श‍िवराज सिंह चौहान को कृष‍ि मंत्रालय ही क्‍यों म‍िला, कहीं ये वजह तो नहीं?

krishi mantri - News Potli
मध्‍य प्रदेश के चार बार मुख्‍यमंत्री और छह बार सांसद रह चुके 65 वर्षीय श‍िवराज सिंह चौहान मोदी सरकार के नये मंत्रीमंडल में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री बनाये गये हैं। इसके अलावा उन्‍हें ग्रामीण विकास मंत्रालय की ज‍िम्‍मेदारी भी सौंपी गई है। प‍िछले व‍िधानसभा चुनाव और दो लोकसभा चुनावों में मध्‍य प्रदेश में बीजेपी की शानदार जीत में श‍िवराज सिंह की महती भूमिका रही। लेकिन उन्‍हें कृष‍ि मंत्रालय ही क्‍यों द‍िया गया? आइये जानते हैं इसके पीछे की असल वजह-

श‍िवराज सिंह चौहान मध्‍य प्रदेश के लगभग 16 वर्षों तक मुख्‍यमंत्री रहे। उनके कार्यकाल में दौरान मध्य प्रदेश को कृषि क्षेत्र में एक शक्तिशाली राज्य बनाने का श्रेय दिया जाता है। उनकी देखरेख में, मध्य प्रदेश भारत का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक (उत्तर प्रदेश के बाद) और सरकारी खरीद एजेंसियों (पंजाब के बाद) का आपूर्तिकर्ता भी बन गया। मध्‍य प्रदेश सोयाबीन, चना, टमाटर, लहसुन, अदरक, धनिया और मेथी का देश का अग्रणी उत्पादक भी है, इसके अलावा प्याज (महाराष्ट्र के बाद), सरसों (राजस्थान के बाद) और मक्का (कर्नाटक के बाद) में दूसरे नंबर पर है।

2014-15 से 2023-24 तक पिछले 10 वर्षों के दौरान, मध्य प्रदेश की वार्षिक कृषि वृद्धि औसतन 6.5 प्रतिशत रही है, जबकि इस अवधि के लिए अखिल भारतीय औसत 3.7 प्रतिशत रहा है। चौहान के कार्यभार संभालने से इस क्षेत्र की नीतिगत रूपरेखा में सुधार आने की उम्मीद है। चौहान के नेतृत्व में एमपी की कृषि में आए बदलाव की तुलना स्वतंत्रता के बाद के पंजाब में प्रताप सिंह कैरों द्वारा किए गए काम से की जा सकती है। यह बदलाव मुख्य रूप से 2004-05 और 2021-22 के बीच सिंचाई कवरेज को दोगुना करके 80 प्रतिशत से अधिक करने के कारण हुआ। सिंचाई की बेहतर पहुंच ने किसानों को साल में एक से अधिक फसल उगाने में सक्षम बनाया: एमपी की फसल तीव्रता 1.9 आज पंजाब के बराबर है और अखिल भारतीय आंकड़े 1.55 से कहीं अधिक है।

सिंचाई में निवेश के साथ-साथ, नए ट्यूबवेल बिजली कनेक्शन और नहरों के निर्माण/मरम्मत के माध्यम से, चौहान की सरकार ने कृषि उपज के विपणन के लिए बुनियादी ढाँचा बनाने पर भी ध्यान केंद्रित किया। वर्ष 2010-11 में मात्र 13 लाख किसानों के पास कनेक्शन थे, जो अगले दस वर्षों में बढ़कर 32.5 लाख हो गए। नहरों का जाल बिछाया, जिससे सिंचित क्षेत्र का रकबा करीब दोगुना हो गया है। प्राथमिक एपीएमसी (कृषि उपज बाजार समिति) यार्ड के बाहर भी सरकारी खरीद केंद्र स्थापित किए गए। गांवों के करीब उप-मंडियों, समितियों और गोदामों के माध्‍यम से उपज की खरीद हुई।

शिवराज के कार्यकाल में मध्‍य प्रदेश के किसानों को कई बार गेहूं खरीद पर एमएसपी के अतिरिक्त बोनस भी दिए गए, जिससे खेती में मुनाफा बढ़ा, राज्य की आय बढ़ी और किसानों के जीवन स्तर में सुधार हुआ। रिपोर्ट बताती है कि शिवराज के कार्यकाल में गेहूं समेत कई कृषि उपज में भारी वृद्धि हुई। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत सालाना छह हजार रुपये दिए जा रहे हैं, लेकिन शिवराज सरकार ने इसमें अपनी तरफ से छह हजार रुपये बढ़ा दिए। अब मध्य प्रदेश के किसानों को सालाना 12 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। कृषि ऋण पर किसानों को ब्याज नहीं देना पड़ता है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2004-05 और 2021-22 के बीच मध्य प्रदेश की कुल कृषि भूमि 149.75 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 158.23 लाख हेक्टेयर हो गया और इस दौरान उत्पादकता में तेज वृद्धि देखी गई।

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