मिजोरम के फूलों की खुशबू पूरी दुनिया को आकर्षित करती है, मार्केटिंग के जरिए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जाएगा: चौहान

कृषि मंत्री शिवराज सिंह

इन दिनों केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह पूर्वोत्तर दौरे पर हैं। पहला दिन उनका मिजोरम में बिता। मिजोरम के कृषि क्षेत्र के विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि चाहे मिजोरम की फसलें हो, चाहे फल, पैशन फ्रूट्स, अदरक, हल्दी, गोभी, बैंगन, टमाटर इत्यादि सबका बहुत महत्व है। यहां के फूल की सुगन्ध सारी दुनिया को आकर्षित करती है। अब हमारा लक्ष्य है कि इन फसलों को केवल मिजोरम तक ही सीमित नहीं रहने देना है। इनकी मार्किटिंग, ब्राडिंग करके देश और दुनिया में भेजना है। इसमें हम कोई कमी नहीं छोड़ेंगे। हमें किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्वोत्तर दौरे के पहले दिन मिजोरम, इंफाल के थेनजोल स्थित बागवानी महाविद्यालय के दो नए भवनों का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। बागवानी महाविद्यालय, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय का ही हिस्सा है, जिसके प्रशासनिक सह अकादमिक और पारगमन भवन का केंद्रीय मंत्री चौहान द्वारा उद्घाटन किया गया।

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खराब मौसम के कारण चौहान बागवानी महाविद्यालय नहीं पहुंच पाएं, लेकिन वर्चुअल माध्यम से ही उन्होंने भवनों का उद्घाटन कर अपनी शुभकामनाएं दीं और संदेश प्रेषित किया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संदेश में कहा कि मैं आज मिजोरम में थेनजोल आने वाला था लेकिन मौसम खराब होने के कारण हेलीकॉप्टर से थेनजोल पहुंचना संभव नहीं हो सका। इसके लिए मैं आपसे माफी चाहता हूं।

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पूर्वोत्तर को आगे बढ़ाना पीएम का संकल्प
चौहान ने कहा कि मैं छात्रों और बेटे-बेटियों से भी बात करूंगा। मिजोरम अद्भुत प्रदेश है। पूर्वोत्तर को आगे बढ़ाना, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प है। विकसित भारत के लिए विकसित मिजोरम और विकसित मिजोरम के लिए, विकसित खेती और समृद्ध किसान जरूरी है।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने सभी से मिजोरम राज्य को विकसित बनाने में सहयोग करने का आह्वान भी किया।

1,500 से अधिक किसानों ने भाग लिया
इस अवसर पर मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) वी.के. सिंह, मुख्यमंत्री पु. लालदुहोमा और विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. अनुपम मिश्रा भी उपस्थित रहें। इस कार्यक्रम में किसानों और केवीके की भागीदारी के साथ नवीनतम बागवानी विकास को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। जिसमें 1,500 से अधिक किसानों ने भाग लिया।

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