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केला खेती में नवाचार के लिए Jain Irrigation को ICAR–NRCB ने दिया बड़ा सम्मान

जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड (JISL), जो कृषि-तकनीक नवाचारों और टिकाऊ खेती के समाधानों में विश्व स्तर पर अग्रणी है, को आईसीएआर-राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र (NCRB) ने अपने 32वें स्थापना दिवस और किसान

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Pooja Rai·Correspondent·22 Aug 2025· 4 min read

केला खेती में नवाचार के लिए Jain Irrigation को ICAR–NRCB ने दिया बड़ा सम्मान

केला खेती में नवाचार के लिए Jain Irrigation को ICAR–NRCB ने दिया बड़ा सम्मान

जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड (JISL), जो कृषि-तकनीक नवाचारों और टिकाऊ खेती के समाधानों में विश्व स्तर पर अग्रणी है, को आईसीएआर-राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र (NCRB) ने अपने 32वें स्थापना दिवस और किसान मेले के अवसर पर प्रतिष्ठित "स्मार्ट केला फार्म-टेक प्रमोशन अवार्ड" से सम्मानित किया।

आईसीएआर-राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र (एनआरसीबी) की स्थापना 21 अगस्त 1993 को तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु में आईसीएआर, नई दिल्ली के अधीन की गई थी। यह केंद्र भारत में केले और प्लैटेन की खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि के उद्देश्य से यह संस्थान बुनियादी और रणनीतिक अनुसंधान करता है तथा चार मुख्य क्षेत्रों—फसल सुधार, फसल उत्पादन, फसल सुरक्षा और कटाई-पश्चात प्रबंधन—पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है। नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और टिकाऊ उपायों को अपनाकर एनआरसीबी लगातार देश के केला उद्योग को सशक्त बना रहा है।

जैन इरिगेशन को मिला बड़ा सम्मान
यह सम्मान जैन इरिगेशन के उस बड़े योगदान को मान्यता देता है, जो उसने भारत और दुनिया भर में केले की खेती को बेहतर बनाने में दिया है। कई वर्षों से कंपनी ने खेती में बदलाव लाने वाले समाधान दिए हैं, जैसे– उच्च गुणवत्ता वाले टिशू कल्चर केले के पौधे, आधुनिक ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन तकनीक, साथ ही IoT आधारित निगरानी प्रणाली और मोबाइल से चलने वाले सिंचाई प्रबंधन उपकरण।

निर्यात लायक केले उगाने में जैन इरिगेशन का बड़ा योगदान
इन तकनीकों की मदद से जैन इरिगेशन ने खेत से लेकर बाज़ार तक पूरी कृषि व्यवस्था को मज़बूत किया है। इससे लाखों किसानों को बेहतर ज्ञान, नई तकनीक और अच्छे बाज़ार के अवसर मिले हैं। नतीजा यह हुआ कि किसानों की पैदावार और संसाधनों का बेहतर उपयोग हुआ, खेती ज़्यादा टिकाऊ बनी और किसानों की आमदनी व जीवन स्तर दोनों में सुधार आया।
जैन इरिगेशन एकमात्र ऐसी कंपनी है जिसने केले की ऐसी किस्में विकसित की हैं जिनका निर्यात किया जा रहा है और जो केले की खेती को देशव्यापी सफलता की कहानी बनाने में मदद कर रही हैं। अकेले वर्ष 2024-25 में, किसानों ने 759,760 मीट्रिक टन केले का निर्यात किया, जो लगभग 36,500 कंटेनरों के बराबर है, जिसमें जैन इरिगेशन की अग्रणी तकनीकों की केंद्रीय भूमिका रही। आज, जैन इरिगेशन के समाधानों से उत्पादित केले के पौधों को वैश्विक बाज़ारों में मान्यता प्राप्त है, जिससे भारत की एक प्रतिस्पर्धी और विश्वसनीय निर्यातक के रूप में स्थिति और मज़बूत हुई है।

ये भी पढ़ें - सुपारी विकास पर उच्चस्तरीय बैठक, वायरस अटैक के कारण सुपारी उत्पादक किसानों के नुकसान की होगी भरपाई

हर साल 15 करोड़ से ज़्यादा केले के पौधे होते हैं तैयार
इस सफलता के पीछे जलगाँव स्थित जैन हाई-टेक प्लांट फैक्ट्री है, जो दुनिया की सबसे बड़ी और उन्नत टिशू कल्चर सुविधा मानी जाती है। यहाँ हर साल 15 करोड़ से ज़्यादा केले के पौधे तैयार किए जाते हैं। यह जगह भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी टिकाऊ केले की खेती को मज़बूत आधार देती है।

इस मौके पर जैन इरिगेशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के.बी. पाटिल ने कहा:
"आईसीएआर-एनआरसीबी से स्मार्ट केला फार्म-टेक प्रमोशन अवार्ड पाकर हम बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं। यह पुरस्कार किसानों को सशक्त बनाने, खेती को टिकाऊ बनाने और लगातार नई तकनीक लाने की हमारी कोशिशों का नतीजा है। यह सम्मान सिर्फ जैन इरिगेशन का नहीं, बल्कि उन सभी किसानों का है जिनके भरोसे ने हमें खेती का भविष्य बेहतर बनाने की प्रेरणा दी है।"

यह सम्मान इस बात की पुष्टि करता है कि जैन इरिगेशन परंपरा और तकनीक को जोड़कर ऐसे समाधान तैयार कर रहा है जो सस्ते, भरोसेमंद, टिकाऊ और निर्यात के योग्य हों। किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए कंपनी लगातार नई मिसालें कायम कर रही है ताकि किसान अधिक समझदारी से, पर्यावरण के अनुकूल और लाभदायक खेती कर सकें।

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