World Food Day 2024: क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड फ़ूड डे, जानिए क्या है इसका महत्व?

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वर्ल्ड फ़ूड डे हर साल 16 अक्टूबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा और भुखमरी के मुद्दे के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। साल 2024 की थीमबेहतर जीवन और बेहतर भविष्य के लिए भोजन का अधिकारहै, जो पर्याप्त भोजन तक पहुंच के मौलिक मानव अधिकार और भूख को मिटाने के लिए दुनिया भर की प्रतिबद्धता पर जोर देता है।

भोजन जीवन का आधार है। इसके बावजूद लाखों लोग रोजाना भूखे पेट सोते हैं। जी हाँ, यह एक ऐसा सच है जिसे हम नजरअंदाज नहीं कर सकते। FAO के मुताबिक़ वर्तमान में दुनिया भर में लगभग 730 मिलियन लोग भूख का सामना कर रहे हैं, और इस समस्या का समाधान सस्टेनेबल एग्रीकल्चर सिस्टम और सबके सहयोग से ही संभव है। सरकारें, संस्थान और किसान इस दिशा में निरंतर काम कर रहे हैं, लेकिन इसमें आम जनता कि भूमिका भी जरुरी है। हाल ही में आई ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) 2024 की रिपोर्ट में 127 देशों में भारत 105वें स्थान पर है, जो हम सबको सोचने पर मजबूर करता है कि अभी भी जब हम विकसित भारत बनने की राह पर है देश में भूखमरी का ये स्तर है। यह हमारे देश के लिए एक बहुत बड़ी समस्या है। महत्वपूर्ण बात ये है कि हर किसी को भोजन मिले ये उसका फंडामेंटल राइट है और हम समाज के तौर पर ये देने में भी नाकाम साबित हो रहे हैं। यही सब सोचने, समझने और भुखमरी और खाद्य सुरक्षा के प्रति कुछ ठोस निर्णय करने के लिए ये दिन मनाया जाता है।

क्या है इस दिन का महत्व?

वर्ल्ड फ़ूड डे हर साल 16 अक्टूबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा और भुखमरी के मुद्दे के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इसका आयोजन संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के द्वारा सन् 1945 में संगठन की स्थापना की सालगिरह की रूप में किया जाता है। इसका उद्देश्य सभी को सुरक्षित, पौष्टिक और प्रयाप्त भोजन उपलब्ध कराना है। यह दिन भूख से मुक्त दुनिया की दिशा में सतत कृषि और खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।

वर्ल्ड फ़ूड डे 2024 का थीम
साल 2024 की थीमबेहतर जीवन और बेहतर भविष्य के लिए भोजन का अधिकारहै, जो पर्याप्त भोजन तक पहुंच के मौलिक मानव अधिकार और भूख को मिटाने के लिए दुनिया भर की प्रतिबद्धता पर जोर देता है।
इस साल की थीम को देखते हुए FAO इस बात पर जोर देता है कि सभी को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना न केवल एक नैतिक अनिवार्यता है, बल्कि स्वास्थ्य, कल्याण और आर्थिक विकास को बेहतर बनाने का एक रास्ता भी है। जब लोगों, विशेष रूप से बच्चों को पर्याप्त पोषण मिलता है, तो यह एक उत्पादक और स्वस्थ समाज में योगदान देता है।
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