News Potli
न्यूज़ पोटलीभारत के किसानों और गाँवों की आवाज़
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  3. एडवाइजरीः पपीता के खेत में 24 घंटे से ज्यादा पानी का जलजमाव हुआ तो पौधे का बचना मुश्किल
ग्राउन्ड रिपोर्ट्स

एडवाइजरीः पपीता के खेत में 24 घंटे से ज्यादा पानी का जलजमाव हुआ तो पौधे का बचना मुश्किल

लगातार हो रही वर्षा पपीता उत्पादक किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। यदि पपीता के खेत समतल नही है। जल की निकास की सुविधा ठीक नहीं है और खेत में पानी 24 घंटे से ज्यादा लग गया तो पपीता के पौधों को बच

NP

Ashish·Correspondent·23 Sep 2023· 2 min read

एडवाइजरीः पपीता के खेत में 24 घंटे से ज्यादा पानी का जलजमाव हुआ तो पौधे का बचना मुश्किल

एडवाइजरीः पपीता के खेत में 24 घंटे से ज्यादा पानी का जलजमाव हुआ तो पौधे का बचना मुश्किल

डॉ. एस.के. सिंह (प्रधान अन्वेषक, अखिल भारतीय फल अनुसन्धान परियोजना) का फेसबुक पोस्ट

इस समय बिहार में लगातार हो रही वर्षा पपीता उत्पादक किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के मौसम विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा जारी सूचना के अनुसार कल शाम 4 बजे तक विगत 24 घंटों के दौरान 80.4 मिमी बारिश दर्ज की गई। मानसून के सक्रिय होने के कारण अगले 24-36 घंटों के दौरान मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इसके बाद वर्षा की तीव्रता कम हो जाएगी, जिससे छिटपुट हल्की वर्षा होगी। कल शाम 4 बजे से आज सुबह 7 बजे तक 109.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। आज सुबह 7 बजे समाप्त हुए पिछले 24 घंटों के दौरान कुल 189.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। आज भी मानसून बहुत सक्रिय रहेगा और कल से धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाएगा। इसलिए, अगले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश की संभावना है।

बारिश के पानी में डूबा हुआ पपीते का बाग / PC- Prof. S.K. Singh's FB Post

लगातार हो रही वर्षा पपीता उत्पादक किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। यदि पपीता के खेत समतल नही है। जल की निकास की सुविधा ठीक नहीं है और खेत में पानी 24 घंटे से ज्यादा लग गया तो पपीता के पौधों को बचा पाना बहुत मुश्किल है। अतः उन्हें सलाह दी जाती है की लगातार अपने खेतों का भ्रमण करते रहे। पपीता के पौधों के आस पास किसी भी हालत में पानी लगने न दे। खेत से वर्षा के पानी को निकालते रहे। इसीलिए पपीता उत्पादक किसानों को सलाह दी जाती है कि पपीता को हमेशा मेड़ों पर लगाए एवं इस तरह के वर्षा के पानी को नालियों के माध्यम से खेत से निकलने की व्यवस्था करें।

आम के बाग पर प्रो. एस के सिंह का लेख यहां पढ़ेंः आम के बाग में फल तोड़ने के बाद और मंजर/बोर आने से पहले क्या करें?

यह समय पपीता उत्पादक किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है..... यदि तत्काल खेत से पानी नहीं निकाला गया तो पपीता को बचाना असंभव है।

लेखकः

डॉ एसके सिंह
प्रोफ़ेसर सह मुख्य वैज्ञानिक (पौधा रोग) एवं
विभागाध्यक्ष, पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ प्लांट पैथोलॉजी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय , पूसा , समस्तीपुर, बिहार

ईमेल ID- sksraupusa@gmail.com और sksingh@rpcau.ac.in

News Potli.
Clip & Share
“

— एडवाइजरीः पपीता के खेत में 24 घंटे से ज्यादा पानी का जलजमाव हुआ तो पौधे का बचना मुश्किल

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
Advisorykheti kisaniNews Potlipapayauttar pradeshखेती किसानीपपीताबिहार
NP

About the Author

Ashish

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें

यह तस्वीर बिहार के पश्चिमी चंपारण के एक गांव की है, जो पूरी तरह से बाढ़ में डूबा हुआ है।
ग्राउन्ड रिपोर्ट्स

बिहार बाढ़: तीन महीने से पानी में घिरे गांवों की स्थिति कैसी है?

पश्चिमी चंपारण (बिहार) बाढ़ ने इस बार बिहार में भीषण तबाही मचाई है। ये ग्राउंड रिपोर्ट बिहार में पश्चिमी चंपारण के उन गांवों से हैं जहां तीन-तीन बार बाढ़ आई है पूरा इलाका सवा तीन महीन से पानी से घिरा है।

News Potli·05 Oct 2026
चूल्हा-चौका से खेती और कारोबार तक, अकोला की महिलाओं ने ऐसे बदली अपनी पहचान
ग्राउन्ड रिपोर्ट्स

चूल्हा-चौका से खेती और कारोबार तक, अकोला की महिलाओं ने ऐसे बदली अपनी पहचान

महाराष्ट्र में अकोला जिले के राजंदा और पिलकवाड़ी गांव महिलाओं को कुछ साल पहले तक सिर्फ चूल्हा-चौका तक सीमित समझा जाता है, गांव के पुरुषों को लगता था कि, खेती महिलाओं के बस की बात नहीं हैं, लेकिन वही पुरुष आज खेती से लेकर हर बड़े फैसले में अब उनकी राय लेते हैं। महिलाएं अब खुद की कंपनी चला रही हैं।

Jalish·02 Oct 2026
कई साल तक जैव‍िक कपास की खेती करने के बाद धार के क‍िसान प्रवीण पाटीदार अब रासायन‍िक खेती की ओर लौट आए हैं। फोटो- म‍िथ‍िलेश धर दुबे
ग्राउन्ड रिपोर्ट्स

जैव‍िक कपास की खेती से क्‍यों मुंह मोड़ रहे मध्‍य प्रदेश के क‍िसान?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कपास उत्पादन के प्रमुख राज्यों में शामिल मध्य प्रदेश में जैविक कपास का उत्पादन पिछले कुछ वर्षों से लगातार घट रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जैविक कपास के लिए जरूरी गैर-बीटी बीजों की मांग के मुकाबले केवल 30–40% बीज उपलब्ध हैं।

Mithilesh Dhar Dubey·11 Sep 2026
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs