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छत्तीसगढ़ से निकली पोषण वाली पहली चावल खेप, कोस्टा रिका को निर्यात

छत्तीसगढ़ से 12 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) की पहली खेप कोस्टा रिका भेजी गई है। यह निर्यात एपीडा (APEDA) के तहत किया गया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “कुपोषण मुक्त भारत” अभियान से जुड़

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Pooja Rai·Correspondent·05 Nov 2025· 3 min read

छत्तीसगढ़ से निकली पोषण वाली पहली चावल खेप, कोस्टा रिका को निर्यात

छत्तीसगढ़ से निकली पोषण वाली पहली चावल खेप, कोस्टा रिका को निर्यात

छत्तीसगढ़ से 12 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) की पहली खेप कोस्टा रिका भेजी गई है। यह निर्यात एपीडा (APEDA) के तहत किया गया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “कुपोषण मुक्त भारत” अभियान से जुड़ा कदम है।यह भारत की कृषि तकनीक और गुणवत्ता में प्रगति का प्रतीक है, जिससे किसानों और निर्यातकों को नए विदेशी बाजार और बेहतर दाम मिलने के अवसर बढ़ेंगे।

भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने छत्तीसगढ़ से 12 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (Fortified Rice Kernel - FRK) की पहली खेप कोस्टा रिका को भेजी है।यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “कुपोषण मुक्त भारत” के लक्ष्य और राष्ट्रीय पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan) की भावना से जुड़ा है।

क्या है फोर्टिफाइड चावल?
फोर्टिफाइड चावल यानी ऐसा चावल जिसमें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे ज़रूरी पोषक तत्व मिलाए जाते हैं।
इसे बनाने की प्रक्रिया में चावल के आटे को इन पोषक तत्वों के साथ मिलाकर छोटे-छोटे दाने तैयार किए जाते हैं, जो बिल्कुल सामान्य चावल जैसे दिखते हैं। बाद में इन्हें तय अनुपात में सामान्य चावल में मिलाया जाता है।इससे यह सुनिश्चित होता है कि हर व्यक्ति को अपने भोजन के साथ पूरा पोषण भी मिले। भारत सरकार की यह पहल अब वैश्विक स्तर पर अपनी जगह बना रही है।

भारत का ‘पोषण मिशन’ अब विश्व स्तर पर
भारत में फोर्टिफाइड चावल वितरण की शुरुआत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और मिड-डे मील (PM POSHAN) जैसी योजनाओं के जरिए हुई थी।अब जब यही पौष्टिक चावल कोस्टा रिका जैसे देशों तक पहुँच रहा है, तो यह भारत की फूड टेक्नोलॉजी, क्वालिटी कंट्रोल और न्यूट्रिशन इनोवेशन में बढ़ती क्षमता को दिखाता है।
यह पहल भारत को न केवल एक वैश्विक खाद्य आपूर्तिकर्ता, बल्कि एक “वैश्विक पोषण सहयोगी” (Global Nutrition Partner) के रूप में स्थापित कर रही है।

ये भी पढ़ें - ISMA की रिपोर्ट: इस बार 18% ज्यादा होगी चीनी की पैदावार

किसानों और निर्यातकों के लिए नए अवसर
फोर्टिफाइड चावल के निर्यात से भारतीय किसानों, मिल मालिकों और निर्यातकों को नए बाजारों में पहुंचने का मौका मिलेगा।
इससे उन्हें बेहतर दाम (Better Price Realisation), वैल्यू-ऐडेड प्रोडक्ट्स की मांग, और अंतरराष्ट्रीय पहचान दोनों मिलेंगे।
यह न केवल भारत के विदेशी व्यापार (Foreign Trade) को मजबूत करेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर भी बढ़ाएगा।

महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ का बढ़ता योगदान
फोर्टिफाइड चावल उत्पादन में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।छत्तीसगढ़ से रवाना हुई यह पहली खेप इस बात का संकेत है कि राज्य अब पोषण आधारित कृषि प्रसंस्करण (Nutrition-based Agri Processing) का केंद्र बन सकता है।

भारत बन रहा है ‘स्वस्थ चावल’ का दूत
APEDA, छत्तीसगढ़ सरकार और निजी कंपनियों के संयुक्त प्रयास से हुआ यह निर्यात भारत की सॉफ्ट पावर को भी बढ़ाता है — यानी स्वास्थ्य, पोषण और सतत विकास के क्षेत्र में भारत का वैश्विक नेतृत्व।भारत अब सिर्फ चावल का निर्यातक नहीं, बल्कि “स्वस्थ चावल का दूत” (Ambassador of Nutritious Rice) बन रहा है। यह पहल भविष्य में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के अन्य देशों के लिए भी नई साझेदारी और बाज़ारों के द्वार खोलेगी

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