26 जनवरी को देशभर में ट्रैक्टर परेड निकालेंगे किसान, 9 फरवरी से किसान-मजदूर महापंचायत राकेश टिकैत का बड़ा ऐलान

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भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने शनिवार को प्रयागराज में किसान महाकुंभ राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस दौरान किसान-मजदूर महापंचायत का आयोजन भी हुआ। इस अवसर पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने घोषणा किया कि 26 जनवरी को देशभर में किसान ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। किसानों के मुद्दों को लेकर उत्तर प्रदेश में 9 फरवरी से 28 फरवरी के बीच यूपी के अलग-अलग जिलों में 11 किसान-मजदूर महापंचायतें आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि शंभु और खनौरी बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन को और मजबूती दी जाएगी तथा किसानों की समस्याओं को लेकर संघर्ष जारी रहेगा।

26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड 

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि देश में चल रहे आंदोलन में हम किसानों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के दिन देशभर में किसान ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। यह परेड किसानों की MSP गारंटी कानून, कर्ज माफी, गन्ना मूल्य में वृद्धि, भूमि अधिग्रहण और मुफ्त बिजली जैसी मांगों को लेकर होगी।


9 फरवरी से यूपी में 11 महापंचायतें करेगी बीकेयू 

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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर पंजाब के खनौरी और शंभू बॉर्डर पर चल रहे 13 महीने से आंदोलन को भारतीय किसान यूनियन ने समर्थन दिया है। टिकैत ने कहा कि पंजाब के दोनों बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन और जगजीत सिंह डल्लेवाल की सेहत को ध्यान में रखते हुए हम उत्तर प्रदेश में 11 किसान महापंचायत आयोजित करेंगे। इसके बाद बीकेयू ने देश के प्रधानमंत्री के नाम अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।

यूपी में कब और कहां होंगी किसान मजदूर महापंचायत 

  • 9 फरवरी – फिरोजाबाद 
  • 10 फरवरी मैनपुरी 
  • 11 फरवरी आगरा 
  • 12 फरवरी हाथरस 
  • 17 फरवरी मुजफ्फरनगर 
  • 23 फरवरी गाजियाबाद 
  • 25 फ़रवरी पीलीभीत 
  • 26 फरवरी शाहजहांपुर 
  • 27 फरवरी अमेठी 
  • 28 फरवरी मिर्जापुर 


पीएम के नाम लिखी चिट्ठी

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भारतीय किसान यूनियन ने देश के प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखा। इसमें पीएम को संबोधित करते हुए कहा गया है कि आपको अवगत करना है कि देश का अन्नदाता व निर्माणदाता विकास की दो सबसे मजबूत धुरी है। प्रधानमंत्री जी यह वर्ग कभी भी देश को भूखा नहीं सोने देता कर्ज की मार हो या मौसम का प्रहार इसने सबको हंसते-हंसते सहा है, लेकिन मौजूदा हालात में यह वर्ग अपने वजूद को तलाश रहा है। बढ़ती हुई महंगाई ग्रामीण परिवारों पर बोझ बनने का काम कर रही है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव इन परिवारों से आने वाले बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। एक तरफ महंगाई और दूसरी तरफ बेरोजगारी बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल रही है। यह सब हालात इन परिवारों को कर्ज लेने पर मजबूर कर रहे हैं। जमीने बैंकों में बंधक हो चुकी हैं। अगर MSP गारंटी कानून हो और फसलों का सही भाव हो तो उनके सिर से यह भार कुछ काम हो सकता है। इसी वजह से देश का यह वर्ग आत्महत्या करने पर मजबूर हैं।

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