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एडवाइजरीः पपीता के खेत में 24 घंटे से ज्यादा पानी का जलजमाव हुआ तो पौधे का बचना मुश्किल

लगातार हो रही वर्षा पपीता उत्पादक किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। यदि पपीता के खेत समतल नही है। जल की निकास की सुविधा ठीक नहीं है और खेत में पानी 24 घंटे से ज्यादा लग गया तो पपीता के पौधों को बच

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Ashish·Correspondent·23 Sep 2023· 2 min read

एडवाइजरीः पपीता के खेत में 24 घंटे से ज्यादा पानी का जलजमाव हुआ तो पौधे का बचना मुश्किल

एडवाइजरीः पपीता के खेत में 24 घंटे से ज्यादा पानी का जलजमाव हुआ तो पौधे का बचना मुश्किल

डॉ. एस.के. सिंह (प्रधान अन्वेषक, अखिल भारतीय फल अनुसन्धान परियोजना) का फेसबुक पोस्ट

इस समय बिहार में लगातार हो रही वर्षा पपीता उत्पादक किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के मौसम विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा जारी सूचना के अनुसार कल शाम 4 बजे तक विगत 24 घंटों के दौरान 80.4 मिमी बारिश दर्ज की गई। मानसून के सक्रिय होने के कारण अगले 24-36 घंटों के दौरान मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इसके बाद वर्षा की तीव्रता कम हो जाएगी, जिससे छिटपुट हल्की वर्षा होगी। कल शाम 4 बजे से आज सुबह 7 बजे तक 109.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। आज सुबह 7 बजे समाप्त हुए पिछले 24 घंटों के दौरान कुल 189.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। आज भी मानसून बहुत सक्रिय रहेगा और कल से धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाएगा। इसलिए, अगले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश की संभावना है।

बारिश के पानी में डूबा हुआ पपीते का बाग / PC- Prof. S.K. Singh's FB Post

लगातार हो रही वर्षा पपीता उत्पादक किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। यदि पपीता के खेत समतल नही है। जल की निकास की सुविधा ठीक नहीं है और खेत में पानी 24 घंटे से ज्यादा लग गया तो पपीता के पौधों को बचा पाना बहुत मुश्किल है। अतः उन्हें सलाह दी जाती है की लगातार अपने खेतों का भ्रमण करते रहे। पपीता के पौधों के आस पास किसी भी हालत में पानी लगने न दे। खेत से वर्षा के पानी को निकालते रहे। इसीलिए पपीता उत्पादक किसानों को सलाह दी जाती है कि पपीता को हमेशा मेड़ों पर लगाए एवं इस तरह के वर्षा के पानी को नालियों के माध्यम से खेत से निकलने की व्यवस्था करें।

आम के बाग पर प्रो. एस के सिंह का लेख यहां पढ़ेंः आम के बाग में फल तोड़ने के बाद और मंजर/बोर आने से पहले क्या करें?

यह समय पपीता उत्पादक किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है..... यदि तत्काल खेत से पानी नहीं निकाला गया तो पपीता को बचाना असंभव है।

लेखकः

डॉ एसके सिंह
प्रोफ़ेसर सह मुख्य वैज्ञानिक (पौधा रोग) एवं
विभागाध्यक्ष, पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ प्लांट पैथोलॉजी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय , पूसा , समस्तीपुर, बिहार

ईमेल ID- sksraupusa@gmail.com और sksingh@rpcau.ac.in

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