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पुलिस ने किसानों को शंभू बॉर्डर पर रोका, 8 दिसंबर को फिर निकलेगा जत्था, किसान नेताओं का ऐलान

आज दोपहर 1 बजे आंदोलनरत किसान शंभु बॉर्डर से दिल्ली कूच के लिए निकले लेकिन पुलिस कड़े इंतज़ाम के तहत उन्हें रोकने में कामयाब रही। इसी बीच आंदोलनरत किसानों और पुलिस के बीच काफ़ी झड़प भी हुई। किसानों को

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Pooja Rai· Correspondent

6 दिसंबर 2024· 4 min read

पुलिस ने किसानों को शंभू बॉर्डर पर  रोका, 8 दिसंबर को फिर निकलेगा जत्था, किसान नेताओं का ऐलान

पुलिस ने किसानों को शंभू बॉर्डर पर रोका, 8 दिसंबर को फिर निकलेगा जत्था, किसान नेताओं का ऐलान

आज दोपहर 1 बजे आंदोलनरत किसान शंभु बॉर्डर से दिल्ली कूच के लिए निकले लेकिन पुलिस ने कड़े इंतज़ाम के तहत किसानों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसी बीच आंदोलनरत किसानों और पुलिस के बीच काफ़ी झड़प भी हुई। किसानों को दिल्ली कूच से रोकने के लिए पुलिस को आंशू गैस के गोले दागने पड़े, जिसमें 7 किसानों के घायल होने की भी खबर है। जिसके बाद किसान नेताओं ने जत्थे को वापस बुला लिया। आपको बता दें कि MSP समेत अपनी अन्य माँगों को लेकर 101 किसानों का जत्था दिल्ली कूच करने वाला था।ये किसान शंभु बॉर्डर पर पिछले 298 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं।

किसान नेता डल्लेवाल ने मीडिया से कहा
मीडिया को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पहले केंद्र सरकार कहती थी कि उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से आपत्ति है इसलिए किसान बिना ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के दिल्ली आ सकते हैं लेकिन जब आज 101 किसानों का जत्था शम्भू बॉर्डर से दिल्ली की तरफ चला तो उनके ऊपर आंसू गैस के गोले दागे गए और केमिकल स्प्रे का इस्तेमाल किया गया, पुलिस की हिंसात्मक कारवाई में 7 किसान घायल हुए हैं।
उन्होंने कहा कि खनौरी बॉर्डर से तो जत्थों का दिल्ली जाने का कोई कार्यक्रम नहीं है लेकिन उसके बावजूद खनौरी बॉर्डर से उचाना तक 3 जगहों पर पुलिस द्वारा भारी बैरिकेडिंग करी गयी है और हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती करी गयी है जिस से आम लोगों को बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है। किसान नेताओं ने कहा कि खनौरी और शम्भू मोर्चों पर लगातार मजबूती बढ़ाई जा रही है और दोनों मोर्चों के नेता बातचीत कर के आगामी रणनीति का ऐलान करेंगे। किसान नेताओं ने कहा कि सभी किसान अलर्ट मोड में रहे और मोर्चों पर मजबूती बनाए रखें।

ये भी पढ़ें -किसानों का उपराष्ट्रपति धनखड़ को खत- MSP कानून और स्वामीनाथन आयोग को लेकर सरकारों के वादों की दिलाई याद

“हम कृषि मंत्री से बातचीत करना चाहते हैं”-किसान नेता सरवन सिंह पंढेर
शंभू बॉर्डर पर आज किसानों के जत्थे को यूनियन के नेताओं ने वापस बुला लिया। किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि हरियाणा पुलिस की कार्रवाई में 7 किसान जख्मी हुए हैं। पंढेर ने यह भी बताया कि किसानों का जत्था अब शनिवार को भी नहीं निकलेगा बल्कि किसान अब रविवार को 12 बजे दिल्ली के लिए कूच करेंगे।

उन्होंने बताया कि 2 किसान गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री बोलते थे कि किसान ट्रैक्टर से आते हैं, लेकिन आज हम पैदल जा रहे थे। आज अगर दिल्ली जा सकते तो पीएम मोदी से जरूर सवाल पूछते। जिस तरीके से हमारे ऊपर हमला हुआ है, यह हमारी नैतिक जीत है। हम कृषि मंत्री से बातचीत करना चाहते हैं।

लगायी गई 7 लेयर की सुरक्षा
आंदोलन कर रहे किसानों को दिल्ली दिल्ली कूच से रोकने के लिए हरियाणा पुलिस ने शंभु बॉर्डर पर कई लेयर की बैरिकेडिंग कर रखी थी। हरियाणा पुलिस ने अपनी सीमा में 7 लेयर की सुरक्षा लगाई है। आज किसानों ने कूच करने के दौरान इस सुरक्षा घेरा को तोड़ने की कोशिश की जिससे पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। जैसे ही किसानों का जत्था बैरिकेड्स पर पहुंचा, पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों को हटाने के लिए कई आंसू गैस के गोले दागे।

9 दिसंबर तक इंटरनेट सेवा बंद
किसान आंदोलन को देखते हुए अंबाला जिले में शंभू बार्डर के आसपास कई इलाकों में इंटनरेट सेवाएं बंद की गईं हैं। हरियाणा सरकार की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि कुछ किसान संगठनों द्वारा दिए गए दिल्ली कूच के आह्वान के मद्देनजर तनाव पैदा होने की आशंका है। इससे सार्वजनिक और निजी संपत्ति की क्षति और शांति बिगड़ने की आशंका है।

सरकारी आदेश में कहा गया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से झूठी अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट सेवाओं को बैन करने का फैसला किया गया है। मोबाइल इंटरनेट सेवा, एसएमएस सेवा और अन्य डोंगल सेवाओं पर 9 दिसंबर तक प्रतिबंध लगाया गया है।

किसानों की क्या है मांग?
MSP के अलावा किसान लोन माफी, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं, पुलिस मामलों को वापस लेने और 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को बहाल करना और 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा देना भी उनकी दो मांगें हैं।

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