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खरीफ फसलों की बुआई में पिछड़ा बिहार और झारखंड, दलहन का रकबा बढ़ा

कृषि मंत्रालय के जारी आंकड़ों के अनुसार देश में पिछले साल के मुकाबले इस साल खरीफ(kharif crops) फसलों की बुआई अधिक हुई है। आंकड़े बताते हैं की जुलाई महीने के तीसरे सप्ताह के अंत तक पिछले साल के मुकाबले

Pooja Rai

Pooja Rai·29 Jul 2024· 6 min read

खरीफ फसलों की बुआई में पिछड़ा बिहार और झारखंड, दलहन का रकबा बढ़ा

खरीफ फसलों की बुआई में पिछड़ा बिहार और झारखंड, दलहन का रकबा बढ़ा

कृषि मंत्रालय के जारी आंकड़ों के अनुसार देश में पिछले साल के मुकाबले इस साल खरीफ फसलों(kharif crops) की बुआई अधिक हुई है। आंकड़े बताते हैं की जुलाई महीने के तीसरे सप्ताह के अंत तक पिछले साल के मुकाबले इस साल 23.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में अधिक बुआई हो चुकी है। लेकिन झारखंड और बिहार में खरीफ फसलों(kharif crops) के बुआई की स्थिति सही नहीं है।

धान खरीफ सीजन की प्रमुख फसल है। जिसकी बुआई ज्‍यादातर राज्यों में मानसून की बारिश पर निर्भर करती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 19 जुलाई 2024 तक धान का रकबा 166.06 लाख हेक्टेयर था, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 155.65 लाख हेक्टेयर था। यानी कि जुलाई के तीसरे सप्ताह तक देश में पिछले साल के मुकाबले 10.41 लाख हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में धान लगाई जा चुकी है। देश में सामान्य तौर पर 401.55 लाख हेक्टेयर में धान लगाई जाती है। सामान्य क्षेत्रफल का मतलब साल 2018-19 से लेकर 2022-23 के बीच धान के रकबे के एवरेज से है।

डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक कृषि मंत्रालय के अनुसार जून के प्रथम सप्ताह तक बुआई पिछड़ रही थी। लेकिन अब बुआई के आंकड़े बढ़ते नजर आ रहे हैं जो कि अच्छी खबर। जारी आंकड़े बताते हैं कि 19 जुलाई 2024 तक देश में 704.04 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस सप्ताह तक 680.36 लाख हेक्टेयर में फसल लगी थी। लेकिन दो राज्य झारखंड व बिहार ऐसे हैं, जहां बुआई का आंकड़ा अभी भी काफी कम है। खास बात यह है कि झारखंड व बिहार में बहुत बड़ा इलाका ऐसा है, जहां सिंचाई के साधन न होने के कारण केवल खरीफ सीजन में ही फसल लगाई जाती है।

दलहन का रकबा 7% बढ़ा

इसके अलावा दलहन की फसलों की बुआई पिछले साल 155.65 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस साल में 19 जुलाई तक 166.06 लाख हेक्टेयर में दलहन की फसलें लगाई गई हैं। जो पिछले साल से 15.64 लाख हेक्टेयर अधिक है। मतलब की मोटा मोटी देखा जाये तो 10% बढ़ा है। वहीं खरीफ सीजन की तीसरी महत्वपूर्ण फसल तिलहन का रकबा भी पिछले साल के मुकाबले इस साल बढ़ चुका है। पिछले साल 150.91 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस साल 163.11 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुआई हो चुकी है। जो 12.20 लाख अधिक हेक्टेयर अधिक है।

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मोटा अनाज में अभी सुधार नहीं

केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि मोटा अनाज यानी श्री अन्न जैसे ज्वार, बाजार, रागी, मक्का अधिक की पैदावार बढ़ाई जाए। इसके लिए अलग-अलग राज्य सरकारें योजनाएं भी चला रहीं है। लेकिन अभी तक पिछले साल के मुकाबले इस साल इसके रकबे में गिरावट देखने को मिली है। पिछले साल जुलाई के तीसरे सप्ताह तक देश में 134.91 लाख हेक्टेयर में श्री अन्न व मोटे अनाज की फसलें लग चुकी थी। लेकिन इस साल 123.72 लाख हेक्टेयर में ही फसलें लगी हैं।

कपास के रकबा में 7 % की कमी

कपास देश के प्रमुख खरीफ फसलों में से एक है। इसकी बुआई पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कुछ हिस्से में की जाती है। देश में इसकी बुआई पर भी कमजोर मानसून और कपास में लगने वाली गुलाबी सुंडी रोग का बुरा असर पड़ा है। जिससे इसके रकबे में कमी देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार कपास का रकबा 26 जुलाई तक 6.9 प्रतिशत घटकर 105.73 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि एक साल पहले यह 113.54 लाख हेक्टेयर था।

गन्ने का रकबा लगभग पूरा

देश में गन्ने का उत्पादन सबसे ज्‍यादा उत्तर प्रदेश में होता है। इस साल गन्ने की बुआई की बात करें तो यह एक साल पहले के 57.05 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 57.68 लाख हेक्टेयर हो गया है।

बिहार-झारखंड की ये है तस्वीर

देश के दो प्रमुख राज्य खरीफ बुआई के मामले में पिछड़ गए हैं। झारखंड में तो इस साल लगातार तीसरी बार सूखा का असर देखने को मिल रहा है। धान झारखंड की प्रमुख फसल है और सरकार का लक्ष्य था कि इस साल 18 लाख हेक्टेयर में धान लगाई जाएगी। लेकिन अब तक के हालात बताते हैं कि यह लक्ष्य पाना बहुत मुश्किल है। झारखंड में 24 जुलाई 2024 तक सामान्य से 47 प्रतिशत कम बारिश हुई है। कृषि मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 19 जुलाई 2024 तक झारखंड में 1.026 लाख हेक्टेयर में धान लगाई गई है, जबकि इस सप्ताह तक सामान्य तौर पर 3.455 लाख हेक्टेयर में धान लगाई जाती है। पिछले साल भी बारिश न होने के कारण धान की रोपाई काफी कम हुई थी, लेकिन इस साल के मुकाबले पिछले साल भी ज्यादा रोपाई हो चुकी थी। पिछले साल अब तक 1.478 लाख हेक्टेयर में धान लगाई जा चुकी थी।

दलहन व तिलहन के मामले में भी झारखंड की स्थिति सही नहीं है। दलहन का रकबा 24 जुलाई 2024 तक सामान्य तौर पर 1.508 लाख हेक्टेयर रहता है, लेकिन इस साल अब तक 0.740 लाख हेक्टेयर यानी लगभग आधा ही है। यहाँ तिलहन की बुआई कम मात्र में होती है, लेकिन इसमें भी गिरावट दर्ज की गई है। जैसे कि इस साल का लक्ष्य 60 हजार हेक्टेयर का था, लेकिन अब तक 10 हजार हेक्टेयर ही तिलहन की फसलें लग पाई हैं।

वहीं बिहार की बात करें तो यहां भी धान खरीफ सीजन की प्रमुख फसल है। चालू सीजन में बिहार सरकार ने 36.605 लाख हेक्टेयर में धान लगाने का लक्ष्य रखा था। लेकिन 8.686 लाख हेक्टेयर में ही धान लग पाई है। पिछले साल अब तक 12.270 लाख हेक्टेयर में धान की फसल लग चुकी थी। और अगर जुलाई के तीसरे सप्ताह तक धान का सामान्य रकबे की बात करें तो यह 14.174 लाख हेक्टेयर रहता है। दलहन की फसल अब तक यहां 27 हजार 900 हेक्टेयर में ही लगी हैं।और तिलहन की फसल का साामान्य रकबा 26 हजार हेक्टेयर रहता है, लेकिन मात्र 4 हजार हेक्टेयर में ही तिलहन की फसल लग पाई है। इसका मुख्य कारण मॉनसून सीजन में होने वाली बारिश है क्योंकि बिहार में 24 जुलाई तक सामान्य से 29 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

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