क्षेत्रों में बाजरा की खेती को कर रही है प्रोत्साहित

रंगीन कपास क्यों है महत्वपूर्ण?
रंगीन कपास के पर्यावरणीय लाभ महत्वपूर्ण हैं। पारंपरिक कपास रंगाई में प्रति मीटर कपड़े के लिए लगभग 150 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जबकि प्राकृतिक रूप से रंगीन कपास इस जरूरत को खत्म कर देता है। साथ ही विषाक्त अपशिष्ट निपटान लागत में 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।

रंगीन कपास की बढ़ रही है मांग
वैज्ञानिक अशोक कुमार ने कहा कि प्राकृतिक रूप से रंगीन कपास में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। उत्पादन और मूल्यवर्धन बढ़ाने के लिए और अधिक सरकारी सहायता की जरूरत है।उन्होंने बताया कि उत्पादन कम होने और बाजार की कमी के कारण कोई भी उन्नत किस्में विकसित नहीं कर पा रहा है। पर्यावरण के प्रति जागरूक ब्रांड, खासकर यूरोप, अमेरिका और जापान में रंगीन कपास की मांग बढ़ रही है। इस क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया और चीन पारंपरिक प्रजनन और आनुवंशिक इंजीनियरिंग का उपयोग करके अनुसंधान में भारी निवेश कर रहे हैं।

ये देखें -

News Potli.
Clip & Share
“

— देश में वित्तीय संकट से जूझ रही है प्राकृतिक रूप से रंगीन कपास की खेती

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
NP

About the Author

Pooja Rai

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें.

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 फ़र॰ 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·2 min
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs